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चलो चलें भैया हम गांवों की ओर संस्कृति के रंग बिखरे जहां पोर – पोर

 

( अखिल भारतीय हिंदी सेवा समिति मंडला का आयोजन)

 

विगत दिनों अखिल भारतीय हिन्दी सेवा समिति मंडला की ऑनलाइन काव्य गोष्ठी प्रो . शरद नारायण खरे प्राचार्य शास . महिला महाविद्यालय के मुख्य आतिथ्य संस्था की प्रदेशाध्यक्ष डॉ . सध्या शुक्ल मुदुल के विशिष्ठ आतिथ्य एवं अध्यक्ष जिला शाखा मंडला सरिता अग्निहोत्री की अध्यक्षता में संपन्न हुई । अन्नपूर्णा त्रिपाठी द्वारा सरस्वती वंदना की प्रस्तुति से काव्य गोष्ठी प्रारंभ हुई । डॉ . स्वल्पा बडगेया ने कार्यक्रम को गति प्रदान करते हुए अपनी काव्य प्रस्तुति में कहा – बेमिशाल हैं वे जिन्होंने हमें जिंदगी दी । पिता पर अपनी भावात्मक अभिव्यक्ति देते हुए डॉ . इंदु मिश्र ने कहा- खुशियों का आधार पिता है , बच्चों का अभिमान पिता है । अन्नपूर्णा तिवारी ने अपने काव्यपाठ में कहा – सुख – दुख में सदा साथ निभाती हैं बेटियां घनाक्षरी के माध्यम से कविता नेमा कहती है – वन के रक्षक मेरी रक्षा आप कीजिए । तत्पश्चात युवा रचनाकार महिमा साहू ने कहा- प्यारे मेघ तुम जल्दी आओ । अन्नपूर्णा त्रिपाठी अनुकेश ने कहा- मेरे जीवन में क्यों न हों अंधेरे सखि री डॉ रश्मि बाजपेई ने पानी की महत्ता को प्रतिपादित करते हुए अपनी कविता में कहा जिससे मिलता उसी का हो जाता , मैं भी पानी जैसा बनना चाहती हूं । निशि मिश्रा अपनी वीर रस से परिपूर्ण कविता में कहती हैं , भारत के वीर सपूत हम तुम्हें शत शत नमन करते हैं । सविता मोदी ने कहा- पर्यावरण से है अस्तित्व हमारा इनका संरक्षण है दायित्व हमारा कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए रेखा ताम्रकार ने हास्य कविता के माध्यम से कहा कैसे करूं श्रृंगार पिया जी घोदे पसीने की धार पिया जी कार्यक्रम समापन की कड़ी में विशिष्ठ अतिथि डॉ संध्या शुक्ल ‘ मृदुल ‘ ने गांवों की गुणवत्ता का चित्रण करते हुए अपनी कविता में कहा चलो चलें भैया हम गांवों की ओर संस्कृति के रंग बिखरे जहां पोर पोर आयोजन में सहभागिता कर रहे रचनाकारों को संबोधित करते हुए वे कहती हैं – गोष्ठियों में निरंतर सहभागिता करने से हमारी सृजनात्मकता में वृद्धि हो रही है । संस्था द्वारा आयोजित गोष्ठियों में निरंतर सहभागिता करने से अखिल भारतीय हिंदी सेवा समिति अपने प्रगति पथ पर अग्रसर हो रही है । मुख्य अतिथि प्रो . शरद नारायण खरे ने पिता पर अपने निराले अंदाज में मुक्तक प्रस्तुत करते हुए कहा- नूर बिखरे तभी जब पिता साथ है । अपने उदबोधन में वे कहते हैं जो भी लेखन करें वो स्तरीय हो , कम लिखें पर अच्छा लिखें । कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही सरिता अग्निहोत्री ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा- हम अपने घरों में ऐसे पौधे लगाएं जो भरपूर आक्सीजन दें । पर्यावरण प्रदूषण विषय पर प्रस्तुत अपनी काव्य पंक्तियों में कहा- पहले हम अपने को सुधारें तभी दूसरों को सुधार पाओगे । कार्यक्रम के अंत में महिमा साहू ने आभार प्रदर्शन किया ।

 

डॉ संध्या शुक्ल ‘ मृदुल प्रदेशाध्यक्ष , अखिल भारतीय हिंदी सेवा समिति म.प्र . मंडला

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