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ससम्मान सेवा का अनुकरणीय उदाहरण नगरवासियों की सेवा से अभिभूत हुये उत्तरवाहिनी नर्मदा परिक्रमावासी व्यास नारायण मंदिर में संपन्न हुई उत्तरवाहिनी परिक्रमा

मण्डला। 28 मार्च की शाम जब परिक्रमा घाघा ग्राम पहुंची जहां रात्रि विश्राम की व्यवस्था की गई थी इस परिसर में शाम के समय परिक्रमावासियों ने थोड़ा विश्राम किया और अपनी थकान कम की इसके बाद संध्या आरती प्रारंभ हुई। माँ नर्मदा की झांकी के समक्ष हजारों की संख्या में उत्तरवाहिनी नर्मदा परिक्रमावासियों ने संगीतमय अारती की आरती के दौरान माँ रेवा की भक्ित में जमकर झूमे और आरती की। आरती के दौरान जहां नन्हीं बालिका भी माँ रेवा की आरती उतार रही थी तो वहीं 98 वर्ष की बुजुर्ग महिला भी पूरे उल्लास के साथ माँ रेवा की आरती कर रही थी यह दृश्य कभी न भूलने वाला दृश्य रहा आरती उपरांत प्रसादी वितरण हुई और फिर रात्रि का भाेजन परिक्रमावासियों ने ग्रहण किया।
भोजन के पूर्व ही संध्या के समय मण्डला से लगभग 22 किलोमीटर चलकर यहां के नगरवासी परिक्रमावासियों की सेवा में कोई शीतल पेय लेकर पहुंचा तो कोई मठा लेकर आया। कोई कोई नर्मदा भक्त मण्डला से चाय बनवाकर घाघा ग्राम परिक्रमावासियों की सेवा में पहुंचे बुधवारी निवासी कमलेश सोनी एवं उनके मित्रगणों ने लगातार परिक्रमावासियों के लिये शीतल जल का प्रबंध किया। शाम से लेकर देर रात्रि तक नगरवासियों द्वारा सेवा का सिलसिला जारी रहा कोई लड‍्डू लेकर पहुंच रहा था तो कोई कोल्डि्रंग्स।

29 मार्च को सुबह 03 बजे से ही परिक्रमावासी स्नान पूजन कर तट पार करने लगे इसके पीछे पिछले वर्ष का जो डर था वह काम कर रहा था चूंकि पिछले वर्ष एक ही नाव थी और परिक्रमावासी हजारों की संख्या में थे लिहाजा तट पार करने में 4 से 5 घंटे का समय लगा था और इसी डर से परिक्रमावासी सुबह से ही तट पार करने में लग गये। देखते ही देखते सुबह 5 से  6 बजे तक सभी परिक्रमावासी तट पार कर बबैहा तट पर आ चुके थे।
इस तट पर नर्मदा जी के किनारे ही मधुरम स्वीट‍्स और उनके सहयोगी भाईयों के द्वारा परिक्रमावासियों के लिये बाल भोग की शानदार व्यवस्था की गई थी तट पर ही गरम-गरम पोहा, जलेबी, साबूदाना के बरे, ढोकले, तले हुये चने, मीठा, फलाहारी चिप्स सहित बहुत लजीज व्यंजन परिक्रमावासियों को पेश किये गये। मधुरम स्वीट‍्स का पूरा परिवार यहां परिक्रमावासियों की सेवा में लगा हुआ था उनके साथ एडव्हाेकेट अनिल बड़ोनिया अपने भाई वीरू बड़ोनिया एवं परिवार के साथ सेवा में थे।
मण्डला में साइकिल ग्रुप है उसके भी तमाम कार्यकर्ता दिनेश दुबे एवं हेमन्त खरे के साथ व्यवस्थाओं में लगे हुये थे इन्होंने तट पार करने मे ंन केवल परिक्रमावासियों की मदद की बल्िक कच्चे रास्ते से सड़क इन्हंे सुरक्षित पहुंचाया भी।
बबैहा परिक्रमावासी आगे के लिये रवाना हुये तो बबैहा ग्राम से ही सड़क किनारे स्थानीय लोगों ने खड़े होकर न केवल परिक्रमावासियों का स्वागत किया बल्िक उनके लिये पानी से लेकर फल-फूल एवं अन्य खाद्य पदार्थ उनकी सेवा प्रस्तुत किये यहां से रूकते बैठते परिक्रमावासी धीरे-धीरे दोपहर लगभग 12 बजे राजपूत मैरिज लॉन पहुंचे जहां पर दोपहर के भोजन की व्यवस्था थी।

बबैहा से लेकर मण्डला तक लगातार गणेश बरमैया जी के द्वारा श्ाीतल जल परिक्रमावासियों को उपलब्ध कराया जाता रहा शीतल पेय को लेकर कमलेश सोनी एवं उनके मित्रगण विभिन्न वाहनों के माध्यम से पूरे परिक्रमा पथ पर परिक्रमावासियों की सेवा में लगे रहे।
जमकर हुआ भजन कीर्तन
राजपूत मैरिज लॉन में जब परिक्रमावासी पहुंचे तो यहां पर राजपूत मैरिज लॉन और राजपूत ढाबा के संचालक राजू भाई एवं उनका पूरा परिवार परिक्रमावासियों की सेवा में तत्पर रहा उन्होंने पूरी हॉटल के सभी कमरे एवं हॉल परिक्रमावासियों के लिये खोल रखे थे जहां पहुंचकर परिक्रमावासियों ने पहले तो हाथ मुंह धोकर विश्राम किया और फिर हाॅल पर ही माँ नर्मदा की भव्य आरती की गई और उसके बाद भोजन प्रारंभ हुआ भोजन एवं फलाहार की व्यवस्था ग्यारस व्रत के चलते की गई थी जिनका व्रत था उन्होंने फल एवं फलाहर व्यंजन का सेवन किया और लॉन पर एवं हॉटल के अंदर विश्राम किया।
भोजन के बाद महिला मण्डली के द्वारा जब भजन प्रारंभ किये गये तो सभी भक्तों के साथ राजपूत परिवार भी भक्ति में लीन हो नृत्य करता रहा। यह दृश्य सभी के लिये अत्यंत ही प्रेरणादायी रहा।

लगभग 3 बजे भोजन एवं विश्राम के उपरांत यहां से परिक्रमा यात्रा आगे के लिये रवाना हुई शुभा मोटर्स के संचालक तिवारी परिवार के द्वारा परिक्रमावासियों की सेवा शीतल पेय से की गई सुबह 6 बजे से ही यह सेवा प्रारंभ थी परिक्रमावासियों को कहीं नीबू का शरबद तो कहीं जीरा जल इनके द्वारा भेंट किया जाता रहा इसके आगे भी यही सिलसिला जारी रहा। रिलायंस पेट्रोल पम्प के पास नट‍्टू चौरसिया के द्वारा गन्ने का रस उपलब्ध कराया गया इसी तरह बुधवारी सोनी परिवार के माध्यम से  छांछ, शीतल पेय आदि की व्यवस्था 2 से 3 स्थानों पर की गई शाम लगभग 5 बजे परिक्रमा यात्रा व्यास नारायण मंदिर पहुंची यहां आरती उपरांत जल अर्पण कर भक्तों ने अपनी परिक्रमा पूर्ण की।

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