मंडला – हजरत बाबा बरहना शाह रहमतुल्लाह अलैय “किले वाले बाबा” का उर्स हर साल की तरह इस साल भी परंपरागत हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। उर्स की शुरुआत 20 मई को कुरआन खानी व मिलाद शरीफ से हुई। 21 मई को किले वाले बाबा का शाही संदल हजरत बाबा बंगाली शाह रहमतुल्लाह अलैय की दरगाह से मशहूर राजकुमार बैंड, सफेद घोड़ों का नूत्य, मलंग कला एवं आतिशबाजी के साथ शहर गश्त करता हुआ किले वाले बाबा की दरगाह में पेश किया जाना प्रस्तावित था लेकिन प्रशासनिक अनुमति नहीं मिलने की वजह से उर्स कमेटी द्वारा शाही संदल नहीं निकालने का निर्णय लेते हुए उसे रद्द कर दिया गया। इसकी जगह किले वाले बाबा की दरगाह से चंद कदम दूर से ही सांकेतिक रूप से संदल निकाल कर औपचारिकता पूर्ण की गई। संदल किले वाले बाबा की दरगाह में पेश किया गया। इस दौरान बाबा के चाहने वालों ने चादर पेश की। चादर पेश करने के बाद फातिहा हुई व मुल्क की तरक्की, अमन – शांति व साम्प्रदायिक सौहार्द कायम रहने की दुआ की गई। इस दौरान लंगर ए आम का एहतमाम भी किया गया। 21 मई को भी दरगाह परिसर में लंगर ए आम का एहतमाम किया गया, जिसमे बड़ी तादाद में लोगों ने शिरकत की। दरगाह में चादर पेश करने का सिलसिला चलता रहा। बाबा सैयद राहित अली, सिब्बल बाबा, जानू बाबा, शेबू बाबा, लड्डू बाबा, पप्पू सोनी, फारूक बाबा सहित कई मुजबीरों को हाजिरी हुई। बाबा से मिलने फरियादियों का तांता लगा रहा। जबलपुर की मशहूर ताहिर शहनाई इस दौरान नातिया कलाम व क़व्वाली पेश करती रही। 23 मई की सुबह कुल की फातिहा से उर्स का समापन हुआ। उर्स को सफल बनाने में श्रीनाथ अग्रवाल, शशिकांत डोंगसरे, सैयद राहित अली, सिब्बल खान, मुन्नू गुप्ता, एडवोकेट अशोक वर्मा, नईम खान, अंकित मोनू अग्रवाल, रिंकू अग्रवाल, बबलू गुप्ता, संदीप मोदी, गोपाल बर्वे, महताब खान सहित सभी वर्ग के लोगों का उल्लेखनीय योगदान रहा।
