चित्रकारों को सिखाई गई गोंडी पेंटिंग की विभिन्न शैलियाँ
रजा कला वीथिका में आयोजित की गई कार्यशाला
मंडला 18 दिसम्बर 2022
जिले में गोंडी पेंटिंग को बढ़ावा देने हेतु एवं अन्य चित्र कलाकारों को गोंडी चित्रकला के साथ जोड़ने के उद्देश्य से ज़िला प्रशासन द्वारा रजा कला वीथिका परिसर में कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को गोंडी कला की संस्कृति तथा गोंडी पेंटिंग की विभिन्न शैलियों के संबंध में जानकारी दी गई। कार्यशाला में एमजीएन फेलो कृति सिंघई, नाबार्ड, खादी ग्रामोद्योग और रेशम विभाग से अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यशाला में ग्रामीण विकास एवं महिला उत्थान संस्थान से रामकुमार सिंगोर द्वारा प्रतिभागियों को मंडला ज़िले के इतिहास एवं गोंडी कला की संस्कृति के बारे में परिचित करवाया गया। इसी क्रम में ज़िले के प्रसिद्ध गोंडी कलाकार उत्तम परतेति एवं अनूप परतेति द्वारा प्रतिभागियों को गोंडी कला की विभिन्न शैलियों के बारे में परिचित करवाया गया एवं गोंडी कला से जुड़ी हुई रीतियों एवं ट्राइबल कल्चर से जुड़ी हुई इस कला की बारीकियों के बारे में बताया गया। उत्तम परतेति द्वारा कला का एक नमूना बनाया गया और प्रतिभागियों को सुझाव दिया गया के वो विभिन्न शैलियों का उपयोग करें और फ्री हैंड से पेंटिंग बनाएँ, लेकिन उनकी पेंटिंग नमूने से अलग हो, ताकि वो अपने मन और अपनी रचनात्मकता के अनुसार इस कला को सीखें। इस कार्यशाला में लगभग 40 प्रतिभागी रहे, जिसमें स्कूल कॉलेज के बच्चे एवं बड़ों ने समान रूप से रुचि दिखाई। इस कार्यशाला में प्रतिभागियों द्वारा पोस्टकार्ड, ग्रीटिंग कार्ड, मटके, पेपर वेट आदि उत्पाद बनाए गए।

4 लाख की आर्थिक सहायता स्वीकृत
मंडला 18 दिसम्बर 2022
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पौड़ी निवासी काव्या की सर्पदंश से मृत्यु होने के कारण अनुविभागीय अधिकारी राजस्व निवास द्वारा मृतक के निकटतम वारसान आवेदक रमेश प्रसाद को कुल 4 लाख रूपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। यह राशि संबंधित के बैंक खाते में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।

शीत से बचाव के लिए एडवायजरी
मण्डला 18 दिसम्बर 2022
आमजनों को शीत से बचाने एडवाईजरी जारी की गई है। जारी एडवाईजरी में कहा गया है कि शीत ऋतु में वातावरण का तापमान अत्यधिक कम होने व शीतलहर के कारण मानव स्वास्थ्य पर अनेक विपरीत प्रभाव जैसे- सर्दी, जुकाम, बुखार, निमोनिया, त्वचा रोग, फेफड़ों में संक्रमण, हाईपोथर्मिया, अस्थमा, एलर्जी होने की आशंका बढ़ सकती है। यदि समय पर नियंत्रण न किया जाए तो व्यक्ति की मृत्यु भी हो जाती है।
शीत से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनें, घर में ठंडी हवा प्रवेश न हो इसलिए दरवाजे व खिड़की बंद रखें, सोते समय रजाई, कम्बल का उपयोग करें। फ्लू या बुखार, नाक बंद होने की स्थिति में घर से बाहर न निकलें, घर में रहें, आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय स्वास्थ्यकर्मी और चिकित्सक से परामर्श करें, गरम एवं ताजा भोजन, गर्म पानी का उपयोग करें, वृद्ध, बच्चे एवं गर्भवती माताओं का विशेष ध्यान रखें, लकड़ी का अलाव, सिगड़ी एवं रूम हीटर का उपयोग करें। शीतघात के दौरान यथासंभव घर के अंदर रहें और ठण्डी हवा बारिश बर्फ से संपर्क रोकने के लिये अनिवार्य होने पर ही यात्रा करें, शरीर को सूखा रखें, शरीर की गरमाहट बनाये रखने हेतु अपने सिर, गर्दन, कान, नाक को पर्याप्त रूप से ढकें, सूती एवं गर्म ऊनी कपड़े पहनें, शरीर की गर्मी बचाये रखने के लिए टोपी, मफलर तथा आवरण युक्त एवं जलरोधी जूतों का उपयोग करें, फेफड़ों में संक्रमण से बचाव हेतु मँुह एवं नाक ढक्कर रखें। स्वास्थ्यवर्धक गरम भोजन का सेवन करें, शीत प्रकृति के भोजन से दूर रहें। गरम तरल पदार्थ नियमित रूप से पीएं इससे ठण्ड से लड़ने के लिए शरीर की गर्मी बनी रहे। रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता में वृद्धि के लिए विटामिन सी से भरपूर ताजे फल व सब्जियाँ खाएं। तेल, क्रीम, जेली या बॉडी क्रीम से नियमित रूप से अपनी त्वचा का मसाज करें। बुजुर्ग, नवजात शिशु तथा बच्चों का यथासम्भव अधिक ध्यान रखें क्योकि उन पर शीतऋतु का प्रभाव अधिक होता है। बच्चों व बुजुर्गों को टोपी मफलर, स्वेटर व गर्म कपड़े पहनाकर गर्म रखें। कमरे को गर्म करने के लिए कोयले का प्रयोग न करें, अगर कोयले व लकड़ी जलाना आवश्यक है तो रोशनदान का प्रयोग करें, बंद कमरे में कोयले को जलाना खतरनाक हो सकता है क्योकि यह कार्बन मोनोऑक्साईड जैसी जहरीली गैस पैदा करती है जो किसी की जान भी ले सकती है। अधिक समय तक ठण्ड में न रहें, शराब न पिएं, यह शरीर की गरमाहट को कम करता है। यह खून की नसों को पतला कर देता है, विशेषकर हाथों से जिसमें हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ सकता है, शीत में छतिग्रस्त हिस्सों की मालिश न करें, अचेतन अवस्था में किसी व्यक्ति को तरल पदार्थ न दें, शीत लहर, हाइपोथर्मिया से प्रभावित व्यक्ति को तत्काल चिकित्सीय सहायता प्रदान कराएं।

