मण्डला। महिष्मति नगरी शहर की महिमा व गरिमा मां नर्मदा से हैं। किसी काल में नर्मदा जी दुप्टा संगम से सीधे नारायणगंज निकल जाती थी। भगवान वेदब्यास की कृपा से मैया ने अपना मार्ग बदलकर महिष्मति नगरी में मंडलाकार रचना करते हुये अपना आशीर्वाद प्रदान किया। मैया के उत्तरवाहिनी प्रवाह का आर्शीवाद भी तभी से प्राप्त हुआ यह उत्तरवाहिनी प्रवाह हजारों वर्षों से हैं कुछ वर्ष पूर्व जब पूज्य संतों ने शहर के लोगों को उत्तरवाहिनी प्रवाह की जानकारी दी तब से महिष्मति उत्तरवहिनी परिक्रमा शुरू हो गईअभी तक यह केवल चैत्र महीने में करते थे परंतु इस वर्ष शहर के कुछ श्रद्धालुओं ने उत्तरवाहिनी परिक्रमा मार्ग की दिव्यता को आत्मसात करने के उद्देश्य से अभी ही उत्तरवाहिनी परिक्रमा कर रहे हैं 13 दिसंबर को सुबह 7 बजे शहर के 25 धर्मप्रेमियों ने सामूहिक परिक्रमा करने श्री व्यास नारायण मंदिर किला घाट मंडला पहुंचे उत्तरवाहिनी परिक्रमा आयोजन समिति के सुधीर कांसकार ने समूह को पूरा रूट चार्ट समझाया एवं पंडित रामायण दुबे ने संकल्प पूजन करवाकर तट परिवर्तन हेतु रवाना किया यह समूह पिछले 4-5 वर्षों में पहला समूह हैं जो चैत्र माह के अलावा आया हैं इस समूह के लोगों से चर्चा करने के पश्चात लगा कि यदि यह परम्परा शुरू हुई तो वर्ष भर उत्तरवाहिनी परिक्रमा के लिये श्रृद्धालुओं का मंडला आगमन होगा।
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