मण्डला 1 अक्टूबर 2021
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट हर्षिका सिंह ने 1 अक्टूबर से कान्हा क्षेत्र में पॉलिथीन का प्रयोग प्रतिबंधित करने के आदेष जारी कर दिये है। जारी आदेष में उन्होने कहा है कि कान्हा नेशनल पार्क (कोर$बफर) आगामी 01 अक्टूबर से खुल जाने से पार्क में भ्रमण हेतु पर्यटक एवं सैलानियों का आवागमन प्रारंभ होगा। वन्य प्राणियों के स्वास्थ्य के दृष्टिगत राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में पॉलीथीन बैग्स अत्यंत ही हॉनिकारक होते हैं। इनका उपयोग स्वस्थ ईको पर्यटन नियमन के विरूद्ध है। पार्क के अंदर गेट से प्रवेश के दौरान पर्यटक एवं सैलानियों द्वारा अपने साथ खाने-पीने की सामग्री पॉलीथीन में रखी जाती है। पॉलीथीन के प्रयोग से पार्क के जीव-जन्तु, पशु-पक्षी एवं मानव जीवन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, साथ ही पर्यावरण भी प्रभावित होगा। वन्य प्राणी (संरक्षण) अधिनियम 1972 में राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य क्षेत्रों में पॉलीथीन का प्रयोग प्रतिबंधित किया जाना प्रावधानित है। मण्डला जिले के कान्हा नेशनल पार्क क्षेत्र (कोर$बफर) में पॉलीथीन के उपयोग की रोकथाम हेतु प्रतिबंधात्मक कार्यवाही व प्रचार-प्रसार आवश्यक है।
हर्षिका सिंह कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट ने दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के अंतर्गत आदेष जारी कर कहा है कि मण्डला जिले के कान्हा नेशनल पार्क क्षेत्र (कोर$बफर) में पॉलीथीन का उपयोग प्रतिबंधित किया जाए। संरक्षित क्षेत्र पार्क (कोर$बफर) में खाद्य पदार्थों को लाने ले जाने के लिये पॉलीथीन की थैलियों का उपयोग नही किया जाए। समस्त दुकानें, प्रतिष्ठान किसी भी तरह पॉलीथीन का उपयोग नही करेंगे। भोजन पैकिंग में पॉलीथीन का उपयोग करना समस्त रिसोर्ट संचालकों के लिये प्रतिबंधित रहेगा। इस हेतु प्राकृतिक रूप से निर्मित किये गये कागज का बैग, दौना पत्तल, कपड़ों के बैगों का उपयोग अनुमत रहेगा। इस संबंध में पार्क के समस्त प्रवेश द्वारों पर सूचनायें एवं आग्रह प्रदर्शित किया जाए। कान्हा नेशनल पार्क (कोर$बफर) में पैकेज्ड खाद्य पदार्थों जैसे प्लास्टिक, दोना पत्तल इत्यादि को एकत्रित किया जाएगा तथा उक्त एकत्रित सामग्री का निपटान ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियत 2016 के प्रावधानों के अनुरूप किया जाएगा। राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में पॉलीथीन का उपयोग करते पाये जाने पर संबंधित के विरूद्ध संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय दण्डाधिकारी द्वारा 500.00 रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित करने हेतु चालानी कार्यवाही की जाए। आदेश का उल्लंघन धारा 188 भारतीय दण्ड विधान के अंतर्गत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आएगा।
