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सतगुरु बाबा ईश्वर शाह के मंडला आगमन पर भक्त हुए भावविभोर .शोभायात्रा सत्संग में पहुंचे श्रृद्धालु लगाए हरे माधव के जयघोष  

मण्डला। हरिराया सतगुरू सांई ईश्वरशाह साहिब का दो दिवसीय मंडला आगमन हुआ बुधवार को बाबा ईश्वर शाह मंडला पहुंचे जिनका कटरा बायपास में भव्य स्वागत किया गया। यहां पर हजारों की संख्या में धर्मप्रेमी पहुंचे जिन्होंने जयघोष लगाते हुए शोभायात्रा निकाली। बाबा ईश्वर शाह का नगर के अनेक स्थानों में पुष्पमाला से स्वागत किया गया। सामाजिक,धार्मिक संगठन के द्वारा फूल मालाओं से अभिनंदन हुआ। पड़ाव से हरे माधव सत्संग भवन सुभाष वार्ड झूलेलाल कॉलोनी तक भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। जिसमें युवाओं और बच्चों ने विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी खुशियों से सरोबार भक्ति आस्था गीतों पर मनमोहक प्रस्तुतियां हुईं और सतगुरु के आगमन पर खुशियां जाहिर की। भक्तगण हरे माधव हरे माधव के जय घोष लगाते रहे और भक्ति गीतों पर झूमते नजर आए।


हरे माधव सत्संग का हुआ आयोजन
संध्याकाल हरे माधव दिव्य सत्संग का आयोजन डिंडोरी मार्ग स्थित बंधन मैरिज  लॉन में हुआ जिसमें मंडला के अलावा अन्य शहरों से हजारों श्रृद्धालु सतगुरु जी का पावन पुनीत दर्शन, सत्संग वचन श्रवण करने पधारे। सत्संग की शुरुआत हरे माधव सद्ग्रंथ वाणी अरदास से हुई इसके पश्चात हरिराया सतगुरु का आगमन सत्संग पंडाल में हुआ,सतगुरु जी श्री आसन पर विराजमान हुए हरे माधव रूहानी बाल संस्कार के बच्चों ने श्री चरणों में भावपूर्ण वंदना की इसके उपरांत सत्संग वचन आरम्भ हुए सत्संग में हरे माधव सद्ग्रंथ वाणी-वचन आए। पूरा गुरु भाव भंजन हारा, पूरा सतगुरु प्रभु ज्यों न्यारा यानि पूरण हरिराया सतगुरु ही परब्रम्ह स्वरूप हैं इस संसार में भवसागर से उबारने में परम समरथ हैं जीव चाहे कितने ही तप साधन कर ले, मुक्ति की कुंजी तो केवल हरिराया सतगुरु के ही हाथ है। सत्संग में आई प्रेमी संगतों ने अपने अनुभव साझा किए कि हरिराया सतगुरु बाबा ईश्वरशाह साहिब जी की दया रहमत,अनंत उपकार,भक्ति द्वारा उनका जीवन जो पहले मुर्झाया सा था,वह अब खिल उठा है,उनके अनेक दुख सतगुरु कृपा से दूर हुए जीवन दान मिला। संगतों-शिष्यों पर प्रेमामय दृष्टि कर  निहाल करते रहे। प्रेम, भक्ति और उल्लास से सराबोर यह दृश्य अविस्मरणीय है।


माधव ब्रम्ह भोज का आयोजन
हरे माधव दिव्य सत्संग प्रवचन के आयोजन के उपरांत पावन दर्शन का सिलसिला चालू हुआ जिसमें कार्यक्रम में आए हजारों श्रद्धालुओं ने क्रमश: सतगुरु बाबा ईश्वर शाह के दर्शन किए, माथा टेका और आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात हरे माधव ब्रम्ह भोज का आयोजन किया गया जिसमें सभी शामिल जनों ने प्रसादी ग्रहण की।


पुलिस अधीक्षक ने लिया आर्शीवाद
गुरूवार को सतगुरु बाबा ईश्वर शाह के दर्शन के लिए पुलिस अधीक्षक उनके विश्राम स्थान पहुंचे जहां पर पुलिस अधीक्षक ने बाबा शाह का पुष्पमाला से स्वागत किया। यहां पर बाबा ईश्वर शाह ने कहा कि धर्म और समाज के लिए हमे हर स्थिति में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म से हमें अनेक सत्संग के मार्ग प्राप्त होते हैं इस दौरान बाबा शाह ने पुलिस अधीक्षक को शॉल पहनाया और फल देंकर आर्शीवाद दिया।


बाबा शाह ने दिया आर्शीवाद
गुरूवार को सतगुरू बाबा ईश्वर शाह के दर्शन के लिए नगर के सामाजिक लोग भी पहुंचे यहां पर समाजसेवी इन्द्रेश बब्बल खरया ने बाबा ईश्वर शाह पर लिखी कविता को पढ़ा और उन्हें भेंट की वहीं पत्रकार परिषद के जिला अध्यक्ष नीरज अग्रवाल ने उनका पुष्पमाला से स्वागत करते हुए उनका अभिवादन किया। इस दौरान ईश्वर बाबा शाह ने शॉल श्रीफल से आर्शीवाद दिया।


हरे माधव दरबार का भूमिपूजन
गुरुवार को सतगुरु बाबा ईश्वर शाह के द्वारा बिनैका रोड में निर्माण के लिए प्रस्तावित हरे माधव दरबार का भूमिपूजन किया गया। यहां पर हरे माधव परमार्थ सत्संग समिति का भवन निर्माण किया जाना है जिसका पुनीत शुभारंभ साईं जी के करकमलों के द्वारा किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में साध संगत मौजूद रही।


गुरु के प्रति अपार प्रेम और भक्ति
पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष एवं समाजसेवी गिरीश चंदानी एवं सुशील पमनानी ने बताया कि जिस दिन परम पूज्य सतगुरु बाबा ईश्वर शाह साहिब जी ने जन्म लिया उसी दिन से उनकी आँखों से अलौकिक तेज निकलता था और उनका चेहरा अलौकिक तेज से चमकता था। बचपन से ही उनमें अपने गुरु के प्रति अपार प्रेम और भक्ति थी और गुरु ने भी उसी तरह का प्रेम और भक्ति प्रकट की। प्रिय भक्तों महान आत्माओं का अवतार हमेशा असाधारण और पुण्यमय रहा है। वे एक प्रबुद्ध मन और मौन तप के साथ पैदा होते हैं । बचपन से ही परम पूज्य बाबाजी का झुकाव हमेशा अपने गुरु की ओर रहा और वे अपना अधिकांश समय शारीरिक दर्द की परवाह किए बिना उनकी सेवा में बिताते थे। परम पूज्य बाबाजी अक्सर अपने साथियों के साथ शांतिपूर्ण दुनिया में प्रवेश करने के लिए पहाडिय़ों और एकांत स्थानों पर जाते थे। फिर पेड़ के नीचे शरण लेते और ध्यान करते थे जबकि अन्य बच्चे खेलते या अपना भोजन करते थे। सभी आश्चर्यचकित थे और इतनी कम उम्र में परम गुरु के प्रति ऐसी अत्यधिक भक्ति देखकर एक अकथनीय आकर्षण महसूस कर रहे थे।

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