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चार डिग्री से तापमान कम होने पर होती है पाले की सम्भावना फसलों को बचाने किसानों के लिए जारी की गई एडवाईजरी

मंडला 17 दिसंबर 2024

जिले के किसानों के लिए जारी एडवाईजरी में कहा गया है कि वर्तमान में ठंड का प्रकोप अधिक होने के कारण लगातार तापमान में गिरावट आ रही है जिसके कारण पाला पड़ने की सम्भावना होती है। शीत लहर के बढ़ते प्रकोप और तापमान में आ रही गिरावट को देखते हुए किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग जिले के किसानों को पाले से फसलों को बचाने के उपाय बताए हैं। उप संचालक कृषि श्रीमति मधु अली के मुताबिक रात का तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से कम होने पर पाला पड़ने की सम्भावना होती है। पाले से मुख्य रूप से सब्जी फसलों में ज्यादा नुकसान होता है इसके अलावा दलहनी फसलों को भी पाले से नुकसान हो सकता है। पाले के सम्भावना तब और अधिक हो जाती है जब शाम को आसमान साफ हो और हवा बंद हो, किसानों को पाले के प्रभाव से बचाने के लिए दीर्घकालीन उपायों में वायु अवरोधक पेड़ उत्तर पश्चिम मेढ़ों पर लगाने चाहिए। पाले के प्रभाव से फल-फूल प्रभावित होते हैं और पत्तियों पर ओस की बूंद के जमने से कोशिकाएं फट जाती है जिससे पत्तियों का हरा रंग समाप्त हो जाता है और मिट्टी के समान दिखाई देने लगता है। पत्तियों के सड़ने से बैक्टीरिया जनित बिमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है। पत्ती, फल एवं फूल सूख जाते हैं और फल के ऊपर धब्बे पड़ जाते हैं एवं स्वाद भी खराब हो जाता है। फसल को पाले से बचाने के लिए किसानों को सिचाई करना चाहिए। साथ ही मेढ़ों पर धुआं करने, दवाईयों का इस्तेमाल, पॉलिथीन का इस्तेमाल करने से फसलों का कुछ हद तक पाले से बचाव किया जा सकता है। पाले से बचाव हेतु दवाईयों का उपयोग जैसे यूरिया की 2 किलो मात्रा 100 लीटर पानी की दर से घोल बनाकर फसलों पर छिड़काव करना चाहिए अथवा 8-10 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से भुरकाव करना चाहिए अथवा घुलनशील सल्फर 80 प्रतिशत डब्लू डीजी की 40 ग्रा. मात्रा प्रति 15 ली. पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है। ऐसा करने से पौधों की कोशिकाओं में उपस्थित जीवद्रव का तापमान बढ़ जाता है। इसके अलावा किसान एक रस्सी को दो लोग लेकर खेत के दोनो छोर लेकर चलने से भी फसल पर जमी ओस की बूंदे गिर जाती है और पाला का प्रभाव नहीं हो पाता है। किसान की फसल पाले से प्रभावित हो जाने की स्थिति में फसल को पुनः जीवन देने के लिए बोरान 100 ग्राम प्रति एकड़ अथवा चिलेटेड जिंक 100 प्रति एकड़ की दर से 100 ली. पानी में मिलकर स्प्रे कर सकते हैं जिससे कोशिकाओं में और फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है।

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