मंडला, 8 अक्टूबर 2026
मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विकासखण्ड घुघरी के ग्राम गुल्लूखोह, ग्राम पंचायत डोंगरमण्डला निवासी समा जहां पति श्री इब्राहिम खान ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी मेहनत और लगन से आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है। आज वे विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से सम्मानजनक आय अर्जित कर लखपति दीदी बनने की दिशा में सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही हैं।
समूह से जुड़कर मिली नई राह
आजीविका मिशन से जुड़ने से पहले समा जहां के परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी। सीमित संसाधनों के कारण परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने ज्ञान ज्योति स्व-सहायता समूह से जुड़कर नियमित बचत की शुरुआत की। इसके बाद रोशनी महिला आजीविका ग्राम संगठन एवं माँ गौरी महिला संकुल स्तरीय संगठन से जुड़कर उन्हें आजीविका के नए अवसरों और वित्तीय प्रबंधन की जानकारी प्राप्त हुई।
समूह के माध्यम से आवश्यकता अनुसार ऋण प्राप्त कर उन्होंने उसका सदुपयोग अपनी आजीविका गतिविधियों के विस्तार में किया। वर्तमान में वे किराना दुकान, सब्जी विक्रय, मनियारी एवं कॉस्मेटिक सामग्री, फुटवियर तथा मुर्गी-अंडा विक्रय जैसी विभिन्न गतिविधियां संचालित कर रही हैं। इन गतिविधियों से उन्हें प्रतिमाह लगभग 15 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है।
शासकीय योजनाओं से मिला संबल
समा जहां के परिवार को विभिन्न शासकीय योजनाओं का भी लाभ मिला है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पक्के आवास का निर्माण हुआ है तथा लाड़ली बहना योजना का लाभ भी प्राप्त हो रहा है। आर्थिक स्थिति मजबूत होने से परिवार के बच्चों की शिक्षा में भी सुधार आया है।
अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ समा जहां के सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आया है। आज वे गांव की सक्रिय महिला सदस्य के रूप में पहचानी जाती हैं। वे गरीब एवं अति-गरीब परिवारों की महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़ने तथा उन्हें आजीविका गतिविधियों के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
समा जहां कहती है कि समूह से जुड़ने के बाद हमारी आर्थिक स्थिति में बदलाव आया और हमें दूर-दूर जाने का मौका मिला। इससे हमें बाहर की दुनिया देखने और बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। पहले हम गांव के बाहर नहीं जाते थे।
समा जहाँ की सफलता यह संदेश देती है कि स्व-सहायता समूह केवल बचत और ऋण का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भरता, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण की राह दिखाने का प्रभावी मंच है। उनकी सफलता अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन रही है।
