मंडला, 20 जुलाई 2026
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.जे. मोहन्ती ने बरसात के मौसम में सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए आमजन के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु में सांप अधिक सक्रिय हो जाते हैं, जिससे सर्पदंश के मामलों में वृद्धि होती है। ऐसी स्थिति में घबराने या अंधविश्वास का सहारा लेने के बजाय पीड़ित को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाना ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।
सीएमएचओ ने बताया कि जहरीले सांप के काटने पर सामान्यतः दांतों के दो गहरे निशान दिखाई देते हैं, जबकि गैर विषैले सांप के काटने पर दो से अधिक निशान हो सकते हैं। हालांकि केवल दांतों के निशान देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि सांप विषैला था या नहीं, इसलिए हर सर्पदंश को गंभीरता से लेना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि सर्पदंश के बाद नींद आना, निगलने में कठिनाई, सांस लेने में परेशानी तथा अन्य लक्षण लगभग आधे घंटे के भीतर दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचना चाहिए।
डॉ. मोहन्ती ने स्पष्ट किया कि सर्पदंश की स्थिति में रस्सी या कपड़े से कसकर अंग नहीं बांधें, घाव पर ब्लेड से चीरा न लगाएं, मुंह से विष निकालने का प्रयास न करें तथा झाड़-फूंक, ओझा-गुनिया या अन्य पारंपरिक उपचारों पर भरोसा न करें। उन्होंने अंधविश्वास से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि इससे उपचार में देरी होती है और मरीज की जान को खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने सलाह दी कि पीड़ित को शांत रखें, काटे गए अंग को यथासंभव स्थिर रखें, घाव वाले स्थान को हल्के गीले कपड़े से साफ करें तथा उल्टी की आशंका होने पर मरीज को करवट लिटाएं। इसके बाद तत्काल निकटतम स्वास्थ्य संस्थान ले जाएं। सीएमएचओ ने बताया कि जिला अस्पताल एवं अन्य शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) इंजेक्शन निःशुल्क उपलब्ध है। चिकित्सकों की देखरेख में समय पर उपचार मिलने से अधिकांश सर्पदंश पीड़ितों का सफल इलाज संभव है।
