शास्त्रीय संगीत व ग़ज़लों का श्रोताओं ने लिया आनंद
मण्डला – रज़ा फाउंडेशन नई दिल्ली और सरई आर्ट गैलेरी कान्हा के संयुक्त तत्वाधान में रज़ा संध्या – 1 का आयोजन स्थानीय सैयद हैदर रज़ा मार्ग स्थित रज़ा कला वीथिका में किया गया। विदित है कि सभी पद्म पुरुस्कारों से सम्मानित आधुनिक भारत के महान चित्रकार सैयद हैदर रज़ा की शत – वार्षिकी के उपलक्ष में इस वर्ष हर माह की 22 तारीख को कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना है। इसी कड़ी में 22 मार्च 2021, सोमवार की शाम रज़ा संध्या – 1 का आयोजन किया गया। इस आयोजन में अवनी वर्मा, अथर्व पांडे, श्रीकांत पांडे और जगदीश कछवाहा ने अपनी प्रस्तुति दी।
रज़ा संध्या – 1 शुरुआत उभरती शास्त्रीय गायिका अवनी वर्मा के भजन से हुई। अवनी ने राग आशावरी में छोटा ख्याल और तराना प्रस्तुति किया। अगली प्रस्तुति में अवनी ने राग भैरवी में द्रुपद, छोटा ख्याल और तराना से श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी। जिले के स्थापित कलाकार व संगीत शिक्षक जगदीश कछवाहा ने वो काला इक बांसुरी वाला भजन से अपने कार्यक्रम की शुरुआत की। जगदीश कछवाहा ने मिश्रपीलू में ठुमरी ‘बरसन लागे सावन बुंदिया राजा तोरे बिन लागे न मोरा जीया’ प्रस्तुत किया। उन्होंने राग यमन केदार व शिवरंजनी पर आधारित ग़ज़ल प्रस्तुति की। जिनमें ऐ सनम तुझ से मैं जब दूर चला जाऊंगा और इतना टूटा हूं छूने दिखर जाऊंगा को श्रोताओं द्वारा काफी पसंद किया गया। कल्याणिका स्कूल अमरकंटक के म्यूजिक टीचर श्रीकांत पांडे ने भजन ‘राम का गुणगान करिये’ के साथ – साथ गजल और होरी प्रस्तुत किया गया। सभी प्रस्तुतियों में अथर्व पांडे ने तबले पर बखूबी संगत दी। कार्यक्रम का संचालन गजेंद्र सोनी ने किया।
इस दौरान हेमन्तिका शुक्ला, मृदुला कालपीवार, गीता कालपीवार, दिव्या खत्री, प्रीति सोनी, कपिल तिवारी, राजेंद्र शर्मा, डॉ. सुनील यादव, चंद्रेश खरे, यशवंत ताम्बे, अनिल भोयर, आलोक शुक्ला, प्रसन्न सराफ, सुनील साहू, विवेक शुक्ला, अजय श्रीवास्तव, विनय श्रीवास्तव, शक्ति क्षेतीजा, अनादि वर्मा, इंद्रेश खरया, सुनील मिश्रा, आनंद प्रकाश तिवारी, आशीष कछवाहा, दीपमणि खैरवार, पुनीत नंदा सहित बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी उपस्थित थे।
