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बरसात में होने वाली संक्रामक बीमारी से बचाव

मंडला 9 जुलाई 2025

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.जे. मोहन्ती ने जन समुदाय के लिए एडवाजरी जारी की है कि बरसात के समय में जल जनित बीमारी होने की सम्भावना हो सकती है। बरसात में अक्सर उल्टी-दस्त, आव, पेचिस, पेटदर्द, डायरिया पीलिया, टायफाइड, बुखार, मलेरिया बीमारियाँ होती है। बीमारी से बचने के लिए सावधान रहें। इसके उपाय करें एवं स्वस्थ रहें। संक्रामक बीमारी से बचने के लिए ताजा भोजन का सेवन करें, शुद्ध पानी पियें (उबला पानी, आरो का पानी, फिल्टर, हैण्ड पम्प का पानी पियें एवं छानकर) कुएं, नदी, नाला, पोखर, झील का पानी न पियें, पानी क्लोरीनेशन करके पानी पियें। सड़ीगली सब्जी, फल, बासा खाना न खायें, मांस का बरसात के दिनों में सेवन न करें, व्यक्तिगत स्वच्छता अपनायें, खाद्य पदार्थ को छूने से पहले साबुन से अच्छी तरह हाथ धोयें, संक्रमित चीजों के छूने के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोयें, भोजन करने से पहले या शौच के बाद हाथों को अच्छी तरह धोयें और स्वच्छ शौचालय का उपयोग करें। डॉक्टर के परामर्श से उल्टी-दस्त के लिए टेबलेट फ्यूराजोलाडिन, मेट्रोजिन, डायक्लोमिन, मेट्रोक्लोरापामाइड, जिंक, ओआरएस का घोल, खीरा, दही, शिकंजी, चावल का पानी (माड) तथा तरल पदार्थ का अधिक मात्रा में सेवन करें। दस्त से संबंधित संक्रामक बीमारी होने पर नजदीकी अस्पताल जायें, ग्राम स्तर में आशा कार्यकर्ता डीपो होल्डर के माध्यम से जीवन रक्षक दवाईयां प्राप्त करें। बरसात के दिनों में वेक्टर जनित रोग जैसे मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, फायलेरिया (हाथी पांव) जैसे गंभीर बीमारी होती है। गंदा पानी, नाली गड्ढों में पानी एकत्रित होने से मच्छर के लार्वा से अंडे पनपते हैं। मलेरिया मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है। जिसमें तेज बुखार, सिरदर्द, हाथ-पैरों में ऐठन व उल्टी होती है। डेंगू का लार्वा साफ पानी में पैदा होता है जैसे कूलर, टूटे हुए टायर, टंकी में एडीज मच्छर के लार्वा पनपते हैं। एडीज मच्छर के काटने से डेंगू होता है। इसका वायरस सीधे हड्डी पर अटैक करता है, जिसके कारण असहनीय दर्द होता है। शरीर में चकत्ते के साथ तेज बुखार होता है।

मलेरिया, डेंगू, चिकिनगुनिया, फायलेरिया से बचने हेतु घर के आसपास सफाई रखें। पानी इकट्ठा न होने देवें, गड्ढों को भरें, टायर, कबाड़ समान ढक्कर रखें, इनमें पानी इकट्ठा न होने दें। कूलर व टंकी के पानी को एक सप्ताह में खाली करें। नीम का धुआं करें, शाम के समय खिड़की, दरवाजा बंद रखें, रात्रि में सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें, पूरी अस्तीन के कपड़े पहनें, मच्छर से बचाव के साधन जैसे- क्रीम, क्वाइल रिपेलेन्ट इत्यादि का उपयोग करें। बुखार आने पर नजदीकी अस्पताल जाकर खून की जांच करायें एवं ग्रामीण क्षेत्र में आशा कार्यकर्ता के पास जाकर खून की जांच करायें और दवायें प्राप्त करें। शुद्ध पेयजल की कमी एक आम समस्या है, बारिश में यह समस्या बढ़ जाती है।

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