मण्डला पंचायत निर्वाचन की घोषणा मध्यप्रदेश के चुनाव आयुक्त ने की है इस संबंध में जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति रागनी परते का कहना है कि मध्यप्रदेश सरकार ने राज्यपाल के नाम से आदेश जारी कर 2014 के आरक्षण पर निर्वाचन कराने का फैसला लिया है 2014 के बाद कुछ ग्राम पंचायत नगर पंचायतों में तब्दील हो गई और कुछ ग्राम पंचायतों को नगर पालिकाओं में परिसीमन के दौरान मिला दिया गया। इससे अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग का आरक्षण प्रभावित होगा। महिला वर्ग का भी आरक्षण प्रभावित हुआ। इस प्रकार से 2021 में 2014 का रोस्टर लागू करने से सभी वर्गों को नुकसान हुआ और वैधानिक प्रश्न यह है कि यदि 2014 का रोस्टर लागू किया
जाता है तो नगर पालिका और नगर पंचायतों में शामिल होने वाली पंचायतों का अस्तित्व है फिर से हो जाएगा जिससे घोषित की गई नगर पंचायतों और नगर पालिका परिषद परिसीमन पर प्रश्न चिन्ह लग जाएगा कि ऐसी नगर पालिका और नगर परिषद का परिसीमन हो जाएंगे। ऐसी नवीन नगर पंचायत घोषित फिर से ग्राम पंचायत हो जाएंगे इन सब प्रश्नों का उत्तर दिए बगैर ही सरकार ने अंधाधुंध जल्दबाजी में निर्णय लिया है जो
कि गलत है चुनाव घोषणाओं के पहले इन सब प्रश्नों पर विचार किया जाना चाहिए था। अनुसूचित जाति, जनजाति महिला वर्ग पिछड़ा वर्ग एवं सामान्य वर्ग के हितों पर वर्तमान सरकार और चुनाव आयोग कुठाराघात कर रहे हैं इससे सरकार की यह दूषित मानसिकता साबित होती है कि वर्तमान सरकार को ही सरपंचों को उन्हीं लोगों को फिर से मौका देना चाहती है जो विगत 7 वर्षों से पंचायतों का सुख भोग रहे और भारतीय जनता पार्टी की मदद कर रहे हैं इससे साबित होता है कि चुनाव निष्पक्ष नहीं होने वाले हैं चुनाव में ताबड़तोड़ नाइंसाफी होने वाली है धांधली होने वाली है।
श्रीमती रागनी परते ने सरकार और चुनाव आयोग से निवेदन किया कि एक बार फिर से विचार करें और नए सिरे से आरक्षण करा कर चुनाव कराए जाएं ।
