मंडला, 29 मई 2026
राज्य सरकार खरीफ 2026 सीजन से “धान के साथ मछली पालन” तकनीक को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने जा रही है। इस नवाचार के तहत किसान एक ही खेत से धान और मछली दोनों का उत्पादन कर सकेंगे, जिससे कम लागत में अतिरिक्त कमाई का नया जरिया मिलेगा। सरकार का मकसद किसानों की आय बढ़ाकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
इस वैज्ञानिक तकनीक में धान के खेत के चारों ओर या बीच में 1 से 1.5 मीटर गहरी नाली बनाई जाती है। धान रोपाई के 10-15 दिन बाद 1 हेक्टेयर में 10 से 15 हजार रोहू, कतला, मृगल, कॉमन कार्प या तिलापिया की फिंगरलिंग डाली जाती हैं। पानी का स्तर 15-25 सेमी रखा जाता है और मछलियों को चोकर, सरसों की खली या फिश फीड दिया जाता है।
कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मछलियाँ खेत के हानिकारक कीड़ों को खाकर कीट नियंत्रण में मदद करती हैं और उनके मल से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, जिससे धान की पैदावार भी सुधरती है। उप संचालक कृषि श्री अश्वनी झारिया ने बताया कि 1 हेक्टेयर से 300 से 500 किग्रा अतिरिक्त मछली उत्पादन संभव है, जिससे किसानों को पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक शुद्ध लाभ मिलेगा।
इस तकनीक के लिए ऐसे खेत जरूरी हैं जहां 3-4 महीने तक पानी रुक सके और मेड़ मजबूत हो। रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग न करने की सलाह दी गई है क्योंकि इससे मछलियों को नुकसान पहुंचता है। किसान अधिक जानकारी के लिए अपने जिले के मछली पालन, कृषि विभाग या परियोजना संचालक आत्मा से संपर्क कर सकते हैं।
