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रेवा इंडिया न्यूज़ मुख्य समाचार मण्डला 16 मार्च 2023

25 मार्च तक शतप्रतिशत करें समग्र आइडी का ई-केवाईसी कार्य

लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत हुई जनपद एवं निकायों की समीक्षा

मण्डला 16 मार्च 2023

कलेक्टर हर्षिका सिंह ने मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत ज़िले में चल रहे समग्र आईडी के ई-केवाईसी कार्य की जनपदवार एवं निकायवार समीक्षा की। उन्होंने सभी सीईओ जनपद एवं सीएमओ नगरपालिका से उनके क्षेत्र में समग्र आइडी के ई-केवाईसी के लक्ष्य एवं उसके विरूद्ध पूर्ति के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों में सघन रूप से समग्र आइडी के ई-केवाईसी का कार्य 25 मार्च तक अनिवार्यतः पूरा करें। उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में बैंकों के माध्यम से होने वाले ई-केवाईसी, आधार लिंक एवं डीबीटी के कार्य लगातार जारी रहेगा। महिलाएं सबसे पहले अपने नजदीकि लोकसेवा केन्द्र, कॉमन सर्विस सेंटर या समग्र आईडी के पोर्टल से ई-केवाईसी के कार्य को पूरा करें तथा फिलहाल बैंकों में जाकर आधार लिंक एवं डीबीटी के लिए अनावश्यक परेशान न हों। बैठक में सभी एसडीएम, सीईओ जनपद, सीएमओ नगरपालिका एवं संबंधित उपस्थित थे।

श्रीमती सिंह ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सर्वप्रथम समग्र आइडी के ई-केवाईसी का कार्य पूर्ण किया जाना आवश्यक है। उन्होंने सभी एसडीएम को निर्देशित किया कि अपने क्षेत्रों में योजना के बारे में मुनादी आदि के माध्यम से जानकारी दें। साथ ही समग्र आइडी के ई-केवाईसी की प्रक्रिया तथा ई-केवाईसी के लिए निर्धारित केंद्रों की जानकारी भी मुनादी के माध्यम से दें। उन्होंने कहा कि समग्र आइडी के ई-केवाईसी से छूटे आंकड़ों को निकालें तथा ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए कार्यवाही करें। उन्होंने अब तक किए गए ई-केवाईसी की सभी जनपदों एवं निकायों से आंकड़ेवार जानकारी लेते हुए समीक्षा की। श्रीमती सिंह ने ई-केवाईसी के कार्य में एनआरएलएम के ब्लॉक स्तरीय अमले का भी सक्रिय रूप से सहयोग लेने के निर्देश दिए। उन्हांेने सभी एसडीएम को निर्देशित किया कि अपने क्षेत्र के एनआरएलएम सीआरपी की बैठक लें तथा उन्हें ई-केवाईसी के कार्य में सहयोग के लिए निर्देश दें। बैठक में कलेक्टर ने निर्देशित किया कि सभी जनपदों एवं निकायों में योजना के फ़ॉर्म का वितरण सुनिश्चित किया जाए तथा उन्होंने फ़ार्म भरने की प्रक्रिया के बारे में भी सीईओ जनपद एवं सीएमओ नगरपालिका से जानकारी ली।

 

 

 

 

 

 

 

‘‘संकुल प्रदर्शन एवं आदिवासी उप-परियोजना अंतर्गत कृषक संगोष्ठी एवं कृषि आदान सामग्री का वितरण‘‘

मण्डला 16 मार्च 2023

कृषि विज्ञान केन्द्र मण्डला के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. के.व्ही. सहारे के मार्गदर्शन में केन्द्र डॉ. आर.पी. अहिरवार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन एवं आदिवासी उपपरियोजना अंतर्गत जायद में दलहन का रकबा बढ़ाने के उद्देश्य से मूंग की एम.एच. 421 किस्म का बीज एवं जैव उर्वरकों जैसे राइजोबियम, पी.एस.बी. एवं जैव कारक ट्राईकोडर्मा एवं स्यूडोमोनास का वितरण ग्राम खम्हरिया एवं बीजेगांव तहसील नारायणगंज जिला मण्डला में आयोजित कृषक संगोष्ठी में किया गया। कृषक संगोष्ठी में केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. आर.पी. अहिरवार ने बताया कि मूंग की एम.एच. 421 किस्म हरियाणा विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2014 में अधिसूचित कर दिया गया था। यह किस्म बीज रोग प्रतिरोधक सहनशील और उत्पादन देने की दृष्टि से काफी अच्छी किस्म मानी जाती है, पीला मोजेक रोग मुक्त किस्म है इसका उत्पादन 8-10 क्विंटल प्रति एकड़ लिया जा सकता है। यह किस्म 60-65 दिन में पककर तैयार हो जाती है बड़ी बात यह है कि गर्मियों में तैयार होने वाली इस किस्म की फल्लियाँ फटने व तिड़कने की समस्या भी कम पाई गई है। बीज बुवाई से पूर्व बीज उपचार अवश्य करें। इस हेतु राइजोबियम कल्चर की 10 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें। राइजोबियम से बीज उपचार करने से वायुमंडल में उपलब्ध नत्रजन पौधों को उपलब्ध कराती है। इसी तरह से पी.एस.बी. कल्चर की 10 ग्राम प्रति कि.ग्राम बीज की दर से उपचार करें। यह मृदा में उपलब्ध फास्फोरस पौधों को उपलब्ध करता है। साथ ही फसल सुरक्षा हेतु जैवकारक ट्राईकोडर्मा एवं स्यूडोमोनास की 10-10 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें ताकि फसल को कवक एवं जीवाणु जनित रोगों से बचाई जा सके। प्रशिक्षण के दौरान करके देखो, देखकर सीखों के सिद्धांत पर कृषकों को बीज उपचार करके दिखाया गया। साथ ही कृषकों को प्राकृतिक खेती पर विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए बीजामृत, जीवामृत, अच्छादन, व्हापसा तथा फसल सुरक्षा हेतु नीमास्त्र, अग्निअस्त्र, एवं दसपर्णी अर्क दवा घर पर कैसे तैयार कर सकते हैं और इसके क्या फायदे हैं इस पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। केन्द्र के पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. प्रणय भारती एवं कार्यक्रम सहायक केतकी धूमकेती ने अपने-अपने विषय पर कृषकों को जानकारी दी।

 

 

 

 

 

 

 

 

सी.एम. राईज विद्यालय अंजनियां में लॉटरी के माध्यम से हुई प्रवेश प्रक्रिया

मण्डला 16 मार्च 2023

सी.एम. राईज विद्यालय अंजनियां में शिक्षा सत्र 2023-24 में के.जी.-1 एवं पहली से नवमीं तक कुल 236 रिक्त सीटों के विरुद्ध आमंत्रित आवेदनों का परीक्षण उपरांत शेष कुल 524 आवेदनों का विद्यालय स्तर में लॉटरी के माध्यम से प्रवेश सुनिश्चित करने हेतु प्रक्रिया संपन्न कराई गई। लॉटरी की जानकारी विद्यालय के शिक्षकों द्वारा फोन के माध्यम से पालकों को दी गई। इस अवसर पर नायब तहसीलदार अंजनियां साक्षी शुक्ला, क्षेत्रीय जनपद सदस्य परमानंद चौधरी, सी.एम राईज प्राचार्य हेमंत कुमार राणा, प्राचार्य अजय पटेल, शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के सदस्य एवं पालक उपस्थित रहे। कक्षावार नाम की पर्चियां बनाकर उपस्थित छोटे बच्चों से निकलवाकर चयन सूची एवं प्रतीक्षा सूची तैयार की गई। प्रवेश सुनिश्चित करने हेतु पालकों को आवश्यक दस्तावेज 20 मार्च 2023 दिन सोमवार तक जमा करने एवं निर्धारित तिथि तक आवश्यक दस्तावेज जमा न करने पर क्रमशः प्रतीक्षा सूची से नाम चयन करने की जानकारी दी गई।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

खसरे का टीका जरूर लगवाएँ, यह कोई प्रकोप नहीं

मण्डला 16 मार्च 2023

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार खसरा पर जागरूकता के उद्देश्य से 16 मार्च को राष्ट्रीय खसरा टीकाकरण दिवस मनाया जाएगा। खसरा एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जो ज्यादातर बच्चों को प्रभावित करती है लेकिन कुछ लोग इस रोग को देवी का प्रकोप समझकर उपचार नहीं लेते हैं जबकि यह एक वैक्सीन से रोके जाने वाली 12 बीमारियों से सबसे अधिक वायरस जनित बीमारी है। समस्त जिलेवासियों से अपील की गई है कि 9 से 12 माह की उम्र के बच्चों में मीजल्स रूबेला से बचाव के लिए पहला टीका लगवाएं एवं 16 से 24 माह में दूसरा टीका लगवाएं।

जिला टीकाकरण अधिकारी ने बताया है कि केन्द्र सरकार ने दिसम्बर 2023 तक खसरा मुक्त भारत बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है इसलिए खसरे की बीमारी को खत्म करने के लिए 95 प्रतिशत टीकाकरण आवश्यक है।

 

खसरा कैसे फैलता है

 

खसरा एक वायरस के कारण होता है जो एक संक्रमित बच्चे या वयस्क के नाक और गले में उत्पन्न होता है, इसमें अत्यधिक संक्रामक होने की संभावना होती है। इसका मतलब यह है कि संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने, बात करने से वायरस पर्यावरण में हवा के द्वारा फैल जाता है।

 

2019 में आया था एम.आर. का टीका

 

खसरे की बीमारी के रोकथाम के लिए भारत में सबसे पहले 19 नबम्बर 1985 में खसरा का टीका लगाया गया। उक्त टीके को 15 जनवरी 2019 में संशोधित करते हुए एमआर का टीकाकरण अभियान में शामिल किया गया। एमआर टीके से खसरे के अलावा रूबेला से बचाव किया जा सकता है।

 

यह है खसरे का लक्षण

 

यह एक फ्लू का स्ट्रेन है इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते है, जिसमें तेज बुखार, थकान, गंभीर खांसी, लाल या खून वाली आंखें और नाक बहना शामिल है। खसरा से शरीर पर लाल चकत्ते होते हैं।

 

मार्च, अप्रैल, सितम्बर व अक्टूबर में फैलने की होती है सम्भावना

 

मार्च, अप्रैल, सितम्बर व अक्टूबर के समय मौसम में परिर्वतन होता है जिस कारण संक्रमित बीमारियां भी इसी समय फैलती है। लोग खसरे की बीमारी को माता का प्रकोप समझकर उपचार नहीं कराते हैं। इस बीमारी का बचाव एकमात्र टीका है। इस बीमारी से बचने के लिए एमआर का टीका बच्चों को जरूर लगवायें। जाकरूकता अभियान के माध्यम से जिला स्तर से मैदानी स्तर तक मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ता के द्वारा दीवार लेखन, ग्रुप बैठक, रैली एवं कोटवारों के माध्यम से गांव-गांव मुनादी भी कराई जा रही है।

 

 

 

 

 

 

 

 

म.प्र. विशेष सहयोगी दस्ता भर्ती की अंतिम सूची जारी

 

मण्डला 16 मार्च 2023

पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार म.प्र. विशेष सहयोगी दस्ता भर्ती वर्ष 2022 के अंतर्गत जिला मंडला की अंतिम चयन सूची जारी कर दी गई है। जारी सूची के अंतर्गत अतुल राजपूत पिता पंचम सिंह, अनुराग सिंह गौर पिता संजय सिंह गौर, वाजिद खान पिता गुलशेर खान, ओमकार चक्रवर्ती पिता मिस्टरलाल चक्रवर्ती, देवेन्द्र मरकाम पिता गौतम मरकाम, चन्द्रभान ठाकुर पिता कृष्ण कुमार ठाकुर, आकांक्षा दुबे पिता श्रीनारायण दुबे, संगीता यादव पिता मनोहर यादव, निकिता राजपूत पिता निजाम सिंह राजपूत, राजेन्द्र बैरागी पिता चतुर दास, निखिल श्रीवास पिता रामकिशोर श्रीवास, ओमकार साहू पिता राजूलाल साहू, अतुल बंजारा पिता चन्द्रशेखर, प्रेमलाल यादव पिता छतरूलाल, पूजा पड़वार पिता तुलसीदास पड़वार, खुशबू कछवाहा पिता रामकुमार कछवाहा, अंजली पटेल पिता जितेन्द्र कुमार पटेल, संदीप पट्टा पिता विश्वनाथ पट्टा, रामसिंह मरावी पिता अंतराम मरावी, अतुल कुमार मरावी पिता नैनसिंह मरावी, राधेश्याम मरावी पिता धरम सिंह मरावी, वंशिका सोनवानी पिता शत्रुधन सोनवानी, प्रीति पुसाम पिता महेश पुसाम, विवेक कुमार झारिया पिता राधेलाल झारिया, आयुष झारिया पिता गीनाराम झारिया, अभिलाष झारिया पिता अरविंद झारिया, साक्षी कार्तिकेय पिता जितेन्द्र नागवंशी, रोशन तिवारी पिता राजेश तिवारी, अमित दुबे पिता नीलकंठ दुबे तथा अंजना ज्योतिषी पिता अवधेश ज्योतिषी का चयन किया गया है। इसी प्रकार प्रतीक्षा सूची में अगेश कुमार राजपूत पिता दौलत सिंह राजपूत, शर्मिला राजपूत पिता अशोक सिंह राजपूत, शुभांशु पटेल पिता सुमंत पटेल, सारिका पटेल पिता ज्वाला प्रसार पटेल, हेमंत कुमार पिता लक्ष्मण सिंह मुराली, अकांक्षा सैयाम पिता राजेन्द्र सैयाम, विशाल कुमार झारिया पिता पन्जूलाल झारिया, वैशाली राजुरकर पिता हरिश्चंद्र राजुरकर, शरद दुबे पिता ओमप्रकाश दुबे तथा नेहा मिश्रा पिता उमेश मिश्रा शामिल है।

 

 

 

 

 

 

आर्थिक सहायता स्वीकृत

मंडला 16 मार्च 2023

प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक पुसिया बाई, ग्राम घाघा निवासी की पानी में डूबने से मृत्यु होने के कारण अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मंडला द्वारा मृतक के निकटतम वारसान को कुल 4 लाख रूपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। मृतक के निकटतम वारसान आवेदक प्रेमवती बाई को कुल 4 लाख रूपए की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। यह राशि संबंधित के बैंक खाते में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

 

 

 

 

 

मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना

विशेष पिछड़ी जनजाति को दुधारू पशु प्रदाय कार्यक्रम

मण्डला 16 मार्च 2023

उपसंचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना अंतर्गत जिले के विशेष पिछड़े जनजाति (बैगा) हितग्राहियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने एवं कुपोषण से मुक्ति पाने हेतु जिले के 116 बैगा परिवारों को दो-दो दूधारू पशु (गाय/भैंस बछड़े सहित) उपलब्ध किया जाएगा।

 

योजना का उद्देश्य

 

दुग्ध उत्पादन में वृद्धि, हितग्राहियों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना, पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि, रोजगार के अवसर प्रदाय करना तथा कुपोषण दूर करना, उच्च उत्पादक क्षमता के दुधारू पशुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

 

कार्यक्रम विवरण

 

दुधारू पशुओं में वर्णित दुधारू देशी नस्ल की 2-2 गाय, भैंस जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति (बैगा) हितग्राहियों को प्रदाय किया जाएगा। योजना 90 प्रतिशत अनुदान एवं 10 प्रतिशत हितग्राही अंशदान पर संचालित हैं। क्रय किये गये समस्त पशुओं का बीमा कराया जाएगा। एम.पी.सी.डी.एफ के मिल्क रूट पर प्राथमिकता के आधार पर हितग्राहियों का चयन किया जाएगा। पशुपालकों को डेयरी से संबंधित प्रशिक्षण पशु प्रदाय के पूर्व दिया जायेगा।

 

योजना की इकाई लागत

 

दुधारू गाय पालन- इकाई की कुल लागत 189250, 90 प्रतिशत अनुदान 170325, 10 प्रतिशत हितग्राही अंशदान 18925, दुधारू भैंस पालन- इकाई की कुल लागत 243000, 90 प्रतिशत अनुदान 218700, 10 प्रतिशत हितग्राही अंशदान 24300 जिले के बैगा हितग्राही मिल्क रूट के आधार पर निकटतम पशु चिकित्सा संस्था में जाकर आवेदन एवं अंशदान राशि जमा कर इस योजना का अधिक से अधिक लाभ ले सकते हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

देवगांव के संगम स्थल पर मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष

बताई गई मोटे अनाज की खूबियां

मंडला – भारत सरकार के अथक प्रयास के बाद मिलेट्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिली है जिसके तहत इस वर्ष को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष घोषित किया गया है । इसी तारतम्य में मोहगांव विकासखंड के देवगांव में मध्यप्रदेश में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एवं प्रदान संस्था के संयुक्त तत्वाधान में देवगांव ग्राम के संगम स्थल पर अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष मनाया गया। इसमें बड़ी संख्या में समूह की दीदियों ने भाग लिया इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने मिलेट्स मोटे अनाज के उपयोग खेती के गुण बताएं कोदो कुटकी को विश्व स्तर पर नई पहचान के बाद इस फसल का मूल्य काफी बढ़ गया है।

मोहगांव विकासखंड ‘के ग्राम देवगांव के संगम स्थल पर मिलेट्स वर्ष 2013 के कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मेहंदवानी की विनीता नामदेव ने बताया कि कोदो – कुटकी की खेती से उनके जीवन पर काफी बदलाव आया है। इनसे नमकीन, बिस्किट, चकोली, पापड़, पुलाव, बीर इडली, डोसा जैसे व्यंजन काफी स्वादिष्ट बनते है जो स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभदायक होते है। इनका स्वयं सहायता समूह, तेजस्वती नारी चेतना में 30-35 महिला काम कर रही है।

सौरभ उपाध्याय कोदो, कुटकी, रागी के उपयोग के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आज की स्थिति में ये खत्म की कगार पर है। पहले इसी अनाज का उपयोग किया जाता था। इसे रसोई से बाहर कर दिया गया। आज इसके संरक्षण की बात की जा रही है। मोटा अनाज कहकर जिसे रसोई से बाहर कर दिया गया था वो आज वैज्ञानिक इसके इस्तेमाल के लाभ व औषधीय रूप के गुण बता रहे है और उत्पादन बढ़ाने की बात हो रही है। आज के दौर में बहुत कम लोग ही कोदो, कुटकी, रागी को जानते है इसलिए इसके उत्पादन को बढ़ावा देने की बात हो रही हो। महिलाएं कुपोषण का शिकार है इसलिए एनआरएलएम के माध्यम से महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है ताकि वह खुद के स्वास्थ्य की चिंता करे और कोदो – कुटकी के उत्पाद का इस्तेमाल करें। इससे स्वास्थ्य के साथ – साथ आय में भी वृद्धि होगी क्योंकि कोदो – कुटकी का बाजार मूल्य अधिक है।

डीपीएम बी. डी. भैसारे ने कहा कि मोटा अनाज कोदो कुटकी पर काम करेंगे तो स्वास्थ्य के साथ ही आमदानी पर भी असर पड़ेगा। मिलेट्स वर्ष मनाने का उद्देश्य यही है कि हम कोदो – कुटकी जो परंपरागत फसल है उसका उत्पादन करना है जो विषरहित फसल है। पूरी दुनिया में लोग आज इसका उपयोग कर रहे है।

बुढनेर संघ की दीदीयों द्वारा एक नुक्कड नाटक का मंचन किया गया। इसके माध्यम से कोदो कुटकी की फसल के बारे में ग्रामीण परिवेश दर्शाते हुए इसके महत्व को बताया गया और कि मोटे अनाज को लेकर नई पीढ़ी को जागरूक करने का आवाहन किया गया। बीएम मुकेश नंदा ने उपस्थित लोगों से कहा कि वो कार्यक्रम से यह संकलप लेकर अपने घर जाए कि वो मोटे अनाज का उत्पादन करेंगे।

इस कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य शिव पुसाम, वित्तीय साक्षरता सलाहकार
कृष्ण कुमार अवस्थी, आरसेटी डायरेक्टर, प्रणीता पचौरी (कृषि विभाग), राजकुमार यादव, नीरज द्विवेदी, निशांत तिवारी कमलेश पाल, भुवनेश डेहरिया, बीसीएफ़एल, श्रीकांत, प्रदान संस्था के समस्त कर्मचारी और सभी समूह की दीदीयां बड़ी संख्या में उपस्थित थी।

कल प्रारंभ होगी उत्तरवाहिनी परिक्रमा

शनिवार को सुबह 06 बजे व्यास नारायण मंदिर किले वार्ड में होगी संकल्प पूजा
शनिवार की रात घाघी नर्मदा तट होगा रात्रि विश्राम
मण्डला। कल गुरूवार को जनपद पंचायत सभाकक्ष में नर्मदा भक्तो, समाजसेवियों ने एक पत्रकारवार्ता का आयोजन किया जिसमें परिक्रमा यात्रा की तैयारी को लेकर व्यापक चर्चा की गई पत्रकारों को पूरे यात्रा मार्ग से परिचित कराया गया यात्रा व्यास नारायण मंदिर में 18 मार्च की सुबह 6:00 बजे संकल्प पूजा के साथ प्रारंभ होगी यहां से यात्रा पुरवा नाव के द्वारा पहुंचेगी और पुरवा में कृष्ण मंदिर के दर्शन एवं सरस्वती प्रस्त्रवण तीर्थ (विष्णुपुरी) उपरांत बंजर कच्चे पुल को पार करते हुये महाराजपुर संगम यात्रा आयेगी जहां रेवा प्रसादी प्रकल्प के द्वारा बाल भोग का वितरण होगा एवं यात्रा की अगुवाई कर रहे संतों द्वारा यात्रा को लेकर संदेश दिया जायेगा तत्पश्चपात परिक्रमा यात्रा यहां से ज्वालाजी मंदिर होते हुये मंगलेश्वर मंदिर पहुंचेगी फिर कारीकोन तिराहा होते हुये मानादेई, सुरंगदेवरी, सिलपुरा पहुंचेगी जहां दोपहर के भोजन की व्यवस्था की गई है भोजन उपरांत थोड़े विश्राम के बाद यात्रा घाघा-घाघ्ाी तक जायेगी जहां 18 मार्च दिन शनिवार को रात्रि विश्राम नर्मदा तट पर ही होगा। घाघी में रात्रि विश्राम के दौरान भजन संध्या का आयोजन भी किया गया है।
19 मार्च की सुबह तट पार कर बबैहा गरम पानी कुण्ड यात्रा पहुंचेगी जहां से ग्वारी, फूलसागर, तिंदनी यात्रा आयेगी और फिर यहां से गाजीपुर होते हुये कटरा पहुंचेगी जहां राजपूत मैरिज गार्डन में दोपहर का भोजन निर्धारित किया गया इसके बाद परिक्रमा यात्रा रानी पार्क होते हुये गाैंझी ग्राम होते हुये देवदरा पहुंचेगी जहां से नेहरूस्मारक होते हुये न्याय घाट, जेलघाट, नाव घाट होते हुये व्यास नारायण मंदिर पहुंचकर यात्रा संपन्न होगी जहां यात्रा के समापन पर प्रसादी का वितरण किया जायेगा।
यात्रा को लेकर की गई व्यापक तैयारियाँ
उत्तरवाहिनी नर्मदा परिक्रमा का यह दूसरा वर्ष है जबकि इस तरह की उत्तरवाहिनी परिक्रमा गुजरात के तिलकवाड़ा में वर्षो से आयोजित की जा रही है और तिलकवाड़ा के विकास में इस यात्रा का बहुत बड़ा योगदान है मण्डला नगर जिस पर माँ नर्मदा का विशेष आर्शीवाद है लेकिन हम नर्मदावासी इस आर्शीवाद से अभी तक अनभिज्ञ थे  अब प्रयास प्रारंभ हुये हैं तो आने वाले समय में निश्चित रूप से यह उत्तरवाहिनी नर्मदा परिक्रमा मण्डला नगर का एक बड़ा आयोजन साबित होने वाली है जिसके संकेत अभी से ही प्राप्त होने लगे हैं।
सोशल मीडिया के माध्यम से जिस तरह अन्य प्रदेशों के लोगों ने इस यात्रा में शामिल होने अपनी सहमति दर्शायी है उससे यह साबित होता है कि इस यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल होने जा रहे हैं। आयोजन बड़ा है लिहाजा तैयारियाँ भी बड़े पैमाने पर होनी आवश्यक है जिसको लेकर कल नगरपालिका प्रशासन विस्तृत चर्चा की गई और एक-एक बिन्दु पर लेगों की जबावदारियाँ तय की गई हैं। जनपद अध्यक्ष के द्वारा परिक्रमा पथ पर पड़ने वाली पंचायतों में जाकर बैठकें की गई और उन्हें भी इस कार्यक्रम में सहभागी बनाया गया। पूरे परिक्रमा मार्ग में स्वच्छता पर विशेष ध्यान रखते हुये प्लास्टिक के उत्पादों को वर्जित रखा गया है। परिक्रमा पैदल की जानी है लेकिन जो श्रद्धालु पैदल नहीं चल सकते वे वाहन के माध्यम से भी परिक्रमा में शामिल हो सकते हैं रात्रि विश्राम भी श्रद्धालुओं के लिये अनिवार्य नहीं है जो शनिवार की शाम वापिस अपने घर या जहां रूके हैं वहां आना चाहे तो आ सकते हैं और फिर रविवार 19 मार्च की सुबह पुन: परिक्रमा में शामिल हो सकते हैं।
परिक्रमा पूर्णत: नि:शुल्क है श्रद्धालुजन अपनी आवश्यकता का समान लेकर चल सकते हैं जिनमें छतरी, दवाईयाँ, उपयोग के कपड़े आदि शामिल हैं परिक्रमा में शामिल होने वाले परिक्रमावासियों के लिये बाल भोग एवं भोजन की सुविधा भी नि:शुल्क है यह आयोजन हम सबका है लिहाजा इसमें हम सभी को सहयोग करते हुये इसे सफल बनाना है।

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