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नरवाई जलाना वातावरण, मृदा और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है कलेक्टर ने स्वयं किया सुपरसीडर के प्रदर्शन का अवलोकन

 

मंडला 23 नवंबर 2024
नरवाई पराली जलाना एक बड़ी समस्या है, इससे वातावरण में प्रदूषण फैलता है एवं मृदा के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। नरवाई जलाने पर रोकधाम किया जाना अति आवश्यक है। नरवाई जलाने से वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ता है और मृदा का कार्बनिक प्रदार्थ कम होने के साथ-साथ मृदा के लाभकारी सूक्ष्म जीव भी नष्ट होते हैं। सुपरसीडर का करें उपयोग फसल अवशेष प्रबंधन अंतर्गत जिले में सुपरसीडर से पहली बार बोनी हो रही है। कलेक्टर सोमेश मिश्रा द्वारा सुपरसीडर से बोनी करने हेतु किसानों को जागरूक किए जाने के निर्देश दिए। कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा एवं सीईओ जिला पंचायत श्रेयांश कूमट ने स्वयं सुपरसीडर के प्रदर्शन का अवलोकन किया और किसानों को नरवाई न जलाकर सुपरसीडर के उपयोग हेतु कृषकों को प्रेरित किया। सुपर सीडर के उपयोग से धान कटाई उपरांत नई फसल के लिए खेत तैयार करने के लिए अलग से कल्टीवेटर, रोटावेटर और सीड ड्रिल की आवश्यकता नहीं पड़ती है। एक ही यंत्र से तीनों काम एक साथ एक ही समय में हो जाता है। समय की बचत के साथ साथ लागत भी बहुत कम हो जाती है। सुपरसीडर खरीदी में 1.05 लाख की सब्सिडी भी है। हार्वेस्टर से धान कटाई उपरांत सुपर सीडर से सीधे रबी फसलों की बोनी करने पर किसानों को 10 से 15 दिन की बचत होती है और लागत में भी कमी होती है।

सुपरसीडर की बोनी करने पर कृषि विभाग देगा 1600 का अनुदान

उपसंचालक कृषि मधु अली ने बताया कि ग्राम औघटखपरी में नरवाई जलाने की समस्या को दूर करने के लिए कृषि विभाग और अभियांत्रिकी विभाग द्वारा सुपरसीडर से बोनी करने के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। सुपरसीडर का प्रदर्शन कर किसानों को जागरूक किया गया। नरवाई में आग न जलाई जाए इसलिए सुपरसीडर की बोनी करने वाले कृषकों को कृषि विभाग 1600 प्रति एकड़ का अनुदान देगी।

नरवाई जलाने वालों पर अर्थदण्ड का प्रावधान

नरवाई जलाने वालों पर अर्थदण्ड अधिरोपित करने के जारी आदेश के अनुसार 2 एकड़ से कम पर 2500 प्रति घटना पर दो से पांच एकड़ तक 5 हजार प्रति घटना पर एवं 5 एकड़ से अधिक पर 15 हजार प्रति घटना पर अर्थदण्ड का प्रावधान किया गया है। जिले में रबी फसल के अन्तर्गत बोई जाने वाली फसलों की कटाई के पश्चात किसानों के द्वारा नरवाई (फसलों के अवशेषों) जला दी जाती है जिसके कारण भूमि में उपलब्ध जैव विविधिता समाप्त हो जाती है। भूमि की ऊपरी परत में पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व होते हैं जो आग लगने के कारण जलकर नष्ट हो जाते हैं। साथ ही नरवाई जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है। भारत सरकार द्वारा खेतों में फसल अवशेष नरवाई जलाने की घटनाओं की मॉनिटरिंग सेटेलाईट के माध्यम से की जा रही है। प्रदेश में नरवाई जलाने की घटनाएं मुख्यतः गेहूँ की फसल कटाई के बाद होती है जो लगातार बढ़ती जा रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश के क्रम में फसलों की कटाई के उपरांत फसल अवशेषों को खेतों में जलाए जाने से प्रतिबंधित किया गया है। पर्यावरण विभाग के नोटिफिकेशन द्वारा निर्देश जारी किये गये हैं जिसके अन्तर्गत नरवाई जलाने की घटनाओं पर अर्थदण्ड अधिरोपित करने का प्रावधान किया गया है जिसमें 2 एकड़ से कम पर 2500 प्रति घटना पर दो से पांच एकड़ तक 5 हजार प्रति घटना पर एवं 5 एकड़ से अधिक पर 15 हजार प्रति घटना पर अर्थदण्ड का प्रावधान किया गया है।

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