मण्डला 9 नवम्बर 2021
उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास ने बताया कि मृदा परीक्षणों के आधार पर प्रायः यह देखने में आ रहा है कि प्रदेश के साथ-साथ हमारी कृषि भूमि में जीवान्श (कार्बनिक तत्व) की मात्रा दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है, जिसका प्रमुख कारण गोबर खाद की कमी, रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग के साथ-साथ तात्कालिक लाभ के लिए खेतों में बचे फसल अवशेष को जलाकर नष्ट किया जाना है। जिस कारण हमारी मृदा की उर्वरता कम होती जा रही है। साथ ही मृदा में पाये जाने वाले लाभदायक कीट जो किसान के मित्र कीट कहलाते हैं, असंख्य जीव-जंतु जो उत्पादन वृद्धि में सहायक होते हैं, जलकर नष्ट हो जाते हैं। साथ ही कई बार रहवासी क्षेत्रों में आग लगने से जानमाल की हानि होने की संभावनाएं बढ़ जाती है।
उपसंचालक ने किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने जिले के समस्त कृषकों से अपील की है कि फसल कटाई पश्चात् खेतों में खड़े फसल अवशेषों को जलाकर नष्ट न करें यह पर्यावरण के लिए बहुत ही खतरनाक एवं आपराधिक कृत्य है। बल्कि खाली खेतों में रोटावेटर चलाकर फसल अवशेषों को मिट्टी में मिला दें तथा मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई करें जिससे मृदा में हवा एवं प्रकाश का संचार के साथ-साथ वर्षा के जल को रोककर जलधारण की क्षमता में वृद्धि करें। अधिक से अधिक गोबर खाद, नाडेप एवं वर्मी खाद एवं हरी खाद का प्रयोग कर मृदा की उर्वराशक्ति को बढायें।
