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ओशो ध्यान शिविर में बोले स्वामी गुरु शिष्य के जीवन में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाते हैं

                              मण्डला। कटरा स्थित ओशो ध्यान केन्द्र में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर ओशो के अनुयायी ने ध्यान व गुरूपूर्णिमा कार्यक्रम का आयोजन किया। तीन दिवसीय इस आयोजन में ध्यान, प्रवचन, और उत्सव रहा। वहीं गुरूपूर्णिमा के दिन ओशो के अनुयायी उनके प्रति अपनी श्रृद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते रहे और उनके द्वारा बताए गए ध्यान के तरीकों का अभ्यास करते दिखे गए। ध्यान, भजन, और गुरु के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। इस अवसर स्वामी ध्यान भारती जी ने कहा कि ओशो का मानना है कि गुरु शिष्य के जीवन में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाते हैं और उन्हें अपनी चेतना में गहरा संबंध स्थापित करने में मदद करते हैं। गुरु पूर्णिमा, गुरु-शिष्य संबंधों का उत्सव है, जहां शिष्य अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं ओशो के अनुसार गुरु ज्ञान नहीं, बल्कि चेतना देते हैं गुरु एक बीज की तरह हैं जो शिष्य को अंकुरित होने पनपने और खिलने में मदद करता है गुरु पूर्णिमा शिष्य के लिए अपने गुरु के प्रति प्रेम और भक्ति व्यक्त करने का दिन है।  वही मॉ भट्टी भारती जी ने कहा कि ओशो के ध्यान और विचार आत्म-निरीक्षणऔर आत्म-अवलोकन को प्रोत्साहित करते हैं जिससे व्यक्ति अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहारों को बेहतर ढंग से समझ पाता है ओशो के सक्रिय ध्यान जैसे कि गतिशील ध्यान, शारीरिक गतिविधि और भावनात्मक मुक्ति प्रदान करते हैं, जिससे तनाव और तनाव कम होता है। ओशो के ध्यान, विशेष रूप से गतिशील ध्यान, ऊर्जा के प्रवाह को उत्तेजित करते हैं, जिससे व्यक्ति अधिक ऊर्जावान और जीवंत महसूस करता है। ओशो के विचारों और ध्यान विधियों से, व्यक्ति वर्तमान क्षण में अधिक मौजूद रहना सीखता है, जो उनके अनुभवों को बेहतर बनाता है और उन्हें अपने आसपास के लोगों और दुनिया से बेहतर ढंग से जुडऩे में मदद करता है। इस अवसर पर मॉ उमा भारती जी व मॉ प्रेम माधुरी जी ने बताया कि ओशो के विचार और ध्यान, आध्यात्मिक विकास और परिवर्तन के लिए एक शक्ति शाली उपकरण हो सकते हैं ओशो के सक्रिय ध्यान, जैसे कि गतिशील ध्यान, कुंडलिनी ध्यान और अन्य, विभिन्न शारीरिक और मानसिक लाभ प्रदान करते हैं। इन लाभों में शामिल हैं। सक्रिय ध्यान शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को उत्तेजित करते हैं, जिससे शारीरिक स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती में सुधार हो सकता है।  वही इस अवसर पर आलोक नरेलिया ने बताया कि तीन दिवसीय इस आयोजन में ओशों के अनुयायी पहुंचे जिन्होंने ओशो के विचारों और ध्यान विधियों से लाभ मिलता है। ओशो के विचारों से आत्म-जागरूकता तनाव में कमी, बढ़ी हुई जीवन शक्ति, और आध्यात्मिक विकास जैसे लाभ हो सकते हैं उनके सक्रिय ध्यान विधियों से, जैसे कि गतिशील ध्यान, भावनात्मक स्वास्थ्य, और ऊर्जा का प्रवाह बेहतर हो सकता है।  ओशो के विचारों और ध्यान विधियों से मिलने वाले  लाभ मिला है।  इस अवसर पत्रकार परिषद के द्वारा स्वामी ध्यान भारती जी का पुष्पमाला से स्वागत करते हुए छतरी भेंट की इस दौरान पत्रकार परिषद जिला अध्यक्ष नीरज अग्रवाल, समाज कल्याण प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष कैलाश डेहरिया, वरिष्ठ समाजसेवी सुधीर कांसकार, दीपक कछवाहा, किशोर रजक, अनमोल अग्रवाल, रोहित बघेल, अनिल मिश्रा, आकाश रघुवंशी, श्रीमति सुनीता सैयाम, श्रीमति दीप्ती नरेलिया, श्रीमति उमा यादव, श्रीमति शीतल वैष्णव, आनंद, वेदांत, प्रेम, डॉ राय, उत्सव सहित दूर दराज व अन्य शहरों से आए ओशो प्रेमी मौजूद रहे।

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