मंडला, 11 जून 2026
जिला योजना भवन में स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक में कलेक्टर श्री राहुल नामदेव धोटे ने गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच, पोषण प्रबंधन एवं कुपोषित बच्चों के उपचार संबंधी व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले की प्रत्येक गर्भवती महिला की प्रथम तीन एएनसी (एंटीनेटल चेकअप) जांच शत-प्रतिशत सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य अत्यंत संवेदनशील विषय है तथा इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
कलेक्टर श्री धोटे ने कहा कि जिले में मातृ मृत्यु दर चिंता का विषय है। इसे कम करने के लिए स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग को समन्वित रूप से कार्य करना होगा तथा गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषण परामर्श और जोखिम वाले मामलों की सतत निगरानी सुनिश्चित करनी होगी।
घुघरी की प्रगति पर नाराजगी, कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश
विकासखंडवार एएनसी जांच की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने पाया कि जिले का औसत प्रदर्शन 81 प्रतिशत है, जबकि घुघरी विकासखंड में यह मात्र 64 प्रतिशत है। इस कम प्रगति पर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए घुघरी की परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विकासखंड निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए गंभीरता से कार्य करें।
अंडरवेट एवं एनीमिक गर्भवती महिलाओं पर विशेष निगरानी

बैठक में द्वितीय एएनसी जाँच के दौरान कम वजन वाली गर्भवती महिलाओं की स्थिति की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि उनके लिए विशेष पोषण परामर्श अभियान चलाया जाए। पोषण संबंधी जानकारी वाले पंपलेट तैयार कर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सुपरवाइजर प्रत्येक अंडरवेट महिला से व्यक्तिगत संपर्क करें। उन्होंने सीडीपीओ को भी फील्ड भ्रमण के दौरान ऐसी महिलाओं से सीधे संवाद कर पोषण संबंधी सलाह देने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि जिन गर्भवती महिलाओं का हीमोग्लोबिन निर्धारित मानक से कम पाया है, उनका नियमित फॉलोअप किया जाए तथा आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
एसएएम एवं एमएएम बच्चों की एनआरसी में अनिवार्य भर्ती
गंभीर एवं मध्यम कुपोषित (एसएएम एवं एमएएम) बच्चों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर श्री धोटे ने निर्देश दिए कि भूख परीक्षण में असफल पाए जाने वाले प्रत्येक बच्चे को अनिवार्य रूप से पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जाए। उन्होंने कहा कि एनआरसी के लिए रेफर किए गए सभी बच्चों का समय पर भर्ती होना सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें आवश्यक उपचार एवं पोषण सहायता मिल सके। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि बीएमओ एवं सीडीपीओ स्तर पर प्रत्येक सप्ताह संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की जाए तथा सभी आवश्यक जानकारियां एवं प्रगति विवरण समय पर पोर्टल पर दर्ज किए जाएं।
बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.जे. मोहंती, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्रीमती शालिनी तिवारी, सिविल सर्जन डॉ. विजय धुर्वे, सहायक संचालक महिला एवं बाल विकास श्री रोहित बड़कुल, डीपीएम एनएचएम श्री शैलेंद्र सिंह सहित स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
