मानव सेवा ही माधव सेवा है का संदेश देने वाले 165 देशों से अधिक देशों में सभी भक्तों के आराध्य, सर्वस्य, भगवान श्री सत्य साईं बाबा आज 24 अप्रैल 2011 को भौतिक और नश्बर शरीर को त्याग कर महासमाधि ली थीं | वे सर्वज्ञ और अंतर्यामी है उनकी कृपा अनुग्रह और सानिध्य के अनेक अनुभव हुए | पाषाण हृदय में भी ईश्वर के प्रति, प्रीति उत्पन्न कर देना उनके लिए सहज था स्वामी आज भी भक्तों की रक्षा ऐसे ही करते हैं जैसे “पलकें नेत्रों की रक्षा करती है*”

*स्वामी के महानिर्वाण दिवस को हम “आराधना दिवस” के रुप में भक्त मनाते हैं हम सबके लिये यह दिवस इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि स्वामी ने हमें जो कुछ बताया सिखाया अब हमें उसे दैनिक जीवन में अनुकरण में लाना है स्वामी हमेशा कहा करते थे कि “मेरा जीवन ही मेरा संदेश है |* आज इस पुनीत अवसर पर प्रातःकाल नगर संकीर्तन, नारायण सेवा, एवं सन्ध्या काल मे पुष्पांजलि अर्पण, एवँ साईं भजन साई सेंटर पर आयोजित किये जाएंगे।
