मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा चलाए जा रहे जल संचय अभियान के तहत विकासखंड मंडला के लिंगापौड़ी सेक्टर के ग्राम पंचायत आमानाला में सामुदायिक श्रमदान से जल संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया गया। बटालियन आमानाला के नाला पर 170 बोरी का बंधान स्थानीय लोगों, नवांकुर संस्था प्रवाहिनी समिति, ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति और सीएमसीएलडीपी के छात्रों की संयुक्त पहल से तैयार किया गया।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने जल संरक्षण को लेकर शपथ भी ली। जिला समन्वयक श्री राजेंद्र चौधरी ने उपस्थित लोगों को बोरी बंधान के महत्व और इसके दीर्घकालिक लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस बंधान से आसपास के इलाके में भूजल स्तर बढ़ेगा, रबी फसलों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहेगा और जंगलों में रहने वाले पशु-पक्षियों के लिए भी यह पानी जीवनदायी सिद्ध होगा। उन्होंने बताया कि बोरी बंधान जल संरक्षण की एक सरल, सस्ती और प्रभावी सामुदायिक तकनीक है, जिसमें मिट्टी भरी बोरियों से नालों और जल स्त्रोतों पर छोटे अवरोध बनाए जाते हैं, जिससे बारिश का पानी रुकता है, मिट्टी का कटाव कम होता है और गांव की जल उपलब्धता में वृद्धि होती है।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने जल संरक्षण को लेकर शपथ भी ली। जिला समन्वयक श्री राजेंद्र चौधरी ने उपस्थित लोगों को बोरी बंधान के महत्व और इसके दीर्घकालिक लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस बंधान से आसपास के इलाके में भूजल स्तर बढ़ेगा, रबी फसलों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहेगा और जंगलों में रहने वाले पशु-पक्षियों के लिए भी यह पानी जीवनदायी सिद्ध होगा। उन्होंने बताया कि बोरी बंधान जल संरक्षण की एक सरल, सस्ती और प्रभावी सामुदायिक तकनीक है, जिसमें मिट्टी भरी बोरियों से नालों और जल स्त्रोतों पर छोटे अवरोध बनाए जाते हैं, जिससे बारिश का पानी रुकता है, मिट्टी का कटाव कम होता है और गांव की जल उपलब्धता में वृद्धि होती है।
कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण के नारों के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया गया तथा सामूहिक सहयोग से स्वल्पाहार भी आयोजित किया गया, जिससे कार्यक्रम का उत्साह और अधिक बढ़ गया। इस महत्वपूर्ण पहल में ग्राम की मोबेलाईजर सुलेखा मरावी, दसिया बरकडे एवं सीएमसीएलडीपी के छात्रों का सराहनीय सहयोग रहा। इसी कड़ी में विकासखण्ड समन्वयक श्री संतोष कुमार झारिया ने कहा कि एकजुटता से बना यह बोरी बंधान न केवल जल संकट से निपटने में मदद करेगा, बल्कि आने वाली फसलों, पर्यावरण और स्थानीय जीवन को भी संजीवनी प्रदान करेगा। इस पुनीत कार्य में परामर्शदाता श्रीमती रागिनी हरदहा, श्री संतोष रजकजी, श्री आशीष नामदेव, छात्र और छात्राएं, श्री यश तिवारी , श्रीमती दासिया वरकडे, श्री मयूर कछवाहा, श्री राजेंद्र सिंगोर, श्री संतोष कछवाहा, श्री विकास पावले, श्रीमती गंगा वरकड़े, श्रीमती मिथिलेश्वरी, श्रीमती इंदिरा परते, श्रीमती पल्लवी श्रीवास, श्रीमती पूजा चौरसिया, श्रीमती चंद्रलता कछवाहा, श्रीमती सुरेखा वरकडे, श्रीमती प्रियंका मिश्रा, श्रीमती अनुराधा कछवाहा, श्री कृष्ण कुमार, श्रीमती प्रतिभा यादव, श्रीमती विनोरमा, श्रीमती प्रिया धुर्वे, श्री रेदास, श्रीमती मीनाक्षी यादव, श्री नरेश बैरागी, श्रीमती निशा बैरागी, श्रीमती वंदना रघुवंशी, श्रीमती यशोमती बैरागी, श्रीमती अनुप्रिया मरावी और श्रीमती निर्जला उइके, इसके अलावा प्रवाहिनी समिति से श्रीमती पुष्पा ज्योतिषी और श्रीमती अनीता तिवारी की उपस्थिति रही।
