मंडला 21 जुलाई 2025
कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा ने टीएल बैठक के उपरांत दस्तक चरण 22 जुलाई से 16 सितम्बर 2025 के बीच होने वाले कार्यक्रम के बारे में विस्तार से चर्चा कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
जिला टीकाकरण अधिकारी के द्वारा विस्तृत जानकारी दी गई कि दस्तक चरण के दौरान समस्त 0 माह से 5 वर्ष के सभी बच्चों की जांच किया जाना है जिसका मुख्य उद्देश्य है बाल एवं शिशु मृत्युदर में कमी लाना एवं बाल्यकालीन बीमारियों की रोकथाम करना। इस दौरान समस्त आंगनबाड़ी केन्द्रों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता एवं एएनएम के द्वारा जांच की जायेगी। बीमार गंभीर कुपोषित बच्चे, गंभीर एनीमिया के बच्चे, निर्जलीकरण वाले प्रकरण, गंभीर निमोनिया एवं अन्य खतरे के चिन्हित बच्चे की जांच एवं समुचित उपचार किया जायेगा।

एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम अंतर्गत समस्त आंगनबाड़ी केन्द्रों में 6 माह से 59 माह के समस्त बच्चे को प्रति मंगलवार एवं शुक्रवार को आईएफए सायरप पिलाना जिसमें से 6 माह से 3 वर्ष के बच्चो को घर-घर जाकर कार्यकर्ता के द्वारा नामवार आईएफए सायरप बोटल देना। समस्त प्राइवेट एवं शासकीय स्कूलों में आईएफए गोली का सेवन समस्त शिक्षकों के द्वारा प्रति मंगलवार को बच्चों को खाना के बाद खिलाना सुनिश्चित करें तथा साथ में विटामिन सी एवं आयरन युक्त खाद्य पदार्थ लेने की सलाह दी देवें।

महिला बाल विकास विभाग के द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्रों एवं शिक्षा विभाग के द्वारा स्कूलों में समय-समय पर जाकर मूल्यांकन करना। दस्तक दल के द्वारा प्रत्येक व्ही.एच.एन.डी. दिवस में दस्तक दल जिसमें एएनएम, आंगनबाड़ी एवं आशा कार्यकर्ता, सीएचओ के मार्गदर्शन में सेवायें प्रदान की जावेगी। 5 वर्ष से कम उम्र के गंभीर कुपोषित बच्चों की सकिय पहचान रेफरल एवं प्रबंधन। एचबीएनसी एवं एचबीवाईसी की तर्ज पर उच्च जोखिम वाले नवजात एवं शिशुओं का चिन्हांकन एवं रेफरल। 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों में डिजिटल हेमोग्लोबियोमीटर द्वारा एनीमिया की जांच सक्रिय तथा प्रोटोकॉल आधारित प्रबंधन। 9 माह से 5 वर्ष तक समस्त बच्चों को आयु अनुरूप विटामिन ए अनुपूरण। 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में शैशव एवं बाल्यकालीन निमोनिया एवं डायरिया की त्वरित पहचान, प्रबंधन एवं रेफरल। 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में बाल्यकालीन दस्त रोग नियंत्रण हेतु समस्त बच्चे को ओ.आर.एस. एवं जिंक टेबलेट की को-पेकिंग प्रदायगी तथा इसके उपयोग हेतु सामुदायिक जागरूकता में बढ़ावा करना। समुदाय को समुचित शिशु एवं बाल आहारपूर्ति संबंधी समझाईश देना।

