मंडला, 17 दिसंबर 2025
स्काई सोशल द्वारा मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग के सहयोग से मंडला जिले में साहस-जेंडर जस्टिस लैब्स की शुरुआत की जा रही है। यह पहल समुदाय आधारित ऐसे सुरक्षित और संवेदनशील ईकोसिस्टम के निर्माण पर केंद्रित है, जहाँ उपचार, कानूनी सहायता, डिजिटल सुरक्षा और नेतृत्व विकास एक साथ जुड़ते हुए महिलाओं और समुदाय को सशक्त बनाएँगे। इस लैब का उद्देश्य मंडला जिले को लैंगिक न्याय, सुरक्षा और सर्वाइवर सहयोग के एक मॉडल जिले के रूप में विकसित करना है। इस संबंध में महत्वपूर्ण बैठक स्थानीय गोलमेज कक्ष में कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। इसमें एसपी श्री रजत सकलेचा, जिला पंचायत सीईओ श्री शाश्वत सिंह मीना सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में परियोजना के उद्देश्य में ट्रॉमा-संवेदनशील एवं कला-आधारित पद्धतियों के माध्यम से महिला सर्वाइवर्स को भावनात्मक उपचार, आत्मबल और कानूनी सहायता से जोड़ना। डिजिटल नवाचार, सहभागी सुरक्षा ऑडिट, युवा अभियानों और सार्वजनिक संवादों के माध्यम से सामुदायिक जवाबदेही और महिला सुरक्षा को मजबूत करना। स्वयं सहायता समूहों, निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों, फ्रंटलाइन वर्कर्स और जिला स्तरीय विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर जेंडर संवेदनशील दृष्टिकोण को ग्राम पंचायत विकास योजनाओं और अन्य विकास प्रक्रियाओं में एकीकृत करना आदि के संबंध में जानकारी दी गई।
साथ ही कानूनी साक्षरता एवं रेफरल में घरेलू हिंसा अधिनियम, पोक्सो, दहेज निषेध कानून और साइबर सुरक्षा पर जागरूकता सत्र तथा वन स्टॉप सेंटर, ऊर्जा डेस्क, पुलिस और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से प्रत्यक्ष रेफरल व्यवस्था पीयर चैंपियंस का निर्माण में एसएचजी महिलाओं, युवाओं और समुदाय के सक्रिय सदस्यों में से 20 पीयर चैंपियंस का चयन एवं प्रशिक्षण, ताकि परियोजना की गतिविधियाँ स्थायी रूप से आगे बढ़ सकें।
कलेक्टर श्री मिश्रा ने महिला एवं बाल विकास विभाग, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, पंचायती राज विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, पुलिस विभाग (ऊर्जा डेस्क सहित), वन स्टॉप सेंटर, स्वास्थ्य विभाग, जनजातीय विभाग, जन अभियान परिषद एवं जनसंपर्क विभाग को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि मंडला जिले में महिलाओं और किशोरियों में कानूनी अधिकारों एवं सहायता सेवाओं के प्रति जागरूकता में वृद्धि, जीबीवी सर्वाइवर्स के लिए सुलभ, संवेदनशील और प्रभावी रेफरल तंत्र का सुदृढ़ीकरण, ग्राम पंचायत स्तर पर महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाले सेफ्टी चार्टर्स का एकीकरण, युवाओं, एसएचजी महिलाओं और स्थानीय नेतृत्व के माध्यम से दीर्घकालिक सामुदायिक जवाबदेही और लैंगिक न्याय की संस्कृति का निर्माण होगा।
