जिले को शतप्रतिशत वैक्सीनेट करने सम्मिलित प्रयास आवश्यक – हर्षिका सिंह
कलेक्टर ने किया वैक्सीनेशन कोन्द्रों का निरीक्षण
मण्डला 16 सितम्बर 2021
कलेक्टर हर्षिका सिंह ने मंडला विकासखण्ड के लिमरूआ, ग्वारा, ठरका, सिलगी एवं नैनपुर विकासखण्ड के रमपुरी, चीचगांव, अलीपुर सहित अन्य ग्रामों के वैक्सीनेशन केन्द्रों का निरीक्षण करते हुए लक्ष्य एवं उपलब्धि की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन करते हुए प्रत्येक पात्र व्यक्ति का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करें। कोई भी व्यक्ति वैक्सीनेशन से वंचित नहीं रहना चाहिए। अधिकारी एवं कर्मचारी लोगों को वैक्सीनेशन के लिए प्रेरित करते हुए उन्हें मोबीलाईज करें। वैक्सीनेशन से शेष बचे लोगों का मतदाता सूची से मिलान कर सूची तैयार करें तथा घर-घर जाकर उनका वैक्सीनेशन सुनिश्चित करें। कलेक्टर ने निर्देशित किया कि टीकाकरण की जानकारी तत्काल पोर्टल पर अपलोड की जाए। भ्रमण के दौरान संबंधित एसडीएम, तहसीलदार सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
श्रीमती सिंह ने निर्देशित किया कि पेंशनधारी, पात्रतापर्चीधारी, जॉबकार्डधारी, श्रमिकों सहित शासन की विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों का चिन्हांकन कर उनका भी वैक्सीनेशन सुनिश्चित करें। संबंधित अधिकारी कर्मचारी सुनिश्चित करें कि उनके कार्यक्षेत्र में कोई भी पात्र व्यक्ति वैक्सीनेशन से वंचित नहीं रहे। कलेक्टर ने भ्रमण के दौरान ग्रामवासियों से चर्चा करते हुए विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के संबंध में फीडबैक लिया। किसानों से फसलों के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने केन्द्रीय विद्यालय के लिए प्रस्तावित भूमि का भी अवलोकन किया।
स्वयं टीका लगवाते हुए अन्य लोगों को प्रेरित करें
कलेक्टर हर्षिका सिंह ने ग्रामीणों से चर्चा करते हुए उन्हें आगे आकर टीका लगवाने की बात कही। उन्होंने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर की भयावहता सभी ने देखी है। अतः स्वयं को, अपने परिवार को एवं अपने आसपास के लोगों को सुरक्षित रखने के लिए सभी लोग अनिवार्य रूप से अपना वैक्सीनेशन कराएं। स्वयं टीका लगवाएं तथा अन्य लोगों को भी टीका के लिए प्रेरित करें। कोरोना से बचने के लिए वैक्सीनेशन ही एकमात्र एवं सुरक्षित उपाय है। टीकाकरण से बचे लोगों को आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, कोटवार, रोजगार सहायक, पंचायत सचिव, शिक्षक आदि के माध्यम से मोबीलाईज करें। जो लोग केन्द्र तक नहीं आ रहे हैं उनके घर जाकर वैक्सीनेशन करें। कलेक्टर ने दिव्यांगजनों का वैक्सीनेशन उनके घर में ही करने के निर्देश दिए।
वैक्सीनेशन सेंटर में मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करें
कलेक्टर हर्षिका सिंह ने एसडीएम सहित संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वैक्सीनेशन सेंटरों में बिजली, पेयजल तथा समुचित बैठक व्यवस्था सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि टीका लगवाने वाले व्यक्ति से सेंटर में कम से कम आधा घंटा बैठने के लिए आग्रह किया जाए। कोविड टीकाकरण के समय अनिवार्य रूप से स्वास्थ्य परीक्षण करें। उन्होंने जिला टीकाकरण अधिकारी तथा एसडीएम को ग्रामों में आवश्यकता के अनुरूप वैक्सीन की डोज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए परिणाममूलक कार्य करें
कलेक्टर हर्षिका सिंह ने कहा कि अधिकारी कर्मचारी पूरी क्षमता से कार्य करते हुए जिले को शतप्रतिशत वैक्सीनेट कराने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करें। स्थानीय जनप्रतिनिधि, संकट प्रबंधन समूह के सदस्य, स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि, स्व-सहायता समूह के सदस्य, राजनैतिक दलों के कार्यकर्ता, युवामंडल सहित ग्राम के जागरूक लोगों का सहयोग लेते हुए ग्राम को शतप्रतिशत वैक्सीनेट कराएं। हर गांव की समिति अपने ग्राम को संपूर्ण वैक्सीनेट कराने की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए परिणाममूलक कार्य करे। जिले को शतप्रतिशत वैक्सीनेट कराने के लिए सम्मिलित प्रयास आवश्यक है।
उचित मूल्य दुकानों में रेटलिस्ट लगाएं
भ्रमण के दौरान कलेक्टर हर्षिका सिंह ने उचित मूल्य दुकान रमपुरी का आकस्मिक निरीक्षण किया। उन्होंने खाद्यान्न की उपलब्धता तथा वितरण के संबंध में जानकारी ली। कलेक्टर ने निर्देशित किया कि उचित मूल्य दुकानों में अनिवार्य रूप से खाद्यान्न की कीमतों तथा स्टॉक से संबंधित जानकारी प्रदर्शित की जाए। वितरित किए जाने वाले खाद्यान्न में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें। एक्सपायरी डेट देखकर ही सामग्री का वितरण करें। उन्होंने खाद्यान्न की सुरक्षा के संबंध में भी आवश्यक निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि सेल्समैन स्वयं मॉस्क लगाएं तथा हितग्राहियों को भी मॉस्क लगाने के लिए प्रेरित करें।
बच्चों के भविष्य निर्धारण में सहभागी बनें शिक्षक
शासकीय नवीन माध्यमिक शाला समनापुर के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर हर्षिका सिंह ने शिक्षकों को निर्देशित किया कि बच्चों का उपलब्धि स्तर बढ़ाने के लिए नवाचार करें। किसी भी स्थिति में गाईड आदि का प्रयोग न करें, पाठ्यक्रम को पूर्ण कराएं। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों को शिक्षा का महत्व बताएं तथा उनके भविष्य के निर्धारण में सहभागी बनें। उन्होंने निर्देशित किया कि शिक्षक स्वयं मॉस्क लगाएं तथा बच्चों को भी मॉस्क लगाने के लिए प्रेरित करें। शिक्षक अध्यापन कार्य के दौरान कोरोना, डेंगू जैसी बीमारियों के संबंध में जानकारी देवें तथा इनसे बचने के लिए आवश्यक सावधानियों के बारे में भी बच्चों को जानकारी दें। कलेक्टर ने शाला में उपस्थिति बढ़ाने के निर्देश दिए।
पंजीयन केन्द्र डिठौरी का किया निरीक्षण
कलेक्टर हर्षिका सिंह ने पंजीयन केन्द्र डिठौरी का आकस्मिक निरीक्षण करते हुए उपार्जन के लिए किसानों के पंजीयन की जानकारी ली। उन्होंने निर्देशित किया कि पंजीयन केन्द्र के बाहर बैनर तथा आवश्यक सूचनाएं अंकित कराएं। दस्तावेजों के संबंध में भी किसानों को स्पष्ट अवगत कराएं। किसानों के साथ सहयोगात्मक रूख अपनाएं। पंजीयन एवं उपार्जन के लिए किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पंजीयन के संबंध में मुनादी कराने के भी निर्देश दिए। कलेक्टर ने भ्रमण के दौरान गिरदावरी के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की।
कलेक्टर ने किया परीक्षा केन्द्र का निरीक्षण
कलेक्टर हर्षिका सिंह ने कक्षा 12वी की विशेष परीक्षा के लिए वरिष्ठ मूलशाला में बनाए गए परीक्षा केन्द्र का आकस्मिक निरीक्षण किया। उन्होंने परीक्षार्थियों के लिए परीक्षा केन्द्र में आवश्यक सुविधाओं के संबंध में जानकारी लेते हुए आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा के दौरान कोविड-19 के संबंध में शासन के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए। परीक्षा में 35 में से 24 परीक्षार्थी उपस्थित रहे।
कलेक्टर ने हाईस्कूल वरिष्ठ मूलशाला के शिक्षकों को शाला परिसर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। इस दौरान अनुविभागीय अधिकारी मंडला पुष्पेन्द्र अहके, सहायक संचालक एमएस सिंद्राम आदि उपस्थित रहे।
फिल्म प्रदर्शन, मोहल्ला बैठक आदि के माध्यम से लोगों को वैक्सीनेशन के लिए प्रेरित करेगा जागरूकता रथ
कलेक्टर ने फीता काटकर रथ को किया रवाना
कोरोना विजय अभियान के तहत संचालित जागरूकता रथ को कलेक्टर हर्षिका सिंह ने फीता काटकर रवाना किया। आसरा सामाजिक लोक कल्याण समिति द्वारा चलाया जा रहा यह रथ चिन्हित विकास खंडों में फिल्म प्रदर्शन, मोहल्ला बैठक आदि के माध्यम से लोगों को वैक्सीनेशन के लिए प्रेरित करेगा।
इस अभियान के तहत् जिले के मवई, घुघरी, मोहगांव, बिछिया एवं नारायणगंज विकासखण्डों को चिन्हित किया गया है, जहां पर टीकाकरण का प्रतिशत कम है। टीम के द्वारा जागरूकता रथ में फिल्म प्रदर्शन मुहल्ला मीटिंग, पम्पलेट्स, प्रश्नोत्तरी, लीप्टेट्स गीत के माध्यम से मुख्य रूप से आदिवासी जनजाति, वरनेवल वीनेन एवं दिव्यांगों को मुख्य रूप से प्रेरित किया जाएगा। इस अवसर पर जिला टीकाकरण अधिकारी वायके झारिया, आसरा सामाजिक लोक कल्याण समिति से नागेश्वर धनंजय एवं एआईएफ की केम्पेनिंग टीम के सदस्य उपस्थित रहे।
जिला चिकित्सालय के पी.एस.ए. प्लांट का लोकार्पण आज
जिला चिकित्सालय मण्डला में स्थापित 1000 एवं 1100 एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) वाले पीएसए प्लांट का लोकार्पण 17 सितम्बर को दोपहर 2 बजे केंद्रीय इस्पात एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, राज्यसभा सांसद सम्पतिया उइके, विधायक मंडला देवसिह सैयाम विधायक बिछिया नारायण सिंह पटटा, विधायक निवास डॉ अशोक मर्सकोले, जिला पंचायत अध्यक्ष सरस्वती मरावी, उपाध्यक्ष शैलेश मिश्रा, नगरपालिका अध्यक्ष पूर्णिमा शुक्ला की गरिमामय उपस्थिति में किया जायेगा। इस लोकार्पण कार्यक्रम में जनप्रतिनिधिगण जूम मीटिंग के माध्यम से भी सम्मिलित हो सकते हैं। समारोह मे कोविड-19 का पालन किया जायेगा।
48 नमूनों में मिली मिलावट, 3 लाख का अर्थदण्ड अधिरोपित
जिले में खाद्य पदार्थों में मिलावट से मुक्ति अभियान के अर्न्तगत की गई कार्यवाही
खाद्य सुरक्षा प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में कलेक्टर हर्षिका सिंह के आदेशानुसार खाद्य पदार्थों में मिलावट से मुक्ति अभियान के अर्न्तगत मिलावटखोरों के विरूद्ध लगातार कार्यवाही की जा रही है। अभियान में खाद्य पदार्थों के 251 नमूने लेकर जांच हेतु प्रयोग शाला भोपाल भेजे गये हैं। 575 खाद्य प्रतिष्ठानों के निरीक्षण किये गये हैं तथा 75 खाद्य प्रतिष्ठानों को सुधार सूचनापत्र जारी किये गये हैं। मोबाईल लेब के द्वारा 502 खाद्य पदार्थों के नमूनों की स्पॉट टेस्टिंग की गई है तथा 14 नमूने मिलावटी पाए जाने पर उनके रेगुलेटरी नमूने जांच हेतु भेजे गए हैं। मैजिक बॉक्स की सहायता से कुल 1930 नमूनों की मौके पर स्पॉट टेस्टिंग की गई है। कमी पाये जाने पर सुधार सूचना पत्र जारी किए गए हैं। अभियान के दौरान लिये गये नमूनों में से 48 नमूने मिलावट पाई गई है जिनमें 37 प्रकरण में सक्षम न्यायालय में दायर किये गये हैं, अन्य प्रकरणों में विवेचना जारी है। अभियान के द्वारा खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अंतर्गत एडीएम न्यायालय द्वारा 40 प्रकरणों में कुल तीन लाख रूपए का अर्थदंड अधिरोपित किया गया है। मिलावट से मुक्ति अभियान के अन्तर्गत निरंतर कार्यवाही की जा रही है।
बाघ संरक्षण क्षेत्रों के प्रबंधन में मध्यप्रदेश फिर होगा टॉप पर – वनमंत्री डॉ. शाह
वन्यजीव संरक्षण क्षेत्रों के प्रबंधन और मूल्यांकन में मध्यप्रदेश अन्य प्रदेशों से बढ़त बनाये हुए है। कान्हा, सतपुड़ा, बांधवगढ और पन्ना को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिली है। वनमंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने वन्यजीव प्रबंधन से जुडे़ अमले को बधाई देते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्यप्रदेश जिस प्रकार अनेक क्षेत्रों में कामयाबी के शिखर पर पहुंचा है वैसे ही वन्य जीव संरक्षण में भी पूरे देश में गौरव प्राप्त करेगा। वन मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि कंजर्वेशन एश्योर्ड टाइगर स्टेण्डर्ड की अंतर्राष्ट्रीय समिति और डब्ल्यू.डब्ल्यू.एफ द्वारा संयुक्त रूप से संचालित 17 मुख्य मापदण्डों और उनसे जुड़े अन्य उपघटकों के आधार पर बाघ संरक्षण क्षेत्रों के प्रबंधन स्तर के मूल्यांकन चार चरण में प्रक्रिया पूरी कर मान्यता दी जाती है।
उल्लेखनीय है कि इस समिति द्वारा पेंच टाइगर, बांधवगढ़ टाइगर और संजय टाइगर रिजर्व में तीन चरण पूर्ण किए जा चुके हैं। अब प्रदेश के टाइगर रिजर्व को सीए/टीएस अनुसार प्रबंधन की दृष्टि से अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता मानदण्डों पर खरे उतरना है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश बाघ संरक्षण क्षेत्रों के प्रबंधन में अन्य सभी राज्यों में शीर्ष स्थान पर होगा। सतपुड़ा और पन्ना टाइगर रिजर्व को यह अंतर्राष्ट्रीय मान्यता पहले ही मिल चुकी है। इस तरह प्रदेश के सभी 6 टाइगर रिजर्व अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता को पूर्ण करेंगे। इससे पहले भी टाइगर रिज़र्व के प्रबंधन की प्रभावशीलता मूल्यांकन में पेंच टाइगर रिजर्व देश में सर्वाेच्च रैंक हासिल कर चुका हैं। बांधवगढ़, कान्हा, संजय और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को सर्वश्रेष्ठ प्रबंधन वाले टाइगर रिजर्व माना गया है। इन राष्ट्रीय उद्यानों में अनुपम प्रबंधन योजनाओं और नवाचारी तरीकों को अपनाया गया है।
हर एक टाइगर रिजर्व की है यह विशेषता
वन्य जीव संरक्षण मामलों पर नीतिगत निर्णय लेने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा प्रभावी प्रबंधन के आंकलन से संबंधित आंकडों की आवश्यकता होती है। ये आंकडे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के विश्व संरक्षण निगरानी केंद्र में रखे जाते हैं। टाइगर रिजर्व की प्रबंधन शक्तियों का आकलन कई मापदण्डों पर होता है जैसे योजना, निगरानी, सतर्कता, निगरानी स्टाफिंग पैटर्न, उनका प्रशिक्षण, मानव, वन्य-जीव संघर्ष प्रबंधन, सामुदायिक भागीदारी, संरक्षण, सुरक्षा और अवैध शिकार निरोध के उपाय आदि। पेंच टाइगर रिजर्व के प्रबंधन को देश में उत्कृष्ट माना गया है। फ्रंट-लाइन स्टॉफ को उत्कृष्ट और ऊर्जावान पाया गया है। वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत दर्ज सभी मामलों में पैरवी कर आरोपियों को दंडित करने में प्रभावी काम किया गया है। मानव-बाघ और बाघ-पशु संघर्ष के मामलों में पशु मालिकों को तत्काल वित्तीय राहत दी जा रही है। साथ ही उन्हें विश्व प्रकृति निधि भारत से भी सहयोग दिलवाया जा रहा है।
नियमित चरवाहा सम्मेलन आयोजित किये जा रहे है और चरवाहों के स्कूल जाने वाले बच्चों को शैक्षिक सामग्री वितरित की जा रही है। इसके अलावा, ग्राम स्तरीय समितियों, पर्यटकों के मार्गदर्शकों, वाहन मालिकों, रिसॉर्ट मालिकों और संबंधित विभागों और गैर सरकारी संगठनों के प्रबंधकों के प्रतिनिधियों की बैठकें भी होती हैं। पर्यटन से प्राप्त आय का एक तिहाई हिस्सा ग्राम समितियों को दिया जाता है। परिणामस्वरूप इन समितियों का बफर जोन के निर्माण में पूरा सहयोग मिलता है। पर्यटन से प्राप्त आय पार्क विकास फंड में दी जाती हैं और इसका उपयोग बेहतर तरीके से किया जाता है। इसी तरह, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ने बाघ पर्यटन द्वारा प्राप्त राशि का उपयोग कर ईको विकास समितियों को प्रभावी ढंग से पुनर्जीवित किया गया है। वाटरहोल बनाने और घास के मैदानों के रखरखाव के लिए प्रभावी वन्य-जीव निवास स्थानों को रहने लायक बनाने का कार्यक्रम भी चलाया गया है। मानव, वन्य-जीव संघर्षों को ध्यान में रखते हुए, मवेशियों, एवं मानव मृत्यु और जख्मी होने के मामले में राहत एवं सहायता राशि के तत्काल भुगतान की व्यवस्था बनाई गई है।
कान्हा टाइगर रिजर्व ने अनूठी प्रबंधन रणनीतियों को अपनाया है। कान्हा, पेंच वन्य-जीव विचरण कोरीडोर भारत का पहला ऐसा कोरीडोर है। इस कोरीडोर का प्रबंधन स्थानीय समुदायों, सरकारी विभागों, अनुसंधान संस्थानों, नागरिक संगठनों द्वारा सामूहिक रूप से किया जाता है। पार्क प्रबंधन ने वन विभाग कार्यालय परिसर में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी स्थापित किया है, जो वन विभाग के कर्मचारियों और आसपास के क्षेत्र के ग्रामीणों के लिये लाभदायी सिद्ध हुआ है। पन्ना टाइगर रिजर्व ने बाघों की आबादी बढ़ाने में पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित किया है। शून्य से शुरू होकर अब इसमें 60 से 65 बाघ हैं। यह भारत के वन्य-जीव संरक्षण इतिहास में एक अनूठा उदाहरण है। सतपुड़ा बाघ रिजर्व में सतपुड़ा नेशनल पार्क, पचमढ़ी और बोरी अभ्यारण्य से 42 गाँवों को सफलतापूर्वक दूसरे स्थान पर बसाया गया है। यहाँ सोलर पंप और सोलर लैंप का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना 2.0 कार्यक्रम 18 सितम्बर को
उज्जवला योजना क्रमांक 2.0 के तहत् पात्र उपभोक्ताओं को गैस का फी कनेक्शन प्रदाय किया जाना है। इसके तहत् 18 सितम्बर को एजेंसी स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करते हुए उज्ज्वला योजना के लिए चिन्हित किए गए पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ प्रदान किया जाएगा। जिला स्तरीय उज्ज्वला योजना हितलाभ वितरण कार्यक्रम मंडला नगरपालिका के टाऊनहॉल में आयोजित किया जाएगा। कलेक्टर ने जिलेवासियों से अपील की है कि पात्र हितग्राही निर्धारित दस्तावेजों के साथ अपने नजदीकि जनपद कार्यालय में संपर्क कर योजना का लाभ ले सकते हैं।
निर्धन परिवारों के लिए पात्रता –
जिला आपूर्ति अधिकारी ने बताया कि उज्ज्वला गैस के लिए जो एसईसीसी 2011 की सूची अनुसार पात्र हो, अनुसूचित जाति, जनजाति गृहस्थी, प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के हितग्राही, अन्त्योदय अन्न योजना, वनवासी, अति पिछड़ा वर्ग। इस प्रकार उक्त 7 श्रेणी से संबंध रखती हो। इस हेतु पात्र श्रेणी का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक होगा। यदि आवेदिका उपरोक्त क्रमांक 01 एवं 02 अंतर्गत नहीं आती है एवं गरीब गृहस्थी से संबंध रखती है तो योजना का हितग्राही होने के दावे के रूप में 14 बिन्दुओं का घोषणा पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक होगा जो कम्पनी एजेंसी के पास आवेदन पत्र के साथ उपलब्ध रहेगा। आवेदिका को दस्तावेज जैसे मानक प्रारूप में विधिवत हस्ताक्षर एवं फोटो युक्त केवाईसी फार्म, पहचान का प्रमाण, निवास का प्रमाण पत्र, आवेदिका के आधार की प्रति, परिवार के समस्त वयस्क सदस्यों के आधार की प्रति, आवेदिका के बैंक खाते का विवरण, राशन कार्ड अथवा समग्र आई.डी., आवेदिका प्रवासी होने की स्थिति में परिवार संयोजन की जानकारी संबंधी स्व-घोषणा पत्र, यदि आवेदिका उपरोक्त अ(2) अंतर्गत 7 श्रेणिओं से संबंध रखती है, तो पात्र श्रेणी का प्रमाण पत्र, गरीब गृहस्थी से संबंधित होने के दावे के रूप में 14 बिन्दुओं का घोषणा पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक होगा जिसका आवेदन पत्र में संलग्न है जो गैस कम्पनी से प्राप्त हो जायेगा।
जिले में अब तक 890.8 मिमी. औसत वर्षा दर्ज
जिले में इस वर्ष एक जून से 16 सितम्बर के दौरान 890.8 मिमी. औसत वर्षा दर्ज की गई है जबकि इसी अवधि तक गत वर्ष 1340.6 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई थी। इस प्रकार गत् वर्ष की तुलना में इस वर्ष 449.8 मिलीमीटर कम वर्षा दर्ज की गई है। अधीक्षक भू-अभिलेख से प्राप्त जानकारी के अनुसार 16 सितम्बर को मंडला में 113, नैनपुर में 33.7, बिछिया में 18.4, निवास में 73.2, घुघरी में 48.6 एवं नारायणगंज में 47.2 मि.मी. वर्षा दर्ज की गई। इस प्रकार जिले में 16 सितम्बर को 55.6 मि.मी. वर्षा दर्ज की गई।
आकाशीय बिजली से बचाव के लिए एडवाईजरी जारी
बरसात के दिनों में आकाशीय बिजली अक्सर जानलेवा साबित होती है। खेतों में काम करने वाले, पेड़ों के नीचे पनाह लेने वाले, तालाब में नहाते समय बिजली चमकने पर इसकी आगोश में आने की संभावना अधिक रहती है। आकाशीय बिजली से बचाव के कुछ उपाय ऐसे हैं जिससे बचा जा सकता है। राज्य सरकार के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा लोगों को सतर्क रहने के लिए दिशा-निर्देश जारी किया गया है।
आकाशीय बिजली कड़कने पर यदि घर के भीतर हों तो बिजली से संचालित उपकरणों से दूर रहें, तार वाले टेलीफोन का उपयोग नहीं करना चाहिए। खिड़कियां व दरवाजे बंद कर दें, बरामदे और छत से दूर रहें। इसके अलावा ऐसी वस्तुएं जो बिजली के सुचालक हैं उनसे भी दूर रहना चाहिए। धातु से बने पाइप, नल, फव्वारा, वाश बेसिन आदि के संपर्क से दूर रहना चाहिए।
इसी तरह जब आप घर के बाहर हैं तब वृक्ष जो बिजली को आकर्षित करते हैं। बिजली चमकते समय वृक्ष के नीचे न खड़े रहें, ऊंची इमारतों वाले क्षेत्र में आश्रय न लें, समूह में खड़े होने के बजाय अलग-अलग हो जाएं। किसी मकान में आश्रय लेना बेहतर है। सफर के दौरान अपने वाहन में ही रहें। मजबूत छत वाले वाहन में रहें, खुली छत वाले वाहन की सवारी न करें, बाहर रहने पर धातु से बने वस्तुओं का उपयोग न करें। बाइक, बिजली या टेलीफोन का खंभा तार की बाड़ और मशीन आदि से दूर रहें। तालाब और जलाशयों से दूर रहें यदि आप पानी के भीतर हैं, अथवा किसी नाव में हैं तो तुरंत बाहर आ जाएं। सिर के बाल खड़े हो जाएं तो समझिए बिजली गिरेगी। यदि आकाशीय बिजली चमक रही है और आपके सिर के बाल खड़े हो जाएं व त्वचा में झुनझुनी होने लगे तो फौरन नीचे झुककर कान बंद कर लें। क्योंकि यह इस बात का सूचक है कि आपके आस-पास बिजली गिरने वाली है।
आकाशीय बिजली गिरने पर क्या करें-
बिजली का झटका लगने पर जरूरत के अनुसार व्यक्ति को सीपीआर, कार्डियो पल्मोनरी रेसिटेंशन यानि कृत्रिम सांस देनी चाहिए। तत्काल प्राथमिक चिकित्सा देने की व्यवस्था करनी चाहिए।
प्लेसमेंट ड्राईव में 41 प्रशिक्षणार्थी का चयन
शासकीय आई0टी0आई0 मंडला में सुजुकी मोटर्स गुजरात के द्वारा प्लेसमेन्ट ड्राइव आयोजित किया गया। प्लेसमेन्ट ड्राइव में व्यवसाय (टर्नर, फिटर, मषीनिष्ट, इलैक्ट्रिीषियन, मोटर मैकेनिक, डीजल मैकेनिक, वेल्डर, पेन्टर जनरल, सीओई-आटोमोबाइल, टैक्टर मैकेनिक) के 70 आई0टी0आई उत्तीर्ण प्रशिक्षणार्थी लिखित चयन परीक्षा में सम्मिलित हुये, जिसमें 41 प्रशिक्षणार्थियों का प्रारम्भिक चयन कम्पनी के द्वारा किया गया।
विधायक देवसिंह सैयाम ने दिखाई स्वच्छता रथ को हरी झंडी
आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत जनपद पंचायत मंडला की ग्राम पंचायत मलारा में स्वच्छता संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विधायक मंडला देवसिंह सैयाम ने ग्रामीणों से चर्चा करते हुए उन्हें स्वच्छता का महत्व बतलाया। श्री सैयाम ने कहा कि देश को स्वच्छ बनाने के लिए हर गांव, हर मोहल्ले की स्वच्छता पर ध्यान देना आवश्यक है। स्वच्छ भारत का निर्माण हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है। इस अवसर पर जनपद पंचायत मंडला के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शैलेन्द्र शर्मा ने कहा कि निर्मित संरचनायें एवं उसके उपयोग करने के लिये व्यवहार में परिवर्तन आवश्यक है। उन्होंने स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने का आव्हान किया। इस अवसर पर ग्रामीणों को स्वच्छता की शपथ दिलाई गई। विधायक श्री सैयाम द्वारा हरी झंडी दिखाकर स्वच्छता रथ को रवाना किया गया। यह रथ जनपद पंचायत मंडला की प्रत्येक ग्राम पंचायतों में जाकर स्वच्छता का संदेश देगा। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्रामीणजन तथा जनपद पंचायत के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।
फीचर
जनसंपर्क संचालनालय की विशेष फीचर श्रृंखला
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भारत के प्रथम बलिदानी राजा शंकर शाह एवं रघुनाथ शाह
आलेख – डॉ. आनंद सिंह राणा
भारत के हृदय स्थल में स्थित त्रिपुरी (जबलपुर) के महान कलचुरी वंश का तेरहवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में अवसान हो गया था। फलस्वरूप सीमावर्ती शक्तियाँ इस क्षेत्र को अपने अधीन करने के लिए लालायित हो रही थी। अंततरू इस संक्रांति काल में एक वीर योद्धा जादों राय (यदु राय) ने गढ़ा- कटंगा क्षेत्र जबलपुर में गोंड वंश की नींव रखी। कालांतर में यह साम्राज्य गोंडवाना साम्राज्य के नाम से जाना गया।
गोंडवाना साम्राज्य का स्वर्ण युग रानी दुर्गावती का समय था। एक समय अंतराल के बाद उत्तर भारत में राजनीतिक परिवर्तन हुए। मुगलों ने अकबर के नेतृत्व में मुगल साम्राज्य की उत्तर भारत में पुनर्स्थापना की। गोंडवाना साम्राज्य का वैभव और संपन्नता को देखकर अकबर ने गोंडवाना साम्राज्य को मुगल साम्राज्य में मिलाने के लिए सेनापति आसफ खान को भेजा। सेनापति आसफ खान के साथ रानी दुर्गावती के 6 युद्ध हुए जिनमें 5 युद्धों में रानी दुर्गावती विजयी रही। छठें युद्ध में आसफ खान के पास तोपखाना आ जाने और रानी दुर्गावती के एक सामंत बदन सिंह के विश्वासघात के कारण युद्ध के परिणाम विपरीत होने लगे तब रानी दुर्गावती ने 24 जून 1564 को अपने महावत के हाथों से कटार लेकर अपना प्राणोत्सर्ग किया। इसके बाद दलपति शाह के छोटे भाई राजा चंद्र शाह गोंडवाना साम्राज्य के राजा बने और यह साम्राज्य मुगलों के अधीन आ गया। राजा चंद्र शाह की 11 वीं पीढ़ी में राजा शंकर शाह का जन्म मंडला के किले में हुआ। इनके पिता का नाम सुमेर शाह और दादा का नाम निजाम शाह था।
18वीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों में भारत की राजनीतिक परिस्थितियों में आमूलचूल परिवर्तन आया और मराठों ने पेशवा के नेतृत्व में मुगलों से गोंडवाना साम्राज्य हस्तगत कर लिया। इसके साथ ही सुमेर शाह को मराठों के प्रतिनिधि के रूप में मंडला में राज्य संभालने थे। सन् 1804 में सुमेर शाह की मृत्यु हो गई।
सन् 1818 में गोंडवाना साम्राज्य मराठाओं के हाथ से निकल गया, अंग्रेजों ने मंडला को अपने अधीन कर लिया और मध्य प्रांत में मिला लिया। इसके बाद राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह को जबलपुर में गढ़ा पुरवा के पास के 3 गाँव की जागीर देकर पेंशन दे दी गई। राजा शंकर शाह अंग्रेजों के इस दुर्व्यवहार के विरुद्ध थे और अंग्रेजों से स्वतंत्रता चाहते थे। आगे चलकर महारथी शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह ने सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में तोप के मुंह से उड़कर संपूर्ण भारत में किसी भी रजवाड़े परिवार की ओर से प्रथम बलिदान दिया। 19वीं शताब्दी मध्यान्ह तक अंग्रेजों के अत्याचार और अनाचार चरम सीमा पार कर गए थे। डलहौजी की हड़प नीति के बाद भारत में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि तैयार हो रही थी जिसकी जानकारी राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह को भी लग गई थी। जबलपुर स्थित गढ़ा पुरवा में मंडला, सिवनी, नरसिंहपुर, सागर, दमोह सहित मध्य प्रांत के के लगभग सभी रजवाड़े परिवार, जमींदार, मालगुजार के साथ 52 गढ़ों से सेनानी भी मिलने आने लगे थे।
जबलपुर कैंटोनमेंट क्षेत्र से 52वीं नेटिव इन्फेंट्री के सूबेदार बलदेव तिवारी के साथ कई सैनिक राजा शंकरशाह और कुंवर रघुनाथ शाह से मिलने आते थे। राजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह ने अंग्रेजों के विरुद्ध शक्तिशाली संगठन तैयार कर लिया था। राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह ने मध्य प्रांत के रजवाड़े परिवार जमींदारों और मालगुजारों को एकत्रित करने के लिए रोटी और कमल की जगह दो काली चूड़ियों की पुड़िया जिसमें संदेश लिखा होता था कि अंग्रेजों से संघर्ष के लिए तैयार रहो या चूड़ियाँ पहन कर घर बैठो। जो रजवाड़े परिवार, जमींदार और मालगुजार इस पुड़िया को स्वीकार कर लेते थे तो इसका आशय होता था कि वे अंग्रेजों के विरुद्ध संग्राम में शामिल हैं और जो स्वीकार नहीं करते थे तो यह मान लिया जाता था कि वे साथ नहीं है। इस तरह से मध्य प्रांत में राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह के नेतृत्व में अंग्रेजों के विरुद्ध एक मोर्चा तैयार हो गया था। उनका झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे तथा कुंवर साहब से भी संपर्क था।
महारथी मंगल पांडे ने 29 मार्च सन् 1857 में बैरकपुर छावनी में 34 वीं नेटिव इन्फेंट्री की ओर से प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का शंखनाद कर दिया। कानपुर, लखनऊ और दिल्ली से होने वाली भयंकर घटनाओं के समाचार भी राजा शंकरशाह और रघुनाथशाह तक पहुँचे। उत्तेजित हुए राजा शंकर शाह ने भी 10 सितंबर 1857 को जबलपुर में गढ़ा पुरवा में बैठक बुलाई और मध्य प्रांत में स्वतंत्रता संग्राम का श्रीगणेश करने की योजना भी बना ली, जिसमें मध्य प्रांत के अधिकांश रजवाड़े, जमींदार एवं मालगुजार एकत्रित हुए थे। ब्रिटिश सैन्य छावनी जबलपुर पर आक्रमण की योजना मोहर्रम के अवसर पर थी परंतु कुछ जमींदारों और मालगुजारों के अनुपस्थित होने और उचित समन्वय न होने के कारण योजना स्थगित कर दी गई। विजयादशमी को आक्रमण करने की योजना बनायी गई। जबलपुर कैंटोनमेंट छावनी से सैनिकों का राजा शंकर शाह और रघुनाथशाह के यहाँ आना-जाना था, इस बात की जानकारी जबलपुर के डिप्टी कमिश्नर क्लार्क को लग गई थी। इसलिए उसने गुप्तचरों को साधुओं के वेश में रहस्य जानने के लिए भेजा। राजा शंकर शाह को लगा कि यह हमारे ही सहयोगी हैं, इसलिए उन्होंने सारी योजना सविस्तार गुप्तचरों को बता दी। गुप्तचरों ने सारा वृतांत 14 सितंबर 1857 को डिप्टी कमिश्नर क्लार्क को सुनाया फलस्वरूप जबलपुर कमिश्नर इरेस्किन से अनुमति लेकर लेफ्टिनेंट क्लार्क ने 20 घुड़सवार सैनिक तथा 60 पैदल सैनिकों के साथ गढ़ा पुरवा में धावा बोला तथा राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके साथ ही दोनों की स्वरचित कविताएँ और लाल रंग का रेशमी थैला, जिसमें दस्तावेज और पत्र भरे थे, बरामद कर लिये गये। गिरफ्तारी करने के उपरांत उनको मिलिट्री केंटोनमेंट में रखा गया परंतु उसी रात को उन्हें छुड़ाने के लिए सूबेदार बलदेव तिवारी ने अपनी 52वीं नेटिव इन्फेन्ट्री के साथ बलवा किया, इसलिए राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह को कैंटोनमेंट से हटाकर रेसीडेंसी (रेजीडेंसी) में रखा गया। यहाँ डिप्टी कमिश्नर और दो अंग्रेज अधिकारी का न्याय आयोग बनाया गया। तीन दिन तक राजद्रोह का आपराधिक मामला चलाया गया और उनकी स्वरचित कविताएँ, जिसमें उन्होंने अंग्रेजी साम्राज्य के सर्वनाश की कामना माँ कालिका से की थी। उस पर गंभीर आपत्ति उठाई गई। साथ ही लाल रंग की रेशमी थैली में जो देसी रजवाड़ों, जमींदारों और मालगुजारों से पत्र व्यवहार किए थे उनको पढ़ा गया, जिसमें मध्य प्रांत में अंग्रेजों की सत्ता उखाड़ फेंकने की अपील की गई थी। राजा शंकर शाह और कुँवर रघुनाथ शाह ने सारे आरोप स्वीकार कर लिए, तब न्याय आयोग ने संधि प्रस्ताव प्रस्तुत किया। संधि की शर्तें थीं -राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह ईसाई धर्म स्वीकार स्वीकार करें, उन्हें अच्छी पेंशन दी जाएगी और वह विद्रोहियों का पता बता दें। इन शर्तों के मानने के बाद दोनों पिता-पुत्र को माफ कर दिया जाएगा। राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह ने यह स्वीकार नहीं किया। तब न्याय आयोग ने उन्हें फाँसी की सजा सुनाने का निर्णय लिया। राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह ने कहा कि – हम ठग, पिंडारी, चोर, लुटेरे, डाकू हत्यारे नहीं है, जो हमें फाँसी दी जाए, हम गोंडवाना के राजा हैं, इसलिए हमें तोप के मुँह से बांधकर उड़ाया जाए। न्याय आयोग ने भी विचार किया कि तोप के मुँह में बांध के उड़ाने से जनता में दहशत फैलेगी। इसलिए अच्छा है कि तोप के मुँह से बांधकर ही उड़ाया जाए। उधर राजा शंकर शाह बुद्धिजीवी थे और वह चाहते थे कि जब सार्वजनिक रूप से उन्हें तोप के गोले से उड़ाया जाएगा तो जन आक्रोश फैलेगा और मध्य प्रांत में भयानक संग्राम होगा।
अंततः 18 सितंबर 1857 को प्रातः 11 बजे 33वीं मद्रास नेटिव इन्फेंट्री सहित पाँच हजार सैनिकों के घेरे में रेसीडेंसी के सामने राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह को तोप के मुँह पर बांधा गया। चारों और अपार जनसमूह उमड़ आया था। पिता और पुत्र शांत चित्त होकर खड़े थे। उनके चेहरों में किसी भी प्रकार के भय के लक्षण नहीं थे। लेफ्टिनेंट क्लार्क के तोप के गोले से उड़ाने के आदेश के पूर्व राजा शंकर शाह ने उस स्वरचित कविता का प्रथम छंद गाया, जिसमें अंग्रेजों के सर्वनाश की प्रार्थना की गई थी और जिसे अंग्रेजों ने अपराध का एक आधार बनाया था। कविता का अंग्रेजी अनुवाद जबलपुर के कमिश्नर इरेस्किन ने किया था। कविता का प्रथम छंद राजा शंकरशाह ने इस प्रकार गाया ष्मूंद मुख डंडिन को चुगलों को चबाई खाई, खूंद डार दुष्टन को शत्रु संघारिका,
मार अंगरेज रेज पर देई मात चंडी,
बचे नहीं बेरी बाल बच्चे संहारिका,
संकर की रक्षा कर दास प्रतिपाल कर,
दीन की पुकार सुन जाय मात हालिका,
खाय ले म्लेच्छन को झेल नहीं करो मात,
भच्छन कर तत्छन ही बैरिन को घौर मात कालिका।
दूसरा छंद पुत्र रघुनाथशाह ने और भी उच्च स्वर में सुनाया कालिका भवानी माय अरज हमारी सुन,
डार मुण्डमाल गरे खड्ग कर धर ले,
सत्य के प्रकाशन औ असुर बिनाशन कौ, भारत समर माँहि चण्डिके संवर ले,
झुंड-झुंड बैरिन के रुण्ड मुण्ड झारि-झारि,
सोनित की धारन ते खप्पर तू भर ले,
कहै रघुनाथशाह माँ फिरंगिन को काटि-काटि, किलकि-किलकि माँ कलेऊ खूब कर ले।… इसके बाद लेफ्टिनेंट क्लार्क ने तोप चलाने का आदेश दिया था और भयंकर गर्जना के साथ चारों तरफ धुआँ भर गया, राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह के हाथ-पाँव तोप से बंधे रह गए। शेष शरीर के मांस के लोथड़े और हड्डियाँ 50-50 गज दूर जाकर गिरीं, जिन्हें उनकी वीरांगना पत्नियों क्रमशः फूलकुंवर और मन कुंवर ने एकत्रित किया तथा कुंवर रघुनाथ शाह के पुत्र लक्ष्मण शाह ने अंतिम संस्कार किया।
इस तरह से प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भारत के रजवाड़ों में प्रथम बलिदानी, जिन्हें तोप के मुँह से बांधकर उड़ाया गया,वो राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह ही थे। चार्ल्स बाल ने द हिस्ट्री ऑफ इंडियन म्यूटिनी में लिखा है कि राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह को जब तोप के मुँह से बांधा गया था तब भी उनकी आँखों में दया या याचना का भाव तक नहीं था। एक चश्मदीद अंग्रेज अफसर के हवाले से द हिस्ट्री ऑफ इंडियन म्यूटिनी में कहा गया है कि उनके पैर-हाथ जो बांध दिए गए थे, तोप के मुँह के पास पड़े थे और सिर तथा शरीर का ऊपरी भाग सामने की ओर लगभग पचास गज की दूरी पर जा गिरे थे। उनके चेहरों को जरा भी क्षति नहीं पहुँची थी और वे बिल्कुल शांत थे। बात यहीं खत्म नहीं हुई क्योंकि राजा शंकर शाह की सहधर्मचारिणी रानी फूलकुंवर ने मंडला में अंग्रेजों से लड़ते हुए स्वयं अपना आत्मोत्सर्ग किया।
राजा शंकर शाह और कुँवर रघुनाथ शाह के विचार फलीभूत हुए कि ’हमारे इस बलिदान के बाद सारे मध्य प्रांत में अंग्रेजों के विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम छिड़ जाएगा’ और वैसा ही हुआ। संपूर्ण मध्य प्रांत के अधिकांश रजवाड़े परिवार एवं जमींदार और मालगुजारों ने अंग्रेजों के विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल बजा दिया।
राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह के बलिदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता है। आज भी उनकी बलिदान गाथा पर गीत और लोक गीत गाए जाते हैं। सन् 1946 में जब जबलपुर में सिग्नल कोर के 1700 सिपाहियों ने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह किया तथा वो तिलक भूमि तलैया पहुँचे तब उन्होंने राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह को ही अपना नायक घोषित किया था। राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह की अमर बलिदान गाथा भारतीय इतिहास का वह पड़ाव है, जो चिरकाल तक भारतीयों को गर्व, गौरव और स्वाभिमान की अनुभूति कराता रहेगा। साथ ही वर्तमान और भावी पीढ़ी को स्वतंत्रता के लिए चुकाई गई कीमत का एहसास कराएगा, जिससे राष्ट्रवाद और देश भक्ति की भावना प्रबल होती रहेगी तथा यही भाव जागृत होंगे कि मैं रहूँ या ना रहूँ, मेरा यह भारत देश रहना चाहिए। (लेखक – विभागाध्यक्ष – इतिहास, श्री जानकी रमण कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, जबलपुर और उपाध्यक्ष, इतिहास संकलन समिति महाकोशल प्रांत)
