गजल ( शजर इश्क का तुम )
चरागों की महफिल, सजा कर तो देखो |
अंधेरों को दिल से, हटा कर तो देखो ||
गैरों को अपना, बना पाओगे तुम |
थोड़ी प्रीत दिल में, बसा कर तो देखो ||
फिजाओं में नफरत, न घोलो जहाँ की |
शजर इश्क का तुम, जगा कर तो देखो ||
बने आशियाना, जुटे तिनका- तिनका |
परिंदों सा तुम, हौसला कर तो देखो ||
अरमाँ भी होंगे, सभी पूरे दिल के |
कल्पना ख्वाब पलकों, सजा कर तो देखो ||
🙏🌹कल्पना पाण्डेय🌹🙏
