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पोषण पुनर्वास केन्द्र में 20 दिन की देखभाल से कुपोषित शिशु दयानंद को मिली नई जिंदगी

मंडला, 18 मार्च 2026

जिला चिकित्सालय मंडला स्थित पोषण पुनर्वास केन्द्र में 20 दिनों की विशेष देखरेख और उपचार के बाद गंभीर कुपोषण से जूझ रहे 4 माह के शिशु दयानंद मार्को के चेहरे पर फिर से मुस्कान लौट आई। यह मामला स्वास्थ्य विभाग की सफल पहल का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.जे. मोहंती ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्राम बिजोरा, तहसील घुघरी निवासी दयानंद को 26 फरवरी को गंभीर हालत में जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। प्रारंभिक जांच में शिशु लंबे समय से सर्दी, खांसी, बुखार और निमोनिया से पीड़ित पाया गया। गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे पी.आई.सी.यू. में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। जांच के दौरान बच्चे में खून की कमी भी पाई गई, जिसके चलते उसे रक्त चढ़ाया गया और लगातार निगरानी में रखा गया। तीन दिन बाद स्थिति में सुधार होने पर शिशु को पोषण पुनर्वास केन्द्र में स्थानांतरित किया गया। उस समय उसका वजन मात्र 1.600 किलोग्राम और लंबाई 44 सेंटीमीटर थी, जो अति कुपोषण की श्रेणी में आता था।

एनआरसी प्रभारी डॉ. कमलेश ठाकुर (शिशु रोग विशेषज्ञ) की निगरानी में गाइडलाइन के अनुसार उपचार किया गया। साथ ही मां को सही तरीके से स्तनपान कराने, कंगारू मदर केयर के माध्यम से बच्चे को गर्म रखने और पोषण संबंधी देखभाल के बारे में प्रशिक्षित किया गया। फीडिंग डेमोंस्ट्रेटर रश्मि वर्मा द्वारा भी मां को विस्तृत जानकारी दी गई। लगातार देखभाल और उपचार के परिणामस्वरूप 20 दिनों में बच्चे का वजन बढ़कर 2.200 किलोग्राम हो गया और वह पूरी तरह स्वस्थ होकर स्तनपान करने लगा। इसके बाद सिविल सर्जन डॉ. विजय धुर्वे के मार्गदर्शन में शिशु को सफलतापूर्वक डिस्चार्ज किया गया। इस दौरान नर्सिंग स्टाफ इंदु जंघेला, रोशनी मेरावी, प्रियंका पटेल, शिल्पा पटेल, दुर्गा जंघेला एवं प्रियंका चौरे सहित सपोर्ट स्टाफ ने भी मां और शिशु की निरंतर देखभाल की तथा घर पर शिशु की देखभाल, स्तनपान, संक्रमण से बचाव और नियमित टीकाकरण के संबंध में परामर्श दिया।

मां रमली मार्को ने बताया कि पोषण पुनर्वास केन्द्र में मिली देखभाल से उनके बच्चे के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ है। उन्होंने शासन-प्रशासन एवं अस्पताल की पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। यह सफलता कहानी दर्शाती है कि समय पर उपचार और सही पोषण से गंभीर कुपोषण से जूझ रहे बच्चों को भी नई जिंदगी दी जा सकती है।

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