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समान नागरिक संहिता पर मंथन, आमजन से लिए गए सुझाव यूसीसी का उद्देश्य प्रदेश के नागरिकों को समान अधिकार दिलाना है – बुधपाल सिंह

मंडला, 16 जून 2026

मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में राज्य शासन द्वारा शुरू की गई प्रक्रिया के तहत मंगलवार 16 जून को पीएम श्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस बड़ी खैरी के सभागार में उच्च स्तरीय समिति की ओर से महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में यूसीसी के संबंध में अध्ययन एवं परीक्षण के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के सदस्य श्री बुधपाल सिंह ने संहिता के प्रावधानों के विषय में विस्तार से जानकारी दी और विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से सुझाव एवं विचार प्राप्त किए।

बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री संजय कुशराम, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष श्री विनोद कछवाहा, मंडला जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री संतोष सोनू भलावी, पूर्व विधायक श्री अशोक मर्सकोले, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती राधा गुप्ता, कलेक्टर श्री राहुल नामदेव धोटे, पुलिस अधीक्षक श्री राजेश रघुवंशी, अपर कलेक्टर श्री राजेंद्र कुमार सिंह, सीईओ जिला पंचायत श्री शाश्वत सिंह मीना, संयुक्त कलेक्टर श्री हुनेन्द्र घोरमारे, डिप्टी कलेक्टर श्री संस्कार बावरिया सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, अधिवक्ता, धार्मिक, सामाजिक एवं स्वयंसेवी संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक को संबोधित करते हुए समिति सदस्य श्री बुधपाल सिंह ने कहा कि समान नागरिक संहिता का प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद-44 में किया गया है, जिसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समानता, न्याय और कल्याण सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि गोवा में आजादी के पहले से ही समान नागरिक संहिता लागू है और गोवा के 1961 में भारत में विलय के बाद भी यह व्यवस्था जारी रखी गई। वर्तमान में उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसे राज्यों में भी यूसीसी लागू है तथा मध्यप्रदेश इसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और इसे लागू करने वाला चौथा राज्य होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित व्यवस्था में जनजातीय समुदाय की परंपराओं को देखते हुए, अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।

श्री बुधपाल सिंह ने कहा कि वर्तमान में विवाह, विवाह विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण एवं लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषय विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के अंतर्गत आते हैं। यूसीसी का उद्देश्य इन विषयों पर सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करना है, जिससे महिला और पुरुष दोनों को समान अधिकार प्राप्त हो सकें। उन्होंने कहा कि लोगों को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि यूसीसी लागू होने से उनकी धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित होगी। यह कानून किसी भी धर्म की पूजा-पद्धति या धार्मिक गतिविधियों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाता है। इसका मुख्य उद्देश्य सभी जाति और धर्म के लोगों को समान अधिकार उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि यूसीसी लागू होने पर विवाह पंजीयन अनिवार्य होगा, बेटी और बेटे को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा, गोद लेने की प्रक्रिया धर्मनिरपेक्ष होगी, लिव-इन रिलेशनशिप के लिए अलग प्रावधान बनाए जाएंगे तथा बहुविवाह पर रोक लगेगी, जिससे महिलाओं को और अधिक सुरक्षा मिलेगी।

बैठक में उपस्थित नागरिकों एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने विवाह एवं विवाह विच्छेद के लिए सभी नागरिकों के लिए समान कानून बनाए जाने, महिलाओं के उत्तराधिकार संबंधी अधिकारों में समानता सुनिश्चित करने तथा लिव-इन रिलेशनशिप से जन्में बच्चों के अधिकारों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही धर्मांतरित जनजातीय समुदाय के लोगों के लिए प्रावधानों में व्यवस्था की स्पष्टता पर जोर दिया। वहीं लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण पर भी स्वतंत्र विचार रखे गए। इसके अलावा विवाह पंजीयन को अनिवार्य बनाने, बेटा-बेटी को समान संपत्ति अधिकार प्रदान करने तथा अनुच्छेद-44 एवं यूसीसी के संबंध में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के सुझाव भी दिए गए।

बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री संजय कुशराम, पूर्व विधायक डॉ. अशोक मर्सकोले, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती राधा गुप्ता, सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती मंजु कछवाहा, पूज्य सिंधी पंचायत अध्यक्ष श्री पारस असरानी, वरिष्ठ पत्रकार श्री चंद्रेश खरे, सामाजिक कार्यकर्ता श्री विनय मिश्रा, श्री रामकुमार हरदहा, जनाब उस्मान, सब इंजीनियर सुश्री रमा सहित अन्य गणमान्य नागरिकों तथा महिलाओं ने अपने विचार समिति के सामने रखे।

समिति सदस्य श्री बुधपाल सिंह ने बताया कि जो लोग बैठक में अपने सुझाव प्रस्तुत नहीं कर सके हैं, वे ucc.mp.gov.in पोर्टल के माध्यम से अपने सुझाव दर्ज करा सकते हैं। प्राप्त सुझावों के आधार पर यूसीसी का प्रारूप तैयार किया जाएगा, जिसे विधि विभाग की सहमति के बाद विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों के विचारों को समाहित करते हुए आगे की प्रक्रिया संचालित की जाएगी।

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