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मंडला जिले को सच का आईना दिखाती यह खबर

 

मनोज सिंह कुशवाहा की रिपोर्ट

 

पंचायतों में चल रही मनमानी, भ्रष्टों की सांठ-गांठ

मंडला। निर्माण कार्यों में मनमानी चरम सीमा पर पहुच गई है। निर्धारित नियम कानून के अनुसार निर्माण कार्यों को पूरा नहीं कराया जा रहा है। कई निर्माण कार्य अधूरे पड़े हुए हैं जिन्हें भी पूरा करने की कोशिश नहीं की जा रही है। यूं तो लगभग सभी विभागों के माध्यम से मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में निर्माण कार्यों में मनमानी लापरवाही और धांधली की ही जा रही है लेकिन सबसे ज्यादा मनमानी की खबर ग्राम पंचायतों के निर्माण कार्यों की मिल रही मनमाने तरीके से निर्माण कार्यों को जैसे तैसे कराया जा रहा है। खबरें लगातार मिलने के बाद भी शासन प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। इस तरह की मनमानी की खबर मण्डला जिले की जनपद पंचायत नैनपुर की अधिकांश ग्राम पंचायतों में किये जाने की मिल रही है। यहां पर ग्राम पंचायतों के काम सरपंच सचिव रोजगार सहायक नही बल्कि ठेकेदार करवा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो ठेकेदार आला अधिकारियों की सांठ.गांठ से सरपंच सचिवों और रोजगारों से मिली भगत कर निर्माण कार्यों को खुले आम नियम विरूद्ध करा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन सब में कमीशन का भारी खेल है। अधिकारियों और सरपंच सचिव रोजगार सहायको को कमीशन की भारी रकम मिल रही है। ठेकेदार खुलेआम मनमानी धांधली और लापरवाही कर ग्राम पंचायतों में आवंटित धन की होली खेल रहे हैं। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, संबंधित एसडीओ और उपयंत्री कभी निर्माणकार्यों का निरीक्षण करने के लिए नहीं जा रहे हैं। ठेकेदारों के भरोसे निर्माण कार्यों को पूरा कराया जा रहा है। जो सिर्फ गड़बड़ी कर रहे हैं। जनापेक्षा है पंचायतो में चल रही मनमानी और धांधली पर लगाम लगाई जाए और पंचायतों को ठेकेदारों से मुक्त किया जाए निर्माण कार्यों की उच्च स्तरीय जांच पड़ताल ग्राम पंचायतों सहित सभी विभागों की कराई जावे।

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सरकार ने छीन लिया रोजगार

मण्डला। साक्षर भारत मिशन के प्रेरक और सरकारी स्कूलों के अतिथि शिक्षक काफी लंबे समय से नियमितीकरण करने की मांग कर रहे हैं लेकिन इनकी मांगो पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिसकी वजह से अतिथि शिक्षक और साक्षर भारत मिशन के प्रेरको की नाराजगी बढ़ती ही जा रही है सरकारों द्वारा इन्हें सिर्फ ठगा जा रहा है नियमित करने की कार्यवाही शीघ्र पूरी नही की जा रही है साक्षर भारत मिशन के प्रेरक तो विगत दो वर्षों से बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं इन्हें स्थाई रोजगार नही दिया जा रहा है अधिकांस लोगों की मांग है कि प्रेरको और अतिथि शिक्षकों को शीघ्र नियमित किया जावे ताकि इन्हें स्थाई रोजगार मिल सके अधिकांस लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या कभी इन्हें नियमित किया जाएगा या नहींघ् सभी जवाबदार इस सम्बंध में जनता के समक्ष सत्यता स्पष्ट करें।

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समूहों को राशि व राशन देने में लेट लतीफी

मण्डला। सरकार की विभिन्न योजनाओं का संचालन करने वाले स्वसहायता समूहो कि समस्याओं की निराकरण के लिए विशेष ध्यान नहीं दिया जाता है यही वजह है कि स्वसहायता समूह परेशानियों का सामना करते रहते हैं सरकारी स्कूलों में मिडडे मील और आंगनवाड़ी केंद्रों में सांझा चूल्हा कार्यक्रम संचालित करने वाले समूहों को समय पर राशि व राशन सामग्री प्रदान करने में घोर लापरवाही बरती जा रही हैं बैंको में ठीक समय पर राशि जमा नहीं कि जा रही है और शासकीय उचित दुकानों के माध्यम से समय पर राशन सामग्री प्रदान नही की जा रही हैं जिसकी वजह से समूहों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जांच की जावे की कब से लेकर अब तक राशि व राशन सामग्री प्रदान नही की गई है समूहों की अपेक्षा है कि प्रति माह समय पर राशि व राशन सामग्री प्रदान की जावे।

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परसवाड़ा में नहीं सुलझ रही समस्या

मंडला। यूं तो मप्र के मंडला जिले में समस्याओं की कोई कमी नहीं है। लगभग सभी गांव व नगर में कई तरह की समस्यायें मौजूद हैं जिनकी वजह से नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस समय मप्र के मंडला जिले की तहसील नैनपुर की ग्राम पंचायत परसवाड़ा व उसके पोषक ग्राम देवरी व डुंगरिया में समस्याओं से ग्रामीण अत्यंत परेशान हो चुके हैं। पानी की समस्या यथावत बनी हुई है। ग्राम परसवाड़ा में नल जल योजना शुरू नहीं की जा रही है जल स्त्रोतों की साफ-सफाई नहीं की जा रही है। हेण्डपम्पों का संधारण भी सही तरीके से नहीं किया जा रहा है। सार्वजनिक कूपों की मरम्मत और साफ.सफाई में संबंधितों द्वारा घोर लापरवाही बरती जा रही है। ग्राम पंचायत परसवाड़ा व इसके पोषक ग्राम देवरी व डुंगरिया में समस्याओं का भारी अंबार लगा हुआ है। शौचालयों का निर्माण कार्य शत.प्रतिशत पूरा नहीं किया गया है। कई शौचालय अधूरे पड़े हुए हैं और अधिकांश शौचालय घटिया निर्माण की वजह से जर्जर हो चुके हैं। शौचालयों की मरम्मत में भी धांधली की गई है। फर्जी तरीके से ग्राम पंचायत परसवाड़ा को खुले में शौचमुक्त कर दिया गया है। जबकि हकीकत यह है कि आज भी खुलेआम शौच किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन की यहां पर धज्जियां उड़ा कर रख दी गई है। गंदगी का साम्राज्य स्थापित हो चुका है। आजीविका परियोजना के कार्य यहां पर शुरू नहीं किये जा रहे हैं। रिलायंस फाउंडेशन के कार्य शुरू करने में भी देरी की जा रही है। जल संरक्षण के कार्य न पहले किये गये न अब किये जा रहे हैं। तालाबों का गहरीकरण व नये तालाबों का निर्माण नहीं किया जा रहा है। रोजगारमूलक कार्य युद्धस्तर पर यहां पर शुरू नहीं किये जा रहे हैं। ढ़ेर सारे काम अधर में लटके हुए हैं। विधायक व सांसद निधि से यहां पर कार्य नहीं कराये जा रहे हैं। पुराने सभी सरकारी भवनों की मरम्मत व रंगरोगन का कार्य भी नहीं किया जा रहा है। शासकीय उचित मूल्य दुकान का पुराना भवन अत्यंत जर्जर हो चुका है। ग्रामसभा में पारित प्रस्तावों पर कार्यवाही नहीं की जा रही है वर्ष 2017-18, 2018-19 एवं 2019-20 की वर्ष वर्ष 2021 एवं वर्ष 2022 की सभी ग्राम सभाओं में पारित प्रस्तावों पर क्या कार्यवाही की गईए ग्रामसभा को अवगत नहीं कराया जा रहा। ग्राम पंचायत परसवाड़ा में सीएम हेल्पलाइन व जिलास्तरीय जनसुनवाई कार्यक्रम में की गई शिकायतों का निराकरण कई वर्षो से नहीं किया जा रहा है। गोलमाल निराकरण की जानकारी शासन-प्रशासन को प्रेषित की जा रही है। शिकायतकर्ता की संतुष्टि के बिना शिकायत को बंद कराने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। कुल मिलाकर इस ग्राम पंचायत में ढ़ेर सारी समस्यायें हैं जिनके निराकरण में शासन-प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिये जाने की वजह से ग्रामीणों की नाराजगी में इजाफा होते जा रहा है। जनापेक्षा है सरकार शीघ्र ध्यान दे।

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पीएम की सम्मान निधि से वंचित किसान

मंडला। म.प्र. के मंडला जिले में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम से संचालित योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है। अनेक लोग कई तरह की योजनाओं से वंचित हो रहे हैं। इसके बाद भी शासन-प्रशासन द्वारा इस संबंधमें कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जो लोग योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं उन्हें प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम से संचालित योजनाओं का लाभ लेने के लिए नहीं जोड़ा जा रहा है। इस समय किसान ज्यादा परेशान हैं और योजनाओं का लाभ न मिलने की वजह से किसानों में लगातार आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ जिन किसानों को मिल रहा है उन किसानों को मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना से जोड़ा जा रहा है। ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजनान्तर्गत वर्ष में 6000 रूपये की राशि देने का प्रावधान है। अभी-अभी म.प्र. शासन के मुख्यमंत्री द्वारा किसान कल्याण योजना के नाम से शुरूआत की गई है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को 4000 रूपये की राशि दिये जाने के लिए कहा जा रहा है। यह प्रक्रिया मप्र के मंडला जिले में भी पूरी की जा रही है। किसान इस बात को लेकर परेशान हैं और शासन-प्रशासन के आला अधिकारी कोई विशेष ध्यान नहीं दे रहे हैं। इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान परेशान हो रहे हैं। नये नाम जोडने की मुहिम शुरू नहीं की जा रही है। जबकि अधिकांश किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के नाम से छूट गये हैं। ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना का लाभ भी अधिकांश किसानों को इसलिए नहीं मिल पा रहा है क्योंकि अधिकांश किसानों का नाम प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में शामिल ही नहीं हो पाया है। किसानों की मांग है कि ऐसे सभी किसान जिनका नाम प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में नहीं जुड़ पाया है नये नाम जोड़कर सभी पात्र किसानों को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की योजना का लाभ प्रदान किया जाये। कई किसानों ने बताया है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजनान्तर्गत नाम तो जुड़ा हुआ है लेकिन बैंक के खाते में राशि जमा नहीं हो रही है। ऐसे किसानों की भी सुध सरकार को लेना चाहिए, ऐसी अपेक्षा किसानों की है।

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मण्डला में समस्याओ का कब होगा अंत

मंडला। म.प्र. के आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला मंे भ्रष्ट सरकारी तंत्र की जेब में जनकल्याण की योजनायें कैद हो गई हैं । वर्तमान सरकार के समय में इस जिले में योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी लापरवाही मनमानी व धांधली की जा रही है । स्वच्छ भारत मिशन में आवंटित धन की होली खेली गई है और खेली जा रही है । फर्जी तरीके से ओ.डी.एफ. हो चुके गांवों की जांच नहीं की जा रही है । कृषि, उद्यानिकी की योजनाओं का पता नहीं चल रहा है । शिक्षा स्वास्थ्य की स्थिति बुरी तरह चरमरा गई है । सड़कों की हालत खस्ता हो गई है । स्कूल भवन सहित सभी तरह के सरकारी भवनों की हालत भी दयनीय हो गई है । रंगरोगन व मरम्मत का कार्य नहीं किया जा रहा है । सम्मान निधि की राशि भी सभी किसानों के बैंक खातों में जमा नहीं हो पाई है । पूरे जिले में जहां देखो वहां अतिक्रमण की बाढ़ आ गई है । राजस्व संबंधी समस्याओं का अम्बार लगा हुआ है । सी.एम. हेल्पलाइन और जिलास्तरीय जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतों व आवेदन पत्रों के निराकरण में भारी गोलमाल किया जा रहा है । खनिज सम्पदा लूटी जा रही है । शराब अवैध तरीके से गांव-गांव बिक रही है । खाद्य विभाग व अन्य संबंधित विभाग मिलावटखोरों पर शिकंजा कसने के लिए ध्यान नहीं दे रहे हैं । पार्को, उद्यानों की हालत खस्ता है । नर्मदा तटों का विकास और पर्यटन विकास पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है । ढ़ेर सारे काम अधर में लटके हुए हैं । स्कूलों में खेल-कूद प्रतियोगिताएं बंद हो गई हैं । बच्चांे को खेलकूद से वंचित किया जा रहा है । इसके अलावा सरकारी स्कूलों में पढ़ाई चौपट हो गई है । इस समय सबसे चर्चा मंडला जिले की तहसील नैनपुर के पठार क्षेत्र में संचालित सभी सरकारी स्कूलों की चल रही है। बेरोजगारी चरम पर पहुंच गई है कुल मिलाकर समस्याओं का अम्बार मंडला जिले में लगा हुआ है और शासन प्रशासन द्वारा समस्याओं के निराकरण के लिए परिणामकारी कार्यवाही नहीं की जा रही है । जनापेक्षा है कि समस्याओं का जल्द से जल्द निराकरण किया जावे ।

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क्षतिग्रस्त मार्गो से राहगीर परेशान

मंडला। संपूर्ण मध्यप्रदेश सहित मंडला जिले में सड़कों की हालत बेहद खस्ता हो गई है। लगभग सभी योजनाओं के अंतर्गत निर्मित सड़कों ने घटिया निर्माण की वजह से दम तोड़ दिया है। मरम्मत व नवनिर्माण का काम भी लगभग सभी मार्गों में तेजी के साथ नही किया जा रहा है जिसकी वजह से राहगीर परेशान हो रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी इस समय जबलपुर मंडला मार्ग पर राहगीरों को हो रही है। कई वर्षों से इस मार्ग का निर्माण कार्य चल रहा है। जिसे कब पूरा किया जाएगा यह कुछ कहा नहीं जा सकता है। शासन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही की वजह से मार्ग का निर्माण कार्य लटका हुआ है। कई बार नागरिकों द्वारा इस मार्ग को पूरा किए जाने की मांग की जा रही है। आंदोलन भी किए जा चुके हैं इसके बाद भी किसी के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। लगभग सभी जवाबदार लापरवाही का परिचय दे रहे हैं। जहां जहां मार्ग का निर्माण कार्य किया गया है वहां वहां सड़के खराब होने लगी हैं। सीमेंट कांक्रीट सड़क में दरार आ गई है। डामलीकरण भी दम तोडने लगा है। राष्ट्रीय राजमार्ग जबलपुर-मण्डला के मार्ग को पूर्ण कराने के लिए नेता सही प्रयास क्यों नहीे कर रहे हैं ? यह चर्चा का विषय बना हुआ है। इस बात को लेकर जनापेक्षा है शासन प्रशासन के साथ नेता भी इस मार्ग को पूर्ण कराने में शीघ्र ध्यान दें।

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खनिज चोरो की जेब में कैद सरकार

मंडला। यह सौ फीसदी सच है कि शासन प्रशासन के संरक्षण में ही खनिज संपदा लूटी जा रही है। हर तरह की खनिज संपदा की लूट का कारोबार बंद नहीं हो रहा है। खनिज व अन्य संबंधित विभाग की सांठ गांठ से मंडला जिले में खनिज संपदा की लूट खनिज माफिया खुले आम कर रहे हैं। तगड़ी कमीशनखोरी की वजह से खनिज माफियाओं पर नकेल नहीं कसी जा रही हैै। कार्यवाही के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की जा रही है। जिनसे कमीशन नहीं मिल रहा है उनके वाहनों को पकड़ा जा रहा है बाकी को सरेआम छोड़ा जा रहा है। रेत का अवैध परिवहन पूरे जिले में तेजी के साथ किया जा रहा है। इसी तरह स्टोन क्रेशरों से गिट्टी का अवैध परिवहन भी ओवरलोड भरकर डंपरों के माध्यम से किया जा रहा है। ज्ञात हो कि मंडला जिले की तहसील नैनपुर के ग्राम खुरसीपार, बंजाराटोला, गजना, चरगांव, देवरी, परसवाड़ा, पाठासिहोरा में जो स्टोन क्रेशर चल रहे हैं वो इसी विभाग कें सांठ गांठ से पूरी नियमों को ताक में रखकर अवैध रूप से चल रहे हैं और इन्हें स्टोन क्रेशरों से डंपरों के माध्यम से खनिज सामग्री, गिट्टी ओवरलोड भरकर खुरसीपार, देवरी परसवाड़ा डिठौरी मार्ग व परसवाड़ा-पाठासिहोरा-गजना कोकीवाड़ा मार्ग पर अवैध रूप से परिवहन किया जा रहा है।। अवैध परिवहन दि रात चल रहा है और यात्री परेशान हो रहे हैं यहां पर खनिज विभाग कार्यवाही क्यों नहीे कर रहा है यह जांच का विषय हो गया है। इस तरह से खनिज माफियों को संरक्षण दिया जा रहा है और खनिज खनिज माफियाओं के खिलाफ कार्यवाही करने में विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अवैध कारोबर से यह पता चलता है कि खनिज विभाग कमीशनखोरी पर चल रहा है और कार्यवाही के नाम पर उन लोगों को निशाना बना रहा है जिनसे रकम नहीं मिल रही हैै। उच्च स्तरीय जांच कराकर खनिज विभाग के आलाअधिकारियों के खिलाफ दण्डात्मक कार्यवाही की जावे और खनिज संपदा के अवैध कारोबार को तत्काल बंद किया जाए ।

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आखिर कब जागेंगे जनप्रतिनिधि

मण्डला। जनप्रतिनिधियों द्वारा मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य जिले में विकास की गति को आगे बढ़ाने में कोई खास रूचि नहीं ली जा रही है। यही वजह है कि इस जिले में विकासकार्य तेजी के साथ आगे नहीं बढ़ पा रहा है। लगभग सभी राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि विकासकार्यों में पर्याप्त रूचि क्यों नहीं ले रहे हैं, इस बात का आकलन अब इस जिले की जनता करने लगी है। और इस संबंध में चहुंओर चर्चा हो रही है कि जनप्रतिनिधि विकास की मुख्य धारा से इस जिले को जोडने के लिए कोई खास प्रयास नहीं कर रहे हैं खासकर निर्वाचित जनप्रतिनिधि विकास के लिए क्या क्या कर रहे हैं किसी को ज्ञात नहीं हो पा रहा है। नागरिकों का कहना है कि जो कुछ भी इनके द्वारा किया गया है व किया जा रहा है उसे सार्वजनिक करना चाहिए ताकि पता चल सके कि कौन जनप्रतिनिधि विकास के मुद्दों पर सजग होकर इस जिले में विकास की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सहायक हो रहा है। चुनाव जीतने के बाद निर्वाचित जनप्रतिनिधि, सांसद, विधायक, जिला पंचायत सदस्य सहित तमाम प्रतिनिधि जो मतदाताओं के माध्यम से चुनकर जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं वे सभी जनहित के काम कितना कर पा रहे हैं यह चर्चा के साथ जांच का भी विषय हो गया है। नागरिक इस विषय पर अब जांच पड़ताल की मांग भी कर रहे हैं कि आखिरकार इनके द्वारा विकास के लिए क्या क्या किया गया है। ज्ञात हो कि इस जिले में एक सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते जो केन्द्रीय मंत्री भी है, वे लोकसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वहीं मण्डला जिले से तीन विधायक देवीसिंह सैयाम, अशोक मर्सकोले, त था नारायण सिंह पट्टा विधानसभा में जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इनके द्वारा जिले में छोटी बड़ी समस्याओं के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं यह जानने का विषय हो गया है। बेरोजगारी चरम पर पहुंच गई है, इसे दूर करने के लिए कोई भी प्रयास नहीं किये जा रहे हैं। उद्योग जो जहां थे, वहीं स्थिर हो गए हैं। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए पूरे जिले में काम नहीं किये जा रहे हैं। उद्योग यदि संचालित हो भी रहे हैं तो इसका फायदा मंडला जिले के बेरोजगारों को नहीं मिल पा रहा है बल्कि मनेरी में संचालित उद्योगों में जबलपुर जिले के लोगों को थोड़ी बहुत काम मिल पा रहा है। पर्यटन विकास में इनका कोई ध्यान नहीं है। धार्मिक व राष्ट्रिय महत्व के स्थल विकास को मोहताज हैं। सभी सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में जबरदस्त लापरवाही मनमानी व धांधली चल रही है। जिससे जरूरतमंदों को केन्द्र व सरकारी योजनाओं का सही लाभ खासकर जनप्रतिनिधियों की वजह से नहीं मिल पा रहा है। यह जिला पूर्व में भी पिछड़ा हुआ था और आज भी है। आजादी के कई साल बीत जाने के बाद भी पिछड़ेपन की बेडियों से आजाद नहीे हो पाया है। जिले के नागरिकों को पानी, बिजली, सड़क जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। कृषि और उद्यानिकी विभाग की योजनाओ का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है।

साक्षर भारत मिशन के शिक्षा प्रेरक बेरोजगार हो गए हैं। प्रेरकों की सेवा बहाली व नियमितीकरण कराने में जनप्रतिनिधियों द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शुरू से लेकर अभी तक स्वच्छ भारत मिशन धांधली की भेंट चढ़ा हुआ है। भयमुक्त होकर इस योजनांतर्गत भारी फर्जीवाड़ा करते हुए भ्रष्टाचार किया गया है व किया जा रहा है। फर्जी तरीके से खुले में शौच मुक्त किए गए ग्रामों की अभी तक जांच पडताल नहीं की जा रही है। गंदगी को दूर करने के लिए सही प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। पूरे जिले में गंदगी का साम्राज्य स्थापित हो गया है। जनसमस्याओं के निराकरण के लिए चलाए जा रहे जन अभियान से समस्याओं का निराकरण नहीं हो रहा है। सरकार आपके द्वार, जिला स्तरीय जनसुनवाई व सीएम हेल्पलाईन के ढेर सारे पत्रों का निराकरण नहीं किया जा रहा है। गोलमाल निराकरण करके निराकरण की औरचारिकता पूरी की जा रही है। आवेदकों को निराकरण की जानकारी किसी भी माध्यम से नहीे मिल पा रही है। जांच के बाद भी राष्ट्रीय शिशु गृह पालना केन्द्रों को अनुदान की राशि नहीं दी जा रही है। बिजली का रोना बंद नहीं हो रहा है। कभी भी कटौती कर दी जाती है। अनाप शनाप दिए गए और दिए जा रहे बिजली बिलों की जांच पड़ताल नहीं की जा रही है। बल्कि बिजली बिल बेहिसाब देकर उपभोक्ताओं को लूटा जा रहा है। नर्मदा दिनों दिन प्रदूषित होती जा रही है। प्रदूषण को दूर करने के लिए और नर्मदा तटों के विकास के लिए कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। इसके अलावा तमाम तरह की समस्याएं हैं। इन समस्याओं के निराकरण के लिए जन प्रतिनिधि ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिसकी वजह से नागरिकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। यदि समय रहते जनप्रतिनिधि नहीं जागते तो इनके खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन होने की संभावना बढ़ती जा रही है। नागरिकों के माध्यम से जनप्रतिनिध शीघ्र जागें। उक्त सभी समस्याओ के निराकरण के लिए विशेष रूप से ध्यान दें

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अतिक्रमणकारियों पर कब होगी कार्यवाही

मण्डला। सरकारी जमीन पर मध्यप्रदेश के मंडला जिले में जहां देखो वहां पर बेहिसाब अतिक्रमण किये गये हैं। अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही न तो गांव में की जा रही और न ही शहर में ध्यान दिया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो शासन प्रशासन की मिली भगत से सरकारी भूमि में अतिक्रमण कर भवन इत्यादि का निर्माण कर लिया गया है व किया जा रहा है। अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही मप्र के सिवनी जिले में कलेक्टर की दृढ़ इच्छाशक्ति की वजह से जबरदस्त तरीके से की गई है। सिवनी नगर में जिस तरह से अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की गई है, वह काबिल तारीफ है। ऐसी कार्यवाही संपूर्ण मध्यप्रदेश सहित मंडला जिले में क्यों नहीं की जा रही है, यह चर्चा का विषय बना हुआ है। मध्यप्रदेश में भी सभी जिलों के कलेक्टर प्रत्येक गांव व नगर में स्थायी रूप से अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही करें, ऐसी जनापेक्षा है। सूत्रों का दावा है कि मंडला जिले में गांव व नगर में संबंधित विभाग की सांठ गांठ से निर्धारित नाप अनुसार पट्टा तो बनवा लिया लेकिन उससे भी ज्यादा कई लोगों ने कब्जा किया है। एक भवन की जगह तीसरी मंजिल तक का भवन बनाया गया है। इस तरह का मामला मंडला जिले की तहसील नैनपुर में ज्यादा हुआ है। जनापेक्षा है कि सरकार हर गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही करे।

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खनिज चोरों की बल्ले – बल्ले

मंडला। रेत चोरी का कारोबार बंद नहीं हो रहा है। खनिज विभाग की सांठ गांठ से मंडला जिले में रेत चोरी सरेआम की जा रही है। रेती चोरों के जेब में खनिज विभाग कैद हो गया है। यही वजह है कि मंडला जिले में रेत चोरी बंद नहीं हो पा रही है। हर तरह की खनिज संपदा इस जिले में लूटी जा रही है और कोई ध्यान नहीं दे रहा है। नेता आंख बंद किए हुए हैं और शासन प्रशासन के जवाबदार कमीशनखोरी की वजह से कुछ कर नहीं पा रहे हैं। रेत चोरी का करोबार पूरी तरह शीघ्र बंद किया जाए। इसके अलावा अवैध तरीके से चल रहे डम्परों को भी बंद किया जाए। डम्पर रेत के अलावा, गिट्टी का भी परिवहन कर रहे हैं। खनिज माफिया सरकार की सांठ गांठ से खनिज संपदा को दोनों हाथ से लूट रहे हैं। इसके अलावा पूरे मंडला जिले में जहा देखो वहां कुकरमुत्तों की तरह अवैध तरीके से स्टोन क्रेशर संचालित हो रहे हैं। इनसे ही खनिज संपदा का अवैध परिवहन भी किया जा रहा है। रेत चोरों का तो ऐसा बोल बाला है कि पूरी रात जब मंडला नगर से डम्परों व अन्य वाहनों के माध्यम से खनिज सामग्री लूट रहे हैं तो फिर बाकी क्षेत्रों में क्या हो रहा होगा यह सभी अनुमान लगा सकते हैं। खनिज विभाग और प्रशासन के आला अधिकारियों के खिलाफ सरकार कब सख्त रवैया अपनाएगी नागरिक जनना चाह रहे हैं। यदि शीघ्र ही सरकार नहीं चेती और खनिज माफियों पर नकेल नहीं कसी तो जनांदोलन की संभावना है।

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मण्डला जिले में समस्याओं का भारी अंबार

मंडला। मप्र के आदिवासी बाहुल्य मण्डला जिले में समस्याओं का ग्राफ दिनोंदिन कम होने की जगह बढ़ता ही जा रहा है। ढेर सारी समस्याएं इस जिले में हैं, जिनका निराकरण क्यों नहीं किया जा रहा है यह शोध का विषय हो गया है। फर्जी तरीके से स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत ग्रामों को ओडीएफ किया गया है। भारी फर्जीवाड़ा होने के बाद भी इस मिशन के अंतर्गत कराये गये कार्यों की जाँच नहीं की जा रही है। शौचालय जो पहले बने थे वे बरबाद हो गये हैं, जिनकी मरम्मत नहीं की जा रही है। नये शौचालयों का निर्माण नही किया जा रहा है। सही तरीके से स्वच्छ भारत मिशन का क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। राष्ट्रीय शिशु ग्रह पालना केंद्र की कार्यकर्ताओं को वेतन व पोषण की राशि सरकार से अनुदान न मिलने से नहीं मिल पा रही है। कई वर्षों से सरकार इन केंद्रों को अनुदान नहीं दे रही है। साक्षर भारत मिशन के प्रेरकों को लंबित वेतन की राशि प्रदान नहीं की जा रही है। इन्हें नियमित भी नहीं किया जा रहा है। मिड डे मील के स्व-सहायता समूह को राशि का भुगतान करने में गड़बड़ी की जा रही है। नियमों को ताक में रखकर चल रहे स्टोन क्रेशरों को बंद नहीं किया जा रहा है। ओवर लोड खनिज सामग्री का परिवहन करने वाले डम्परों को बंद नहीं किया जा रहा है। सबसे बड़ी लूट खनिज सम्पदा की मण्डला जिले की तहसील नैनपुर के ग्रामों में किये जाने की चर्चा है। देवरी, परसवाड़ा, गजना, पाठा सिहोरा, चिचौली चरगांव, खुर्सीपार, बंजाराटोला, सुभरिया, सर्रा चौराहा सहित अनेक ग्रामों में चल रहे स्टोन क्रेशरों को बंद नहीं किया जा रहा है। इसी क्षेत्र में ओवरलोड डमपर चल रहे हैं। सूत्रों की माने तो प्रशासनिक सांठ-गांठ से स्टोन क्रेशर अवैध तरीके से चल रहे हैं। मण्डला जिले में रोजगार का टोटा बना हुआ है। अधूरे कामों को पूरा नहीं किया जा रहा है। पेयजल की समस्या आखिरकार नहीं सुलझाई जा रही है। सड़कों की हालात खस्ता हो गई है। बिजली का गुल होना बंद नहीं हो रहा है। ग्राम पंचायतों में मनमानी चरम पर पहुंच गई है जिसे नियंत्रित नहीं किया जा रहा है। उद्योग पर्यटन विकास में ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अवैध कारोबार बंद नहीं किये जा रहे हैं। सीएम हेल्पलाईन व जिला स्तरीय जनसुनवाई कार्यक्रम में की गई शिकायतों के निराकरण में भारी गोल माल किये जाने की चर्चा जोरों पर चल रही है। शिकायतकर्ता की संतुष्टि के बिना कई शिकायत बंद कराने का प्रयास किया जा रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, गंदगी, बीमारी, धांधली, निरक्षरता सहित जनहित के कई मुद्दों के बुरे हाल हैं। शासन प्रशासन को लगातार इस आशय की खबर प्रकाशित कर ध्यानाकर्षण कराया जा रहा है इसके बाद भी बहरा, गूंगा और अंधा प्रशासन के ऊपर कोई असर नहीं हो रहा है। जनापेक्षा है या तो समस्याओं का निराकरण कराया जाये या फिर प्रशासनिक परिवर्तन कर समस्याओं के निराकरण की कार्यवाही पूरी कराई जाए

 

 

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राजस्व की समस्या जस की तस

मंडला। मध्यप्रदेश के मंडला जिले में यूं तो कई तरह की समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। जिसे सुलझाया नहीं जा रहा है। सबसे ज्यादा समस्याएं राजस्व से संबंधित हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि कई किसानों को पात्र होने के बावजूद भी नहीं मिल पा रही है। राजस्व कार्यालयों में संपूर्ण मंडला जिले में प्रकरणों और आवेदन पत्रों के निराकरण में तेजी से कार्यवाही नहीें की जा रही है। ढेर सारे प्रकरण और आवेदन पत्र राजस्व कार्यालय में लंबित पड़े हुए हैं। राजस्व कार्यालयों में मनमानी चल रही है। लूट खसोट का कारोबार सरेआम किया जा रहा है। बिना दाम के कोई काम लगभग सभी राजस्व कार्यालयों में नही हो पा रहा है। जनापेक्षा है राजस्व की सभी समस्याओं का निराकरण किया जाये। राजस्व कार्यालय में लंबित समस्त प्रकरणों की निराकरण की पूर्ण की जाए व तेजी से सुनवाई की जाए।

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