मंडला पृथ्वी पर स्वस्थ्य जीवन की निरंतरता बनाए रखने हेतु मृदा का स्वस्थ्य होना आवष्यक है कृषि में शुद्ध लाभ अधिक से अधिक प्राप्त करने के लिए आवष्यक है कृषि लागत को कम किया जाए वर्तमान में उर्वरकों का मूल्य भी दिन प्रतिदिन बढता जा रहा है डाइअमोनियम फास्फेट (डी.ए.पी) जो कि लगभग 1300 रू में प्राप्त होती थी उसका मूल्य भी बढकर 1900 रू हो गया वर्तमान में भारत सरकार द्वारा सब्सिडी प्रदाय कर मूल्य को स्थिर रखा गया है जिससे 1200 रू में ही प्राप्त हो रही है परंतु हर समय इस प्रकार की सब्सिडी प्रदाय करना संभव नही है अतः आवष्यकता है कि मिट्टी परीक्षण आवष्यक रूप से करवाया जाए जिससे खेत में कितनी खाद की आवष्यकता है ज्ञात की जा सकती है और किसान भाई अतिरिक्त खाद को व्यर्थ में प्रयोग करने से बच सकते है भूमि का जैविक, रासायनिक भौतिक स्वास्थ्य भी स्थिर रखा जा सकता है इन सभी बिंदुओ को ध्यान में रखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा प्राप्त निर्देषों के परिपालन में कृषि विज्ञान केन्द्र मण्डला के वैज्ञानिकों डाॅ विषाल मेश्राम, डाॅ आर.पी. अहिरवार, श्री नील कमल पन्द्र, कु. केतकी धूमकेती द्वारा खादो का संतुलित मात्रा में प्रयोग कैसे करे? विषय पर उर्वरक प्रयोग जागरूकता कार्यक्रम का आॅनलाईन प्लेटफार्म माध्यम से रखा गया। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डाॅ विषाल मेश्राम ने बताया कि प्रतिवर्ष यह कार्यक्रम जिले के कृषको को खाद के सही संतुलित प्रयोग की जागरूकता लाने के लिए आयोजित किया जाता है कोरोना संक्रमण काल मंे आॅनलाईन माध्यम के द्वारा किया जा रहा है इसमें फसलों के अनुरूप सही खादो का चयन, उचित मात्रा, जैविक खादों का उपयोग, नकली-असली खादो की पहचान आदि पर विस्तृत चर्चा की गयी एवं कृषकों की शंका का समाधान किया गया।
