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अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस के अवसर पर एडीआर सेन्टर जिला न्यायालय मण्डला में विधिक जागरुकता शिविर सम्पन्न

मंडला, 10 दिसंबर 2025

मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार एडीआर सेंटर जिला न्यायालय मंडला में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मण्डला श्रीमान् कमल जोशी के निर्देशन एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री तपन धारगा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस के अवसर पर मानव अधिकार विषय पर विधिक जागरुकता शिविर, न्यायालय परिसर में मानव अधिकारों के संरक्षण की प्रतिज्ञा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शिविर में विशेष न्यायाधीश श्री आरके रावतकर, प्रथम के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश श्री रमेश रंजन चौबे, प्रथम जिला न्यायाधीश श्री सुबोध कुमार विश्वकर्मा, द्वितीय जिला न्यायाधीश श्री तेजप्रताप सिंह, तृतीय जिला न्यायाधीश श्री हेमराज सनोडिया, जिला विधिक सहायता अधिकारी श्रीमती दीपिका ठाकुर, उपभोक्ता फोरम के सदस्य डॉ. प्रसन्न दुबे, अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन मण्डला के संरक्षक श्री नीलू महाराज एवं अन्य सदस्यगण एवं मानव अधिकार पर जिला स्तर पर कार्य रही महिलाएं, अधिवक्तागण, मां रेवती लॉ कॉलेज मण्डला के शिक्षक व विद्यार्थीगण, पैरालीगल वॉलेन्टियर्स, आमजन एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारीगणों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री कमल जोशी ने बताया कि मानव अधिकार वे मूलभूत अधिकार हैं जो कि मनुष्य होने के कारण हमें प्राप्त है चाहे व्यक्ति किसी भी देश धर्म, भाषा, जाति या रंग का हो इन अधिकारों पर उनका समान हक है इनमें जीवन, अभिव्यक्ति, शिक्षा, समानता और प्रतिष्ठा के साथ जीने के अधिकार शामिल है। मानव अधिकार दिवस की इस वर्ष की थीम ‘‘मानव अधिकार हमारे दैनिक आवश्यक अधिकार’’ के उद्देश्य को समझाते हुए बताया कि मानव अधिकार कोई दूर की बड़ी या तकनीकी अवधारणा नहीं है बल्कि वे अधिकार है जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को सुरक्षित सम्मानजनक व अर्थपूर्ण बनाते हैं। यह थीम हमें यह महसूस कराती है कि यह अधिकार हर दिन हर पल हमारे साथ जुड़े है यह थीम हमें दो महत्वपूर्ण बाते सिखाती है पहली मानव अधिकार सिर्फ न्यायालयों की बात नहीं-जीवन की बात है, हम क्या खाएं कहां काम करे कैसे बोलें, कैसे जिये, हर पहलू मानव अधिकार से जुड़ा है। दूसरा- मानव अधिकार की रक्षा सरकार ही नहीं हम सबकी जिम्मेदारी है हमारी संवेदनशीलता, हमारा व्यवहार, हमारा सम्मान, ये सभी किसी के मानव अधिकार को सुरक्षित या प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही अंतिम संदेश देते हुए कहा कि मानव अधिकार तभी सुरक्षित है जब वे हर व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी में दिखाई दे नियमों में नहीं व्यवहार में।

सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री तपन धारगा ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र संगठन ने सन 1948 में मानव अधिकार की सार्वभौमिक घोषण के माध्यम से पूरी दुनिया को एक ऐसा मानक दिया जिसने मानव गरिमा को केन्द्र में रखा। मानव अधिकार और कानून एक दूसरे के पूरक है मानव अधिकार उद्देश्य बताते हैं और कानून उन उद्देश्यों को कार्यरूप देता है यदि मानव अधिकार आत्मा है तो कानून शरीर- दोनों मिलकर एक सभ्य समाज का निर्माण करते हैं कानून सिर्फ किताबों में लिखा नियम नहीं है बल्कि मानव अधिकारों का वास्तविक रक्षक है। किसी भी इंसान की जिंदगी, आजादी और सम्मान का आधिकार मानव अधिकार है भारतीय संविधान इस अधिकार की न सिर्फ गारंटी देता है बल्कि इसे तोड़ने वाले को सजा के प्रावधान भी है। इसके साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा लॉ विद्यार्थियों को पुलिस थाना मण्डला का भ्रमण कराकर पुलिस थाने की कार्यशैली से अवगत कराया गया एवं आदर्श बालगृह मण्डला में मानव अधिकार विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया।

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