मंडला, 30 दिसंबर 2025
एक वर्ष की मासूम बच्ची ऋषिका तेकाम के जीवन में उस समय उम्मीद की नई रोशनी जगी, जब गंभीर जन्मजात हृदय रोग से जूझ रही उसकी नन्ही धड़कनों को समय पर इलाज और सरकारी सहयोग का सहारा मिला। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत ऋषिका का मुंबई स्थित नारायणा हेल्थ एन.एच.एस.आर.सी.सी. चिल्ड्रन हॉस्पिटल में सफल हृदय ऑपरेशन किया गया, जिससे आज वह पूरी तरह स्वस्थ है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.जे. मोहंती ने जानकारी दी कि ऋषिका तेकाम (उम्र 1 वर्ष), निवासी ग्राम हर्राटीकुर, विकासखण्ड मोहगांव का उपचार आरबीएसके के माध्यम से निःशुल्क कराया गया।
ऋषिका का जन्म 13 नवंबर 2024 को जिला चिकित्सालय मंडला में हुआ था। जन्म के कुछ महीनों बाद ही उसे सांस लेने में तकलीफ, बार-बार सर्दी-खांसी, बुखार और वजन न बढ़ने जैसी समस्याएं होने लगीं। चिंतित परिजनों ने आरबीएसके चिकित्सक डॉ. मुकेश मर्सकोले (मोहगांव) से परामर्श लिया। प्रारंभिक जांच में दिल में छेद होने की आशंका सामने आई, जिसके बाद बच्ची को ईको जांच के लिए जबलपुर भेजा गया। जांच में पुष्टि हुई कि ऋषिका जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित है।

डॉ. मुकेश मर्सकोले ने बताया कि बच्ची के माता-पिता को समझाया गया कि ऑपरेशन अत्यंत आवश्यक है और समय पर इलाज से बच्ची पूर्णतः स्वस्थ हो सकती है। शुरुआत में परिवार भयभीत था, लेकिन आरबीएसके टीम ने उन्हें भरोसा दिया, पहले सफल ऑपरेशनों के उदाहरण बताए और मानसिक संबल प्रदान किया। परिजनों की सहमति के बाद प्रकरण तैयार कर जिला चिकित्सालय मंडला के डीईआईसी में रेफर किया गया। वहां से सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर बच्ची को मुंबई के नारायणा हेल्थ चिल्ड्रन हॉस्पिटल भेजा गया।
26 नवंबर 2025 को विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा ऋषिका का सफल हृदय ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन पूरी तरह निःशुल्क रहा। इलाज के बाद ऋषिका तेजी से स्वस्थ हुई और 9 दिसंबर 2025 को उसे अस्पताल से छुट्टी मिल गई।
भावुक होते हुए ऋषिका के पिता ने कहा,
“आज मेरी बच्ची सुरक्षित है, हंस रही है, खेल रही है। यह हमारे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं। मैं शासन-प्रशासन, कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन तथा आरबीएसके और डीईआईसी की पूरी टीम का दिल से आभार व्यक्त करता हूं। इनके सहयोग से मेरी बच्ची की जान बच सकी, आज हमारा पूरा परिवार खुश है।”
ऋषिका की यह कहानी केवल एक सफल ऑपरेशन नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं की संवेदनशीलता, स्वास्थ्य अमले की प्रतिबद्धता और समय पर लिए गए निर्णयों से मिले नए जीवन की प्रेरक मिसाल है, जो यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और सहयोग से हर नन्ही धड़कन को नई जिंदगी मिल सकती है।
