मंडला – जमाअत-ए-इस्लामी हिंद, मंडला की महिला विंग एवं गर्ल्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन (GIO) की जानिब से फल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम रबीउल अव्वल के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसे पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत और उनके बताए हुए इंसानियत, खैरख़्वाही एवं समाज सुधार के पैगाम को आम करने के उद्देश्य से मनाया जाता है।

इस अवसर पर जिला सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों एवं उनके साथ मौजूद जरूरतमंदों को फल, बिस्किट आदि वितरित किए गए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बीमार और जरूरतमंद लोगों की खिदमत करना तथा समाज में इंसानियत, आपसी सहयोग और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना था।

पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत से हमें यह तालीम मिलती है कि जरूरतमंदों की मदद करना, बीमारों की अयादत करना और लोगों की भलाई के कार्यों में आगे बढ़कर हिस्सा लेना एक महत्वपूर्ण नेक अमल है। इसी तालीम को सामने रखते हुए इस कार्यक्रम के माध्यम से यह पैगाम देने का प्रयास किया गया कि खिदमत का दायरा धर्म, जाति और समुदाय की सीमाओं से ऊपर है। समाज में रहने वाला हर इंसान सम्मान और सहयोग का हकदार है तथा मानवता की सेवा करना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य समाज में मौजूद विभिन्न धर्मों, समुदायों एवं जातियों के बीच आपसी दूरियों को कम करना और इंसानियत के रिश्ते को मजबूत करना भी रहा। समाज में प्रेम, सौहार्द, एकता और परस्पर सहयोग की भावना को बढ़ावा देने के लिए ऐसे प्रयास निरंतर किए जाने चाहिए।
इसके साथ ही इस कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं की सामाजिक भूमिका और जिम्मेदारी को भी सामने लाने का प्रयास किया गया। समाज की तरक्की और सुधार में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। महिलाएँ केवल परिवार के निर्माण में ही नहीं, बल्कि समाज की खिदमत, जरूरतमंदों की सहायता, सामाजिक सुधार और आपसी एकता को मजबूत करने में भी प्रभावी योगदान दे सकती हैं। इसी भावना के साथ सभी महिलाओं को समाज की बेहतरी और इंसानियत की खिदमत के ऐसे कार्यों में आगे आने का संदेश दिया गया।

इस कार्यक्रम में जमाअत-ए-इस्लामी हिंद, मंडला की महिला विंग की सेक्रेटरी, गर्ल्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन (GIO) की सेक्रेटरी सहित संगठन की महिला कार्यकर्ताओं एवं अन्य कार्यकर्ताओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया और मरीजों तथा जरूरतमंदों के बीच फल, दूध एवं बिस्किट वितरित किए।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि पैगंबर-ए-इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत को याद करने का सबसे बेहतर तरीका उनके बताए हुए इंसानियत, रहमत, खैरख़्वाही और समाज की खिदमत के पैगाम को अपनी ज़िंदगी में उतारना और समाज तक पहुँचाना है।

इस दौरान शहला परवीन, इशरत परवीन, शगुफ्ता परवीन, शबनम, साबिका, तबस्सुम, रिजवाना, नाजमा, मनतशा, सानिया, रिजा, अर्शी, साराह, ज़िया मौजूद थी।
