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*एम पी फार्मासिस्ट एशोसिएशन प्रदेश पदाधिकारियो की बैठक संपन्न हुई।जबलपुर*

21 अप्रैल को मध्य प्रदेश फार्मेसी कॉन्सिल का होगा घेराव फार्मेसी कॉन्सिल का चुनाव 2002 के बाद से चुनाव नहीं होना पीसीआई सर्टिफिकेट का रीनवल समय पर न होना फार्मेसी कॉलेजो का बिना कॉलेज गए लाखो रूपये ले कर घर बैठे डिप्लोमा फार्मेसी कराना फार्मासिस्ट को रोजगार न मिलना फार्मासिस्ट सर्टिफिकेट की किराए बाजी पर पीसीआई का अंकुश न होना और दिन प्रति दिन फार्मेसी का महत्व कम होता जा रहा है जिसके संदर्भ में एम पी फार्मासिस्ट एसोसिएशन कि प्रदेश कार्यसमिति की मीटिंग रविवार 13 मार्च को अम्बेडकर भवन हाई कोर्ट चौराहा जबलपुर में आयोजित कि गयी।जिसमें एसोसिएशन के सभी सदस्य सम्मलित हुए मीटिंग में शासन प्रशासन के द्वारा लगातार प्रदेश भर के समस्त फार्मासिस्ट कौम के हितों कि लगातार अनदेखी किये जाने पर गहन चिंतन किया गया। जिसमें प्रदेश में ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 रूल 1945 और फार्मेसी एक्ट 1948 सेक्शन 42 के खुल्लेआम उल्लंघन पर बिना फार्मासिस्ट के संचालित मेडिकल स्टोर्स पर कार्यवाही नहीं किये जाने को लेकर आगामी दिनों में संगठन द्वारा प्रदेश व्यापी आंदोलन कि रणनीति बनाई गयी । क्योंकि नियमानुसार दवा वितरण का कार्य एमपी फार्मेसी कॉउंसिल में रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट द्वारा ही करवाया जाना चाहिए। काउंसिल मे लगभग 70000 फार्मासिस्ट रजिस्टर्ड हैं। स्वास्थ विभाग में अनुमानतः 10000 फार्मासिस्ट दवा वितरण,भंडारण एवं वेक्सिनेशन फोकल पॉइंटो पर इनकी अवश्यकता होती हैं जबकि राज्य सरकार द्वारा कोरोना काल में मानव संसाधन की कमी का हवाला देते हुए सभी जिलों में अलग अलग पदों पर नियुक्तियां की गई थी परंतु सबसे पहले फार्मासिस्ट को निकाल दिया गया और उनका काम दूसरे कर्मियों से आज भी करवाया जा रहा है। जिससे लाखों रुपए खर्च कर फार्मासिस्ट बननें के बाद भी ये लोग बेरोजगार है कोई सुनने वाला नही है। एम पी फार्मासिस्ट एशोसिएशन के पदाधिकारियों द्वारा लगातार ई मेल एवं पत्र के माध्यम से स्वास्थ विभाग मे फार्मासिस्ट के दस हजार रिक्त पदों पर एवं कार्य कर रहे फार्मासिस्टो के ग्रेट पे को बढ़ाने हेतु लगातार जिम्मेदार अधिकारियों को शिकायत दर्ज करवाई गई सूचित भी किया गया परंतु सालों से बैठे निकम्मे अधिकारियों द्वारा बिना जाँच किये कोई कार्यवाही नही की जाती। आए दिन कुकुरमुत्ते की तरह बिना फार्मासिस्ट के रजिस्ट्रेशन किराये पर ले कर मेडिकल स्टोर्स बिना जाँच के भ्रस्टाचार कर खुलवा दिए जाते हैं और मनमाने दामो पर नशे की दवाइयाँ बेची जाती हैं। कोरोना काल में रेमिसीवीर इंजेक्शन वाली घटना सरकार की लापरवाही एवं अनभिज्ञता का प्रत्यक्ष उदाहरण सभी के सामने है। हाल ही मे दिल्ली फार्मेसी काउंसिल द्वारा फार्मेसी काॅलेजो द्वारा मनमानी पैसे ले कर घर बैठे डिप्लोमा डिग्री देने का अवैध गोरख धंधे पर रोक लगाने का प्रयास किया है परंतु नियम बनने से पहले नियम तोड़ने के उपाय खोज ही लिए जाते हैं। इस तरह के हो रहे अत्याचारों को संज्ञान में लेते हुए एम पी फार्मासिस्ट एशोसिएशन द्वारा लगातार हो रहे भ्रस्टाचार एवं फार्मेसी एक्ट का उलंघन होने पर आगामी दिनों में फार्मेसी कॉउंसिल म.प्र.एवं मुख्यमंत्री निवास भोपाल का घेराव किया जाएगा। साथ ही प्रदेश के समस्त फार्मासिस्ट साथियों से आव्हान भी किया कि अपने हितों की रक्षा हेतु प्रदेश की इस मनमानी सरकार के खिलाफ एक जुट हो कर होने वाले इस आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में साथ आए।

कार्यक्रम मे प्रदेश अध्यक्ष अमित सिंह ठाकुर प्रदेश महासचिव अखिलेश त्रिपाठी प्रदेश संगठन मंत्री प्रशांत सिंह हाडा उपाध्यक्ष सुधांशु मिश्रा प्रदेश अध्यक्ष आई टी राजवीर त्यागी प्रदेश उपाध्यक्ष आई टी हिमांशु चतुर्वेदी जिला अध्यक्ष व सचिव कपिल गुप्ता रोहित अग्रहरी सुभम रिछारिया पवन पाण्डेय जैनदर सिंह पंकज त्रिपाठी पूनम जी विनय चतुर्वेदी

अभिषेक झारिया, मयंक जायसवाल, मनीष साहू, प्रकाश बघेल, नितिन राय अभिलाष अनुराग तिवारी शिवम शुक्ला सहित सभी प्रदेश मेंबर उपस्थित रहे।

 

*धन्यवाद!*

अभिषेक झरिया

जिला अध्यक्ष

मध्य प्रदेश फार्मेसी एसोसिएशन मंडला

7974511667

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