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मुस्लिम विकास परिषद ने गाय को “राष्ट्र माता” घोषित करने और सशक्त गोवंश संरक्षण कानून बनाने की मांग उठाई

मंडला। मुस्लिम विकास परिषद ने राष्ट्रहित एवं सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने के उद्देश्य से भारत की महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर के माध्यम से एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर गाय को “राष्ट्र माता” घोषित करने तथा देशभर में सशक्त गोवंश संरक्षण कानून लागू करने की मांग की है।

 

परिषद द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन में कहा गया है कि सनातन परंपरा में गाय को केवल एक पशु नहीं बल्कि करुणा, पालन-पोषण, समृद्धि और धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है। हिंदू समाज के एक बड़े वर्ग में गाय के प्रति गहरी श्रद्धा और सम्मान की भावना विद्यमान है, जिसके कारण उसे “गौ माता” का सम्मानजनक संबोधन दिया जाता है।

 

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि गाय के प्रति धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था के बावजूद पिछले कई वर्षों में गाय के नाम पर समाज में तनाव और विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई है। परिषद का आरोप है कि कुछ तत्वों द्वारा गाय के मुद्दे का राजनीतिक एवं सांप्रदायिक लाभ के लिए उपयोग किया गया, जिसके परिणामस्वरूप विभिन्न स्थानों पर सामाजिक वैमनस्य और हिंसा की घटनाएं सामने आईं। परिषद का कहना है कि इन परिस्थितियों का प्रभाव विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय पर पड़ा है और कई बार गौवध के आरोपों को लेकर विवाद एवं हिंसक घटनाएं हुई हैं।

 

मुस्लिम विकास परिषद ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय देश के सभी धर्मों और उनकी आस्थाओं का सम्मान करता है तथा सामाजिक सौहार्द और पारस्परिक सम्मान को बनाए रखने के पक्ष में है। इसी भावना के तहत परिषद ने केंद्र एवं राज्य सरकारों से मांग की है कि गाय के संरक्षण और सम्मान को लेकर स्पष्ट एवं प्रभावी नीतियां बनाई जाएं, ताकि इस विषय पर होने वाले विवादों और राजनीति पर रोक लगाई जा सके।

 

ज्ञापन की प्रमुख मांगें

परिषद ने अपने ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें रखी हैं—

 

गाय को राष्ट्रहित में “राष्ट्र माता” घोषित किया जाए।

 

गोवंश संरक्षण के लिए सशक्त एवं प्रभावी कानून बनाया जाए।

 

कमजोर एवं बूढ़ी गायों की खरीद-फरोख्त पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए तथा मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार कराया जाए।

 

गाय संरक्षण के नाम पर संचालित गौ रक्षा दलों पर प्रतिबंध लगाकर उनकी आड़ में होने वाली अवैध गतिविधियों और गौ तस्करी पर सख्त कार्रवाई की जाए।

 

गौवंश मांस (गाय एवं बैल) के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्यातकों के लाइसेंस निरस्त किए जाएं।

 

गौशालाओं के संचालन हेतु विशेष आर्थिक सहायता, पारदर्शी व्यवस्था तथा संरक्षण तंत्र विकसित किया जाए।

 

गौ आधारित उत्पादों, पंचगव्य उत्पादों और जैविक खेती को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाए।

 

सभी धर्मों और समुदायों के बीच आपसी सम्मान बनाए रखने तथा गौ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाए।

 

सामाजिक सौहार्द और सम्मान की अपील

मुस्लिम विकास परिषद अध्यक्ष राशिद खान ने अपने ज्ञापन में कहा है कि गाय से जुड़ी धार्मिक आस्थाओं का सम्मान करते हुए सरकार को ऐसे कदम उठाने चाहिए, जिससे किसी भी समुदाय के विरुद्ध गलत आरोपों, सामाजिक तनाव और विवादों की स्थिति उत्पन्न न हो। परिषद ने उम्मीद जताई है कि केंद्र और राज्य सरकारें ज्ञापन में उठाए गए सभी बिंदुओं पर गंभीरतापूर्वक विचार करेंगी तथा सामाजिक सद्भाव, धार्मिक सम्मान और गोसंरक्षण को मजबूत बनाने की दिशा में आवश्यक पहल करेंगी।

 

परिषद ने कहा कि यदि गोवंश संरक्षण को लेकर स्पष्ट, पारदर्शी और कठोर व्यवस्था लागू की जाती है तो इससे न केवल गायों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि समाज में आपसी विश्वास और भाईचारे को भी मजबूती मिलेगी।

ज्ञापन देने वालों में जनाब शाह फैसल खान,जावेद कुरैशी, लारेब कुरैशी,अतीक अहमद, बाकर भाईजान,सहित बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग शामिल रहे।

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