मंडला, 10 जून 2026
जिले की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में पहल करते हुए कलेक्टर श्री राहुल नामदेव धोटे ने कलंका बुर्ज, संगम घाट के समीप स्थित प्राचीन बावड़ी, किला मंदिर परिसर स्थित बावड़ी तथा डिठौरी बीहर माता कुण्ड का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को साफ-सफाई, संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के लिए आवश्यक निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री धोटे ने कहा कि ये प्राचीन बावड़ियाँ केवल जल स्त्रोत नहीं हैं, बल्कि हमारे पूर्वजों की दूरदर्शिता, वैज्ञानिक सोच और जल संरक्षण के प्रति उनकी गहरी समझ का जीवंत प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि सदियों पूर्व निर्मित ये संरचनाएं उस समय की उत्कृष्ट तकनीक और स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।

कलेक्टर श्री धोटे ने कहा कि इन बावड़ियों का उपयोग संभवतः पेयजल संग्रहण, स्नान तथा अन्य दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया जाता रहा होगा। उस दौर में जब आधुनिक संसाधन उपलब्ध नहीं थे, तब भी जल संचयन और संरक्षण के लिए विकसित की गई यह तकनीक अत्यंत प्रभावशाली और दूरदर्शी थी। आज के समय में भी ये संरचनाएं जल प्रबंधन के क्षेत्र में प्रेरणास्त्रोत हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी का दायित्व है कि वह ऐसी ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखे और उनके महत्व को समझे। प्राचीन बावड़ियाँ हमारी सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ जल संरक्षण की समृद्ध परंपरा की भी प्रतीक हैं। इनका संरक्षण न केवल इतिहास को सहेजने का कार्य है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने का भी माध्यम है।

कलेक्टर श्री धोटे ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन स्थलों की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए तथा इनके संरक्षण और विकास के लिए आवश्यक कार्ययोजना तैयार की जाए, जिससे इन ऐतिहासिक धरोहरों की गरिमा और पहचान बनी रहे।

