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कृषि विज्ञान केन्द्र में किया गया पशु टीकारण षिविर का आयोजन

मडलाजवाहरलाल नेहरू कृषि विष्व विद्यालय अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र मण्डला के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुुख डाॅ. विषाल मेश्राम के मार्गदर्षन में केन्द्र के पशुपालन वैज्ञानिक डाॅ. प्रणय भारती द्वारा परिसर में पषुपालन विभाग मण्डला के पषु चिकित्सक डाॅ. ललित चैरसिया एवं उनका टीम के सहयोग से केन्द्र के पशुओं में गलघोटू रोग एवं लगड़ा बुखार रोग बचाव हेतु टीकाकरण किया गया। डाॅ प्रणय भारती द्वारा टीको के महत्व पर प्रकाष डालते हुये बताया गया कि जैसे वर्तमान में हम कोविड-19 से बचाव हेतु खुद का टीकाकरण करवा रहे हैं इसी तरह कृषकों को अपने पशुओ को जानलेवा बीमारी से बचाव हेतु समय पर टीकाकरण करवाने की आवष्यकता है एवं किसान भाईयों को टीके के बारे में फैली किसी भी भ्रांति से बचना चाहिए। गलघोंटू रोग के बारे में विस्तार से बताते हुये वैज्ञानिक का कहना है कि यह एक जीवाणु जनित रोग है जो मुख्यतः गाय एवं भैंसो को लगता है। यह मानसून के समय व्यापक रूप फैल सकता है। इसके लक्षण मुख्यतः शुरूआती तेज बुखार होना, मुंह से लार गिरना व गर्दन में सूजन के कारण सांस लेने के दौरान घर-घर की आवाज आना है। इलाज तुरंत न शुरू होने पर पशु की अकाल मृत्यु हो जाती है। इसी तरह लंगड़ा बुखार भी जीवाणु जनित रोग है जिसको पशु को तेज बुखार के साथ आगे व पीछे की टांगो में दर्दयुक्त सूजन हो जाता है जिससे पशु लंगडा कर चलने लगते है। इलाज शीघ्र न होने से पशु की मृत्यु दर काफी अधिक होती है। अतः इस दोनो रोगो से बचाव हेतु पशुपालकों को मानसून शरू होने से पहले ही अपने पशुओं में गलघोटू व लंगड़ा बुखार का टीका लगवा लेना चाहिए। इसके लिए पशुपालक निकटतम पशु औषधालय या पशु चिकित्सालय में सम्पर्क कर सकते है। उक्त कार्यक्रम के दौरान केन्द्र के वैज्ञानिक डाॅ. आर.पी. अहिरवार, श्री नीलकमल पन्द्रे एवं कु. केतकी धूमकेती उपस्थित रहे।

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