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परिवार से बहिष्कृत बैगा बच्चों का किया गया पुर्नवास विभागीय समन्वय से बच्चों का बैगा बालक आश्रम में दिलाया गया प्रवेश कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा के मार्गदर्शन में बाल कल्याण समिति की पहल

1 जून 2025, मंडला
बाल कल्याण समिति,मंडला देखरेख और संरक्षण के लिए जरुरतमंद बच्चों के विकास, सुरक्षा उपचार, विकास और पुर्नवास के लिए कार्य कर रही है। बाल कल्याण समिति ने मंडला जिला कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा के मार्गदर्शन में बैगा जनजाति के दो बच्चों को रेस्क्यू करने के दो माह बाद उनका आवासीय विद्यालय में प्रवेश सुनिश्चित  किया।
बैगा जनजाति के दो बच्चों को उनके अभिभावकों ने मार्च के प्रथम सप्ताह में माहिष्मती घाट मंडला में छोड़ दिया था। इन बच्चों की जानकारी मिलते ही बाल कल्याण समिति द्वारा विभागीय अमले के सहयोग से बच्चों को रेस्क्यू  किया और आर्दश बालगृह  पहुंचाया। बच्चों के जैविक माता-पिता की जानकारी जुटाई गई। विशेष किशोर पुलिस इकाई के माध्यम से माता को बाल कल्याण समिति के समक्ष उपस्थित कराया गया। परामर्श के दौरान माता-पिता के अत्यधिक शराब के सेवन और लड़ाई के तथ्य की जानकारी मिली। माता-पिता बच्चों के लालन-पालन में अत्यधिक लापरवाह थे, एकाध बार पहले भी बच्चों को घर से निकाल दिया था। मार्च के प्रथम सप्ताह में बच्चों के साथ गाली-गलौच कर उन्हें दोबारा घर न आने के चेतावनी के साथ माहिष्मती घाट मंडला में छोड़ दिया था। दो-तीन दिन से भूखे प्यासे बच्चों को रेस्क्यू किया गया। रेस्क्यू के समय एक बच्चे के आंखों में गंभीर संक्रमण था। पहले शासकीय चिकित्सालय में उपचार कराया गया। बाल कल्याण समिति ने बाल गृह के निरीक्षण के दौरान निजी क्षेत्र के नेत्र रोग विशेषज्ञ से भी उपचार कराया ।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष गजेन्द्र गुप्ता, सदस्य श्रीमती तृप्ति शुक्ला, रंजीत कछवाहा, सुश्री शशि पटेल और संतोष कुमार यादव ने बच्चों के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए जनजातीय कार्य विभाग से समन्वय कर बैगा बालक आश्रम में प्रवेश हेतु पहल की। प्रवेश हेतु आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता नहीं थी। बाल कल्याण समिति, बालगृह और प्रशासनिक अमले के संवेदनशीलता के कारण सभी दस्तावेज समय पर तैयार हुआ। बैगा बालक आश्रम ने विद्यालय के नवीन सत्र में बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित किया। बच्चे अभी ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण में शामिल हो रहे हैं। एसडीएम मंडला सोनल सिडाम, सहायक आयुक्त जनजाति कार्य वंदना गुप्ता और अधीनस्थ अमले ने रेस्क्यू से लेकर प्रवेश तक की प्रक्रिया में संवेदनशीलता से बाल कल्याण समिति को सहयोग प्रदान किया। बाल कल्याण समिति और प्रशासनिक अमले ने बच्चों की पहचान उजागर नहीं होने दिया।

बाल कल्याण समिति क्या करती है ?

          बाल कल्याण समिति भारत में किशोर न्याय अधिनियम 2015 के तहत गठित एक स्वायत्त संस्था है, जो उन बच्चों से संबंधित शिकायतों को संभालने और हल करने के लिए है जो या तो त्याग दिए गए हैं, अनाथ हैं, माता-पिता द्वारा स्वेच्छा से दिए गए हैं या खो गए हैं और जिन्हें विकास, सुरक्षा, उपचार, विकास और पुनर्वास से संबंधित मुद्दों पर देखभाल की आवश्यकता है।

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