छह दिनों तक स्वास्थ्य, आहार, विश्राम और व्यवहारिक गतिविधियों के माध्यम से होगी हाथियों की विशेष देखभाल
मंडला, 15 सितंबर 2026।
वन एवं वन्यजीव संरक्षण के कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले विभागीय हाथियों की देखभाल और उनके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाए रखने की दिशा में कान्हा टाइगर रिजर्व द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में हाथी पुनर्यौवन (रिजुविनेशन) शिविर का आज परिक्षेत्र सुपखार में शुभारंभ किया गया। यह विशेष शिविर 15 से 20 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।
शिविर का शुभारंभ श्री रविन्द्र मनी त्रिपाठी, क्षेत्र संचालक, कान्हा टाइगर रिजर्व द्वारा किया गया। इस अवसर पर श्री आलोक यादव, कमांडेंट, सीआरपीएफ मंडला, श्री प्रकाश कुमार वर्मा, उप संचालक तथा श्री विनोद जाखड़, संभागीय प्रबंधक, मोहगांव प्रोजेक्ट सहित समस्त सहायक संचालक, वरिष्ठ वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी, परिक्षेत्र अधिकारी एवं अधीनस्थ वन अमला उपस्थित रहा।
वन संरक्षण के साथ हाथियों के कल्याण पर भी विशेष ध्यान
कान्हा टाइगर रिजर्व में वर्तमान में 16 विभागीय हाथी हैं। इनमें 9 नर, 6 मादा तथा एक नवजात हाथी शावक शामिल है। ये हाथी वर्षभर वन विभाग के साथ वन्यजीव संरक्षण, गश्ती, वन्यजीव अनुश्रवण एवं ट्रांसलोकेशन जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यों में सहयोग करते हैं। मानसून के दौरान कठिन परिस्थितियों में गश्ती एवं वन्यजीव संरक्षण संबंधी कार्यों में भी इनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।
नियमित रूप से जिम्मेदारियां निभाने वाले इन हाथियों को कुछ समय के लिए कार्य से अलग रखते हुए उनके स्वास्थ्य एवं कल्याण पर केंद्रित यह शिविर आयोजित किया गया है। शिविर में उन्हें पर्याप्त विश्राम, विशेष आहार और समूह में रहने तथा स्वाभाविक व्यवहार प्रदर्शित करने के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा।
स्वास्थ्य परीक्षण से लेकर विशेष आहार तक
पुनर्यौवन शिविर के दौरान प्रत्येक हाथी की स्वास्थ्य स्थिति का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा। वरिष्ठ वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी एवं चिकित्सकीय दल द्वारा आवश्यक स्वास्थ्य जांच के साथ रक्त, मल एवं मूत्र के नमूने लिए जाएंगे, जिन्हें आवश्यक परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। हाथियों का शारीरिक माप भी निर्धारित प्रपत्र में दर्ज किया जाएगा।
हाथियों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप विशेष एवं पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही शरीर एवं पैरों की मालिश, स्नान तथा दैनिक देखभाल की गतिविधियों के माध्यम से उन्हें आराम एवं शारीरिक स्फूर्ति प्रदान की जाएगी।
समूह में समय बिताने और खेल गतिविधियों के अवसर
शिविर के दौरान हाथियों को एक साथ रहने और भोजन करने का अवसर दिया जाएगा। दोपहर के समय महावत एवं चाराकटरों के साथ परिचयात्मक एवं खेल गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इस प्रकार की गतिविधियां हाथियों के सामाजिक व्यवहार को बनाए रखने और उन्हें मानसिक रूप से सक्रिय एवं सहज रखने में सहायक होंगी।
प्रतिदिन प्रातः हाथियों को जंगल से शिविर स्थल पर लाया जाएगा, जहां उन्हें स्नान कराने के साथ शरीर एवं पैरों की मालिश और अन्य आवश्यक देखभाल की जाएगी। दिनभर की गतिविधियों के बाद शाम को भोजन कराकर उन्हें पुनः जंगल में छोड़ा जाएगा।
महावत एवं चाराकटरों के प्रशिक्षण पर भी जोर
शिविर केवल हाथियों की देखभाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके साथ प्रतिदिन कार्य करने वाले महावत एवं चाराकटरों की दक्षता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
वरिष्ठ महावतों द्वारा हाथियों के व्यवहार को समझने, उनके रखरखाव, दैनिक देखभाल तथा विभिन्न परिस्थितियों में उचित निर्देश देने के संबंध में प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसका उद्देश्य हाथियों एवं उनके साथ कार्य करने वाले कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा आपात परिस्थितियों में सुरक्षित एवं प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करना है।
16 वर्षों से जारी है पुनर्यौवन शिविर की परंपरा
कान्हा टाइगर रिजर्व में विभागीय हाथियों के स्वास्थ्य एवं कल्याण को प्राथमिकता देते हुए इस प्रकार के पुनर्यौवन शिविर का आयोजन लगातार 16 वर्षों से किया जा रहा है। यह पहल हाथियों के प्रति कान्हा टाइगर रिजर्व की संवेदनशीलता के साथ-साथ उनके वैज्ञानिक एवं समग्र प्रबंधन की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है।
शिविर के माध्यम से विभागीय हाथियों को उनके निरंतर योगदान के लिए विश्राम, देखभाल एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ उनके कल्याण को वन्यजीव प्रबंधन का अभिन्न हिस्सा बनाया जा रहा है।
