मंडला 1 मार्च 2022
नाबार्ड के कृषि क्षेत्र संवर्धन निधि अंतर्गत मंडला जिले के इंद्री संकुल से 25 किसानों का तीन दिवसीय एक्सपोजर विजिट सह प्रशिक्षण कार्यक्रम, ग्रामीण विकास एवं महिला उत्थान संस्थान द्वारा किया गया। इस भ्रमण सह प्रशिक्षण कार्यक्रम अंतर्गत नैनपुर विकासखंड के 25 किसानों को जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर द्वारा विकसित “जवाहर मॉडल” एवं मेकल फार्मर ट्रडिसनल प्रड्युशर कम्पनी प्रा. लि. द्वारा औषधीय फसलों के उत्पादन एवं मार्केटिंग विषय पर भ्रमण कराया गया।
एक्सपोजर विजिट सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ राज्यसभा सांसद सम्पतिया उईके एवं नाबार्ड से जिला विकास प्रबंधक अखिलेश वर्मा एवं जिला सहकारी बैंक के सहायक प्रबन्धक अतुल दुबे के द्वारा हरी झंडी दिखाकर जबलपुर के लिये रवाना किया। राज्यसभा सांसद ने सभी किसानों को बताया कि किसानों के द्वारा ग्राम स्तर पर परम्परागत तरीके से खेती की जाती है जिसकी वजह से लागत के अनुपात में उत्पादन कम होता है यहां के किसान सिर्फ वर्षा आधारित फसल पर ही निर्भर हैं सिचाई का साधन न होने की वजह से ज्यादातर किसान एक फसली फसल का उपयोग करते हैं। औषधीय फसलों की खेती एवं बर्रा जमीन पर जवाहर मॉडल को अपनाकर किसान अपनी कृषि से आय को बढ़ा सकते हैं। उन्होंने सभी किसानों को इस भ्रमण के लिए शुभकामनाएँ देते हुए आव्हान किया कि आप इसको समझें और तकनीक का अनुशरण करें। नाबार्ड संस्था के डीडीएम ने कहा कि ’जवाहर मॉडल’ को जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है, जिसमें किसान के जुताई जैसे बहुत से खर्चे बच जाते हैं। इसके जरिए किसान अपनी बेकार और बंजर पड़ी जमीन में फसलें उगा सकते हैं। घर की खाली पड़ी छतों पर भी कई तरह की फसलें लगा सकते हैं। एक एकड़ में लगभग 1200 बोरियां रख सकते हैं, यही नहीं अरहर के साथ दूसरी फसलें भी ले सकते हैं, जैसे कि इसमें पालक, मूली, धनिया, बैंगन, टमाटर, लौकी, मिर्च जैसी फसलें लगा सकते हैं। बोरी में हल्दी भी लगा सकते हैं, हल्दी जैसी फसलें छाव में भी तैयार हो जाती हैं। इसके साथ ही शहडोल में औषधीय पौधों की खेती हेतु भ्रमण पर भेजा जा रहा है जिससे कि फसल विविधीकरण के द्वारा कृषि में जोखिम को कम करते हुए कृषि से आय को सुनिश्चित कर सकते हैं। औषधीय फसलों जैसे कि शतावर, अश्वगंधा इत्यादि में बहुत अधिक पानी की आवश्यकता नही होती और इसके लिए कम गहराई एवं मिट्टी वाली जमीन पर भी लगाया जा सकता है।
तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान किसानों के द्वारा ’’जवाहर मॉडल’’ में बोरी पद्धित द्वारा उत्पादित फसलों का अवलोकन किया गया। इसमें 6-6 फीट की दूरी में बोरी रखकर पूर्णतः जैविक तरीके से फसल का उत्पादन किया जा रहा है एवं 6-6 फीट के बीच में 2-2 फीट की दूरी पर अदरक टमाटर हल्दी की फसल ली जा रही है इस पद्धिति में कम पानी, कम लागत आती है एवं उत्पादन अधिक होता है। जवाहर मॉडल विकसित करने वाले वैज्ञानिक डॉ मोनी थामस ने बताया कि अरहर की एक पौधे से 3 से 4 किग्राम बीज उत्पादन होता है और वर्ष में दो बार फसल लेते है। भ्रमण के दौरान किसानों द्वारा अपनी जिज्ञासाओं का समाधान हेतु कृषि वैज्ञानिकों बहुत सारे प्रश्न थे जिनका समाधान डॉ. मोनी थामस ने किया। वहीं दूसरी ओर औषधिय पौधों का भ्रमण किया गया, भ्रमण कि दौरान डॉज्ञानेन्द्र तिवारी ने सभी पौधों के विषय में बताया एवं उनके गुणो के विषय में जानकारी दी गई।
मेकल फार्मर ट्रडिसनल प्रड्युशर कम्पनी प्रा. लि. शहडोल में किसानों को शहडोल के ग्रामपंचायत औढ़ेरा का भ्रमण कराया गया यहां पर ग्राम के सभी लोगों के द्वारा अपने अपने घरों में मुनगा का पेड़ लगाये गये है। यहां के लोग मुनगे की पत्ती को एकत्र करते हें और प्रड्युशर कम्पनी में 60 रूपये प्रति किलों बेचतें हैं यहां के किसानों द्वारा बताया गया कि हम लोग अपनी खेत में 50-50 पौधे मुनगे के पोधे लगाये हैं जिससे हर 6 माह में लगभग 25000/- की आय होती है एवं इससे गोंद भी निकालते हैं जो 100रू. प्रति किग्रा है। इस ग्राम में एक हजार से उपर पोधे लगाये गयें हैं। वहीं पर किसानों के द्वारा लेमनग्रास का रोपड़ किया गया है जिससे किसानों को प्रतिवर्ष 50 से 60 हजार रू. की आय होती है। मेकल फार्मर ट्रडिसनल प्रड्युशर कम्पनी के सी ई ओ प्रदीप बघेल ने बताया कि हमारे क्षेत्र में लगभग 10 हजार किसानों के द्वारा मुनगा, लेमनग्रास अश्वगंधा की खेती कर रहे हैं इसमें ग्राम की महिला समूह भी जुडी हुई हैं और अच्छा लाभ कमा रही हैं। इन्हों ने बताया कि यदि मंडला के किसान इनका उत्पादन करते हैं तो हम इनके साथ अनुबंध कर इनकी उत्पादित सामग्री को क्रय करेंगें ।
भ्रमण में गये किसानों ने (किसन लाल मरावी )’’जवाहर मॉडल’’ एवं शहडोल का भ्रमण कर बताया कि हम लोगों को बहुत अच्छा लगा हमारे यहां इन फसलों के लिये जलवायु एवं मिट्टी उपयुक्त है और कम लागत में अधिक उत्पादन किया जा सकता है। हमारे क्षेत्र में इसका माडल बनायेंगे। संस्था प्रमुख रामकुमार सिंगौर ने बताया कि इन किसानों का सतत फालोअप किया जावेगा एवं जबलपुर कृषि वि.वि. एवं शहडोल से सतत मार्गदर्शन लेकर किसानों को लाभ दिलाया जायेगा। मंडला जिले में भी संस्था द्वारा ऐसा माडल तैयारकरने का प्रयास किया जावेगा ताकि अन्य किसान इस तकनीक को देख कर अपने-अपने क्षेत्र में इसका अनुसरण कर अधिक से अधिक लाभ कमा सके।
