18 जून 2025, मंडला
मजबूत इच्छाषक्ति हो तो अपने जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है। इसी उक्ति को साकार कर रही स्व सहायता समूह की बहनों ने जिले में अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए है। इसी तरह का अनुकरणीय उदाहरण हैं बीजाडांडी गाँव की सुनीता झारिया। सुनीता दीदी मध्यप्रदेश दीनदयाल अंत्योदय योजना राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तेज सुर्या आजीविका स्व-सहायता समूह से जुड़कर आज एक आत्मनिर्भर महिला बन चुकी हैं। उनका जीवन उन सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है जो आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं। पहले सुनीता के परिवार का गुजारा मुख्य रूप से मजदूरी पर निर्भर था। जब मजदूरी नहीं मिलती थी, तो परिवार की आर्थिक स्थिति डगमगा जाती थी। सुनीता और उनके पति दोनों की सिलाई का काम शुरू करने की इच्छा थी, लेकिन पैसों की कमी के कारण यह एक अधूरा सपना सा लग रहा था।
सुनीता कहती हैं कि तेज सूर्या आजीविका स्व-सहायता समूह में सदस्य के रूप में जुड़कर बचत करना शुरू किया। शुरुआती दौर में मुझे छोटी-छोटी जरूरतों के लिए समूह से मदद मिली। फिर एक दिन समूह की बैठक में सिलाई के प्रषिक्षण के विषय में जानकारी मिली। निःषुल्क प्रषिक्षण करने के बाद समूह से ही सुनीता को सिलाई का व्यवसाय शुरू करने के लिए 35,000 रुपये की ऋण राशि ली। इस आर्थिक मदद ने सुनीता और उनके पति को हिम्मत दी। उन्होंने इस पैसे से सिलाई मशीन और अन्य जरूरी सामान खरीदा और अपना सिलाई का काम शुरू कर दिया। शुरूआती कुछ महीनों के संघर्ष के बाद सिलाई की दुकान अच्छी चल निकली, दुकान में सिलाई का पर्याप्त काम आने लगा।
सुनीता बताती है कि अब हर महीने 15,000 से 18,000 रुपये की आमदनी प्राप्त कर रही हैं। मजदूरी पर निर्भरता खत्म हो गई है और उनका परिवार अब आर्थिक रूप से सक्षम हो गया है। सुनीता की यह सफलता न केवल उन्हें आत्मनिर्भर बनाती है, बल्कि उनके गाँव की अन्य महिलाओं के लिए भी एक प्रेरणास्त्रोत बन गई है, जो उन्हें भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करती है।
