मंडला, 29 मई 2026
मानसून से पहले पशुओं को खतरनाक बीमारियों से बचाने के लिए पशुपालन विभाग ने जून माह में कराए जाने वाले जरूरी टीकों की सूची जारी की है। विभाग ने किसानों से अपील की है कि बरसात शुरू होने से पहले ही अपने पशुओं का टीकाकरण अवश्य करवा लें, ताकि बीमारी से होने वाले नुकसान से बचा जा सके।
जून में लगवाएं ये 5 जरूरी टीके
गलघोटू का टीका – यह बरसात में तेजी से फैलने वाली बीमारी है। इसके लक्षण तेज बुखार, सांस लेने में दिक्कत और गले में सूजन हैं। यह टीका साल में 1 बार, मई-जून में लगवाना चाहिए।
लंगड़ा बुखार का टीका – गाय और भैंस में होने वाली खतरनाक बीमारी है। पैर में सूजन, लंगड़ापन और तेज बुखार इसके मुख्य लक्षण हैं। यह टीका भी साल में 1 बार, बारिश से पहले लगवाना जरूरी है।
खुरपका-मुंहपका टीका – पशुओं की सबसे आम और नुकसानदायक बीमारी है। मुंह में छाले, लार गिरना और खुर में घाव इसके लक्षण हैं। यह टीका हर 6 महीने में, जून और दिसंबर में लगवाएं।
ब्रुसेलोसिस टीका (मादा बछिया) – यह गर्भपात रोकने के लिए जरूरी है। केवल 4-8 महीने की बछिया को जीवन में एक बार लगाया जाता है।
लंपी स्किन डिजीज टीका – त्वचा पर गांठ और बुखार वाली इस बीमारी का टीका सरकारी अभियान में निःशुल्क उपलब्ध है। इसे बरसात से पहले लगवाएं।
टीके के फायदे – पशुपालन विभाग के अनुसार, समय पर टीकाकरण से बीमारी से बचाव होता है, दूध उत्पादन सुरक्षित रहता है, इलाज का खर्च कम होता है और पशु स्वस्थ व सक्रिय रहते हैं। इससे मोटापा और कमजोरी से भी बचाव होता है।
उप संचालक पशु पालन श्री उग्रसेन तिवारी ने बताया कि पशुपालकों को कुछ सावधानियाँ रखनी हैं जैसे बीमार पशु को टीका न लगवाएं, टीके के बाद तुरंत नहलाएं नहीं, गर्म धूप में टीकाकरण न करें, केवल प्रशिक्षित डॉक्टर से ही टीका लगवाएं। उन्होंने अपील की है कि किसान नजदीकी पशु चिकित्सक से सलाह लेकर समय पर टीकाकरण जरूर करवाएं।
