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20 अगस्त को मनाया जायेगा ’विश्व मच्छर दिवस’  

मंडला 19 अगस्त 2025

जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक वर्ष 20 अगस्त को वल्ड मॉस्किटो डे मनाया जाता है। मानसून की शरुआत होते ही मच्छरों की संख्या एवं घनत्व में भी वृद्धि होने लगती है। इसमें आवश्यक है कि हम को लेकर जागरुक रहें। इन बीमारियों में मलेरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया शामिल है। बारिश समाप्ति तक इन बीमारियों के बढ़ने के ज्यादा आसार होते हैं।

मलेरिया, मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है, जो कि मलेरिया परजीवी के कारण होता है। मलेरिया परजीवी भारत में मुख्यतः दो प्रकार के पाये जाते हैं। प्लाज्मोडियम वाइवेक्स एवं प्लाज्मोडियम फैल्सी फेरम, जिसे मस्तिष्क ज्वर मलेरिया परजीवी के नाम से भी जाना जाता है, जो सर्वाधिक खतरनाक होता है। मादा एनाफिलीज को नाइट बायटिंग मच्छर भी कहा जाता है जो सामान्यतः शाम एवं भोर बेला के बीच काटता है। यह मच्छर रुके हुए साफ पानी में अंडे देता है। अंडे से मच्छर 9 से 11 दिन में बन जाता है। शरीर में कपकपी के साथ तेज बुखार, सिर दर्द, उल्टी होना, बेचेनी, कमजोरी, सुस्ती, रुक-रुककर बुखार आना, पसीना आकर बुखार उतरना, ठंड गर्मी या तपन का महसूस होना आदि मलेरिया के लक्षण हैं।

बुखार आने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में खून की जांच कराएं एवं मलेरिया की पुष्टि होने पर पूर्ण उपचार लें। खाली पेट दवा का सेवन कदापि नहीं करना चाहिये। मलेरिया की जांच व उपचार सभी शासकीय अस्पतालों पर निःशुल्क उपलब्ध है।

एजीड एजिप्टाई मच्छर डेंगू, चिकुनगुनिया, जीका बीमारी का वाहक होता है। यह मच्छर काले रंग का होने के साथ शरीर पर धारी लिए हुए होने के कारण आसानी से पहचाना जा सकता है, जिसका जीवनकाल 3 सप्ताह का होता है। यह मच्छर घर के अंदर एवं घर के बाहर अँधेरे एवं नमीयुक्त जगह, बर्तन पर घरों में अलमारी में जहां कपड़े लटकते रहते हैं, पर्दों के आस-पास, फर्नीचर के नीचे लटकते हुए वायर, रस्सी, छाते आदि पर छिपकर बैठते हैं। यह मच्छर साफ व रुके हुए पानी जैसे अंडरग्राउन्ड टैंक, बैरल, टायर, सीमेन्ट की टंकिया, खुले मटके, बाल्टियाँ, कूलर, छत पर भरा हुआ पानी, पानी से बचाव हेतु लगाए गए पॉलीथीन में भरा हुआ पानी आदि में पैदा होते हैं। डेंगू के लक्षण 2-7 दिन तक बुखार, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द जोड़ों में दर्द, आँख के पीछे दर्द, खसरा जैसे लाल चकत्ते-छाती एवं हाथों पर डेंगू के लक्षण हैं।

डेंगू के लक्षण होने पर शासकीय जिला चिकित्सालय अथवा मेडिकल में खून की जांच कराएं। डेंगू की पुष्टि होने पर चिकित्सक के परामर्श अनुसार पूर्ण उपचार लेना चाहिए। रोगी को पर्याप्त मात्रा में पेय पदार्थ जैसे- फलों का रस, पानी, ओ.आर.एस. लेना चाहिए एवं आराम करना चाहिए। किसी भी दर्द निवारक गोली का सेवन नहीं करना चाहिए।

मच्छरों की उत्पत्ति को रोकने के लिए भरे हुए पानी को हर 3-4 दिन में बदलना चाहिए। पानी संग्रहण करने वाली टंकी, बाल्टी एवं अन्य पानी से भरे हुए बर्तन को ढक्कर रखना चाहिए। वॉशबेसिन, बाथरुम में पानी निकासी के स्थान में मच्छररोधी जाली लगवाना चाहिए एवं मच्छर की उत्पत्ति स्थल पर मिट्टी का तेल या जला हुआ ऑइल डालना चाहिए। यह आवश्यक है कि घरों के आस-पास सफाई रखें, अनावश्यक पानी जमा न होने दें। सोने के लिए हम मच्छरदानी का उपयोग करें, घरों में मच्छर निरोधक जालियों, मच्छर निरोधी कीम, कॉइल का उपयोग करें। अपने घरों में मच्छर निरोधक पौधे जैसे- लेमनग्रास, लहसुन, लेवेंडर, गेंदा, तुलसी, सिट्रोनेला इत्यादि लगाएं।

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