Reva India News
ब्रेकिंग न्यूज़मंडला हमारा जिला

जन सहभागिता से होगा वनों का संरक्षण विश्व वानिकी दिवस पर विश्राम गृह कालपी में वन समितियों से हुई परिचर्चा

मण्डला 22 मार्च 2022

वन समितियों को क्रियाशील एवं अधिक सशक्त बनाने के लिए विश्व वानिकी दिवस पर पश्चिम (सा.) वनमंडल मंडला द्वारा वनमंडल अधिकारी पश्चिम (सा.) वनमंडल मंडला कमल अरोरा के मार्गदर्शन में वन विश्राम गृह कालपी में वन समितियों से परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। परिचर्चा का मुख्य विषय जन सहभागिता से वनों के संरक्षण के लिए मध्यप्रदेश शासन का संकल्प 2021 रहा। परिचर्चा में मुख्य अतिथि पुसवा सिंह उद्दे, वन समिति सभापति, संदीप नामदेव, जनपद सदस्य बीजाडंाडी, रामचन्द्र यादव, मंडल अध्यक्ष भाजपा बीजाडाडी, जी.के. चतुर्वेदी, उप वनमंडल अधिकारी निवास, के.एस. रंधा उप वनमंडल अधिकारी महाराजपुर, समस्त परिक्षेत्रों के अधिकारी व कर्मचारी, ग्रामों के सरपंच एवं वन समितियों के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष उपस्थित रहे। उप वनमंडल अधिकारी जी.के. चतुर्वेदी ने परिचर्चा के दौरान मध्यप्रदेश शासन द्वारा राजपत्र में पारित संकल्प पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम में उपस्थित वन समितियों के हितग्राहियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने वन प्रबंधन में जन सहयोग प्राप्त करने के लिए पूर्व में संकल्प 22 अक्टूबर 2001 को जारी किया था जिसमें समय-समय पर जारी आदेशों को अधिकृमित करते हुये यह नवीन पुनरीक्षित संकल्प पारित किया गया है जिसे स्थानीय समुदायों की भूमिका को अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से जन सहभागिता से वनों के संरक्षण के लिए नवीन संकल्प 2021 पारित किया है। नवीन संकल्प के माध्यम से वर्तमान ग्राम वन समितियों व वन सुरक्षा समितियों के स्थान पर सामुदायिक वन प्रबंधन समितियों के गठन का प्रस्ताव रखा गया है। सामुदायिक वन प्रबंधन समितियों का गठन पंचायत स्तर पर ग्रामसभा के प्रस्ताव पर किया जाएगा। ये समितियां वर्तमान में प्रचलित कार्य आयोजना के अनुसार वन्य प्राणी संरक्षित क्षेत्रों, सघन वन व बिगड़े वन क्षेत्रों का प्रबंधन करेंगी। ग्रामसभा के प्रस्ताव एवं अनुमोदन उपरांत वन मंडलाधिकारी गठित वन समितियों का पंजीकरण कर प्रमाण पत्र जारी करेंगे। इन समितियों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक तिहाई पद महिला हितग्राहियों के लिए आरक्षित रहेंगे।

परिचर्चा में श्री चतुर्वेदी ने वन समितियों के अधिकारों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वन समिति को आवंटित वन क्षेत्र से प्राप्त वनोपज के प्रबंधन, विदोहन एवं विपणन की व्यवस्था का अधिकार रहेगा। वन क्षेत्रों से लघु वनोपजों के संग्रहण, चराई, जलाऊ निकासी के लिए समिति की अनुमति आवश्यक रहेगी। आवंटित वन क्षेत्र की सफाई व विरलन से प्राप्त होने वाले वनोपज पर वन समितियों का पूर्ण अधिकार रहेगा। मुख्य अतिथियों ने बताया कि पूर्व में हमारे वनों में आंवला, हर्रा, बहेड़ा जैसी वन औषधियों का संग्रहण अधिक मात्रा में किया जाता था। परन्तु विनाशकारी विदोहन के परिणामस्वरूप वर्तमान में वनों में वन औषधियां लगभग समाप्त हो गई हैं। शासन द्वारा पारित संकल्प के अनुसार गठित वन समितियों को वन क्षेत्रों के संरक्षण व संवर्द्धन के क्षेत्र में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए जिससे वन क्षेत्रों को बचाया जा सके और वहां से प्राप्त होने वाली वनोपज व वन औषधियों के माध्यम से ग्रामीणों को लाभ प्राप्त हो सके। वन समितियों द्वारा किए जाने वाले कार्य से वन भी संरक्षित होते हैं और वनवासियों को भी वन क्षेत्रों से आय प्राप्त होती है।

Related posts

आज से शुरू होगा हजरत कुतुबुददीन शाह चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह का उर्स मुबारक

Reva India News

स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के संबंध में बैठक 29 को

Reva India News

नन्ही माइशा नूर ने रखा पहला रोजा

Reva India News

Leave a Comment