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जिले की “रिफर चिकित्सा पद्धती” ने फिर एक परिवार को किया बेसहारा

मंडला जिला यूं तो अपनी खूबियों के लिए हर जगह जाना जाता है और खूबियां भी ऐसी की लोगों को भुलाए नहीं भूलती आइए जिले की कुछ खूबियों से आपको रूबरू करवाते हैं जिसमें मुख्य रुप से हमारे जिले की शान बनी है मंडला जबलपुर रोड, मंडला रेलवे स्टेशन एवं जिला चिकित्सालय मंडला यह मंडला जिले के नाम को चांद से भी ऊपर ले जाकर रोशन कर चुके हैं हाल ही में हुई घटना के आधार पर मंडला जबलपुर रोड पर आए दिन मौतों का अंबार लगा हुआ है तो वहीं रेलवे स्टेशन ना होने की वजह से मरीज उचित चिकित्सा के लिए जबलपुर से आगे कहीं नहीं बढ़ पा रहे हैं यदि रेलवे स्टेशन की सुविधा होती तो मरीज़ नागपुर या अन्य बड़े शहरों का सफर तय कर पाते और जिला चिकित्सालय मंडला की यदि हम बात करें तो कहना ही क्या करोड़ों की बिल्डिंग , लाखों की मशीनरी ,लाखों की सैलरी पाने वाला स्टाफ और व्यवस्था के नाम पर रिफर.. रिफर.. रिफर..

रिफर मंडला जिला चिकित्सालय का सबसे बड़ा मेडिकल हथियार बन गया है जिसमें जिला चिकित्सालय के होनहार डॉक्टरों द्वारा मरीज को बिना हाथ लगाए बिना कोई प्रारंभिक चिकित्सा दिए दूर से ही बता दिया जाता है कि यह केस गंभीर है इसे जबलपुर मेडिकल रिफर किया जाता है साथी एक एंबुलेंस आपको चिकित्सा के रूप में दे दी जाती है जिसमें डॉक्टर या नर्स का होना ना होने के बराबर होता है और इस प्रकार मरीज मंडला से रिफर होकर जबलपुर की ओर चल देता है और मंडला के डॉक्टर या जिला चिकित्सालय मंडला अपनी ड्यूटी पूरी कर लेता है हद तो तब होती है जब चिकित्सालय में पदस्थ अधिकारी कर्मचारी स्वयं की वाहवाही करते सोशल मीडिया पर देखे जाते हैं और यह बड़ी आसानी से अन्य चिकित्सालय की तारीफ से भरी पोस्ट करते हैं पर यह स्वयं में आकलन नहीं कर पाते की हम भी एक डॉक्टर हैं हम भी एक स्वास्थ्य कर्मी हैं तो मरीज से कैसा व्यवहार करें वैसे जिला चिकित्सालय मंडला में पदस्थ डॉक्टरों ने अपने हाथ इतने रंग लिए हैं कि वह रंग अब गाढ़ा हो चला है कहने को तो बड़ी बड़ी मशीन मौजूद है जिला चिकित्सालय मंडला में लेकिन चलती एक भी नहीं या शायद चलती हो तो अधिकारियों के घरों में मौजूद क्लीनिक पर खैर जो भी हो जिला चिकित्सालय या जिला में निर्माणाधीन रोड या निर्माणाधीन रेलवे स्टेशन यह साबित करते हैं कि हमारे जनप्रतिनिधि कितने होनहार हैं कितने क्रियाशील हैं यह हमारे लिए इतने सेंसिटिव हैं की ये पक्ष या विपक्ष में हो तो धरना देकर आपसी सहमति से फिर एकजुट हो जाते हैं पर जनता को हमेशा इन जनप्रतिनिधियों ने ठेंगा ही दिखाया है

इन जनप्रतिनिधियों की जिले में सिर्फ इतनी ही भूमिका है कि यह चुनाव में सिर्फ वादे कर आगे बढ़ जाते हैं यह कभी भी जिले की सुविधाओं के लिए एकमत नहीं होते और बात जनप्रतिनिधियों की की जाए या जनता की यह कभी शहर या जिले के विकास के मुद्दों पर धरना नहीं देंगे पार्टी का स्वार्थ हो तो मंडला बंद के लिए दोनों पार्टियां तुरंत तैयार हो जाती हैं दुकानों से इनको समर्थन भी चाहिए पर यदि व्यवस्था की बात की जाए तो ये जनप्रतिनिधि तुरंत अपना पल्ला झाड़ते नजर आते हैं या यूं कह लें कि एक केला देकर चार लोगों की फोटो खिंचवाना इनका शौक बन चुका है बात करे समाजसेवी संस्थाओं की तो ये भी फोटो बाज़ी में ज्यादा समाजसेवा में कम विश्वास रखती है.

खैर कोई बात नहीं मन व्यथित था इसलिए इतना सब कुछ लिख गया बाकी इस जिले का भगवान ही मालिक है या यूं कहे भगवान ही चला रहा है सत्तारूढ़ या गैर सत्तारूढ़ पार्टी की बात करें तो दोनों पार्टिया अपना अपना उल्लू सीधा करने में व्यस्त हैं अधिकारी अपनी मौज मस्ती में है रही बात पत्रकारों की तो उन्होंने आज फिर अपना एक साथी खो दिया यह वह साथी था जो सरकारी महकमे के हर काम में सबसे पहले देखा जाता था लेकिन आज उसी सरकारी महकमे ने हमारे साथी की तत्कालीन कोई मदद नहीं की आखिर वह अपने परिवार को बेसहारा छोड़ कर चले गए और छोड़ गए हमारे लिए फिर कई सवाल कि आखिर हमारा जिला किस व्यवस्था में जी रहा है या सिर्फ ऑक्सीजन की कमी के चलते हमारे साथी को मंडला से जबलपुर रिफर कर क्या जिला चिकित्सालय मंडला में अपनी शान बढ़ाई या उस पर कई सवाल खड़े कर दिए …. ये है इनकी साल भर की तैयारी ….. क्रमशः

 

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