मंडला, 19 जनवरी 2026
किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना अब ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक बदलाव की मजबूत मिसाल बनती जा रही है। कृषि के साथ पशुपालन को आय का स्थायी साधन बनाने वाली इस योजना ने मंडला जिले के एक किसान को नई पहचान और सम्मान दिलाया है। मंडला विकासखंड के ग्राम ग्वारा निवासी श्री चैनसिंह भांडे की कहानी आज उन सभी किसानों के लिए प्रेरणा है, जो खेती के साथ अतिरिक्त आय का मजबूत विकल्प तलाश रहे हैं।

खेती के साथ पशुपालन का लिया संकल्प
श्री चैनसिंह भांडे लंबे समय से खेती पर निर्भर थे, लेकिन मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती लागत और सीमित आमदनी जैसी चुनौतियों के बीच उन्होंने यह तय किया कि अब आय बढ़ाने के लिए एक भरोसेमंद विकल्प अपनाना होगा। यहीं से उन्होंने डेयरी व्यवसाय को चुना। यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन सही मार्गदर्शन और सरकार की सहायता ने उनके सपने को नई दिशा दे दी।

श्री भांडे बताते हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के अंतर्गत कुल 2.95 लाख रुपये की लागत का स्वीकृति लाभ मिला। 13 सितंबर 2025 को योजना के तहत उन्हें दो भैंसें प्रदाय की गईं। भैंसें मिलने के बाद श्री भांडे ने पूरे आत्मविश्वास के साथ डेयरी पालन का कार्य शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उन्होंने पशुओं की देखभाल, चारा प्रबंधन और दूध बिक्री की व्यवस्था को व्यवस्थित किया और कुछ ही समय में उनका डेयरी कार्य स्थिर कमाई का साधन बन गया।

हर महीने हो रही 13 से 14 हजार रुपये की कमाई
आज श्री भांडे इस योजना के माध्यम से प्रतिमाह 13 हजार से 14 हजार रुपये तक की नियमित आय अर्जित कर रहे हैं। यह आमदनी उनके परिवार के लिए केवल पैसे नहीं, बल्कि नई उम्मीद और नई शुरुआत बन गई है। घर की जरूरतें पहले से बेहतर तरीके से पूरी हो रही हैं, बच्चों की पढ़ाई में सहयोग मिल रहा है, परिवार की आर्थिक स्थिति में स्थायी सुधार आया है।
आज वे अपने गांव में एक सफल डेयरी किसान के रूप में पहचाने जा रहे हैं। उनकी सफलता से गांव के अन्य लोग भी प्रेरित हो रहे हैं और कई किसान अब पशुपालन की ओर कदम बढ़ाने लगे हैं। श्री भांडे ने इस बदलाव के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह योजना उनके लिए वरदान साबित हुई है और इससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला।

