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तनख्वाह से परिवार नहीं चलता, तो लेनी पड़ती हैं रिश्वत की भीख, *शर्म और मर्यादा सभी को हजम करते जा रहें हैं अधिकारी और कर्मचारी*

शिव दोहरे, मंडला

9424316456

मंडला। आदिवासी बाहुल्य जिला अब अधिकारी, कर्मचारी के द्वारा लूटने का गढ़ बन गया हैं। रिश्वत की भीख लेने वाले अधिकारी, कर्मचारी अब छोटे कर्मचारियों को भी नहीं बख्श रहें हैं, और निरंतर गरीबों और छोटे कर्मचारियों से रिश्वत की भीख लेकर अपने परिवार का संचालन कर स्वयं ऐसो आराम का जीवन जी रहें हैं। जिसमें इनका परिवार का भी समर्थन रहता हैं, चूंकि रिश्वत की कमाई से पत्नी और परिवार ऐसो आराम करते हैं। गरीबों को लूटकर स्वयं के परिवार चलाने वाले को न ही शर्म आती हैं न ही उन्हें अब मर्यादा का कोई ध्यान रहता हैं।

 

*निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का भी रहता हैं हिस्सा*

 

आदिवासी जिला में लम्बे समय से सांप की तरह गुढ़ी मारकर बैठे अधिकारी कर्मचारियों के संरक्षण रूपी जिले के निर्वाचित जनप्रतिनिधि की महत्वपूर्ण भूमिका रहती हैं। जिले में लम्बे समय से खुलेआम रिश्वत लेने का धंधा जमकर चल रहा हैं और निर्वाचित जनप्रतिनिधि और जिले के वरिष्ठ अधिकारी का कोई हस्तक्षेप नहीं रहता हैं, जिसके चलते रिश्वतखोर लुटेरे अधिकारी, कर्मचारी लगातार रिश्वत लेने को एक फैशन सा समझ लिया हैं। और इस आदिवासी मंडला जिला के निर्वाचित सांसद और विधायक मूक बधिर बनकर कर देख रहें हैं और सुन रहें। इसके अलावा जिले के वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण इनके ऊपर सतत् बना रहता हैं। जिले में संचालित हर विभागों में बगैर रिश्वत के कोई भी कार्य नहीं किए जा रहें हैं। अधिकारी, कर्मचारियों को जन हितेषी कार्यों में मदद करना चाहिए, लेकिन उल्टे उनके कार्यों को उलझा कर रिश्वत लेने के जुगाड़ में लगे रहते हैं। ऐसे अधिकारी, कर्मचारी बगैर संरक्षण के रिश्वत ले ही नहीं सकते। रिश्वतखोर इतने बेशर्म हो चुके हैं कि रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद भी बड़े शान से जीते हैं, इनको मर्यादा का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रहता हैं। रिश्वत लेकर अपनी बेशर्मी की पूरी हद पार कर देते हैं। निश्चित तौर पर रिश्वत से ली हुई राशि कमीशन के तौर पर वरिष्ठ अधिकारी और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को भी नजराना भेंट किया जाता हैं। तभी तो जिले में अनेक रिश्वत कांड के मामले प्रकाश में आए लेकिन वरिष्ठ अधिकारी और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का कोई भी हस्तक्षेप नहीं रहा। नाम न बताने की शर्त पर ऐसे अनेक अधिकारी, कर्मचारी बताते हैं कि रिश्वतखोर अधिकारी, कर्मचारी चुनाव के समय सांसद विधायक के लिए लड़ रहें प्रत्याशियों को अच्छी खासी मुद्राएं नजराना के रूप में भेंट की जाती हैं, जिसके चलते उनका हस्तक्षेप नहीं रहता हैं।

 

*रिश्वतखोरों के विरुद्ध जिला प्रशासन को तत्काल लेना चाहिए निर्णय*

 

रिश्वत कांड के मामले में रिश्वत लेने वाले अधिकारी, कर्मचारियों को तत्काल निलम्बित कर उनकी चल और अचल सम्पत्ति की जांच करानी चाहिए। रिश्वतखोरों को तत्काल मुचलका में जमानत देकर छोड़ दिया जाता हैं जिसके चलते जिले के ओर भी अधिकारी, कर्मचारी के हौंसले बुलंद होते हैं और रिश्वत लेने से नहीं चूकते। ऐसे रिश्वतखोरों को तत्काल निलम्बित करना चाहिए, और तत्काल निलम्बन करने की शक्ति जिला प्रशासन को प्रदान की गई हैं।

 

*डॉ.को भगवान समझे या अभिशाप*

 

आज भी डॉ. को भगवान समझते हैं लेकिन कुछ गंदे कार्यप्रणाली के डॉ. अपने कर्तव्यों को भूलकर भगवान कहें जाने वाले सच्चे ईमानदार डॉ. का नाम भी बदनाम कर रहे हैं। जो आनंद सम्मान और इज्जत में हैं वह आनंद रिश्वत और अपमान में नहीं हैं। अच्छे कार्य करके भी सम्मान और प्रतिष्ठा कमाई जा सकती हैं, जिससे व्यक्ति समाज में सा-सम्मान से जी सकता हैं। लेकिन असहाय और गरीब लोगों से रिश्वत लेते पकड़े जाने पर ऐसे रिश्वतखोर डॉ. बड़ी बेशर्मी के साथ अपने परिवार और समाज का सामना कैसे कर लेते हैं।

 

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