Reva India News
ब्रेकिंग न्यूज़मंडला हमारा जिला

*जन कल्याणकारी योजनाएं -कानूनों का सख्ती से क्रियान्वयन कराने ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन*

*मंडला*

लोक कल्याणकारी लोकतांत्रिक सरकार के द्वारा बनाये गये योजनाएं और कानूनों को तटस्थता के साथ क्रियान्वयन कराने जिले के ग्रामीणों ने 17 दिसंबर को देश और प्रदेश के मुखियाओं के नाम ज्ञापन सौंपा है।

भा.क.पा.मा-ले जिला सहसंयोजक मनुअर अली ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया है,कि देश के प्रधानमंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री और महामहिम राज्यपाल के नाम लिखे साठ सूत्रीय ज्ञापन कलेक्टर मंडला के हाथों सौंपा गया है।सौंपे गये ज्ञापन में तमाम मुद्दों और समस्याओं का समय पर समाधान जवाबदारों का ध्यान आकृष्ट कराना चाहा गया है।

पार्टी जिला संयोजक अब्दुल कय्यूम अंसारी के अनुसार लोक कल्याणकारी लोकतांत्रिक सरकार के द्वारा तैयार विकास योजनाओं-परियोजनाओं और कानूनों का लाभ पाने हर दृष्टि से पात्र जिले की जनमानस को जनकल्याणकारी योजनाओं और कानूनों का उचित लाभ शासन-प्रशासन की उदासीनता के कारण नहीं मिल पा रहा है।पात्र लोग इनको पाने के लिए दर-दर गुहार लगाते,भटकते लोकतांत्रिक सरकार की वर्तमान व्यवस्था और सरकारी विभागों से ठगे,चले और शोषित, वंचित पाकर इनको कोसने और बदनाम करने तक को मजबूर हो रहे हैं।जो सत्ता पर कब्जा जमाने की जुगत लगाते रहने वाली राजनीतिक पार्टियों की मनसा भी है।जिसके कारण महत्वपूर्ण सभी विभाग बर्बाद और बदनाम होने के बाद एक दिन बंद भी होते जा रहे हैं।जिसका फायदा कारपोरेट घरानों और पूंजीपतियों को दिया जा रहा है। सरकारी और सार्वजनिक सम्पत्तियों का निजीकरण इन्हीं पूंजीपतियों के इशारे पर हो रहा है।जिसको समाज की भोली भाली जनता समझ भी नहीं पा रही है।

पार्टी के किसान मजदूर सभा सचिव श्यामलाल झरिया ने बताया है,कि जिले के अंदर जनहितकारी योजनाओं की लीपापोती करना प्रशासन के लिए बांएं हाथ का खेल बन गया है। वहीं दूसरी ओर कानून जैसे महत्वपूर्ण संविधानिक शक्तियों का दूरुपयोग रुक नहीं रहा है।उदाहरण के तौर पर आपने बताया है,कि वनाधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत उन सभी भूमिहीन ग्रामीणों को उनके काबिज की वन भूमि का पट्टा दिये जाने आवेदन लेना था,जिनका कब्जा 2006 से पहले से उस वन भूमि पर है।इस संबंध में आवेदन ले तो लिए गये,परंतु पट्टा देने की कार्यवाही को गति देने की बजाय अधिकतर आवेदकों को अपात्र मात्र बताकर आवेदन निरस्त करने का खेल युद्ध स्तर पर चल रहा है।जिससे खासकर सदियों से वन और वनोत्पादन पर आश्रित रहकर जीवन यापन कर रहे मूलनिवासी, वनवासी,आदिवासी समुदाय भारी संकट ग्रस्त चल रहा है।जवाबदार विभाग और अधिकारियों के चक्कर लगा लगा इतना हताश हो चुका है,कि अब तो सरकार को और पंचायती राज संस्थाओं और राजस्व, वनविभाग जैसे महकमों को ही कोसने लगा है। अपने आपको ठगा,छला, वंचित और शोषित मान चुका है।इसी तरह राजस्व की सरकारी जमीन पर वर्षों से काबिज हजारों भूमिहीन भू-अधिकार पट्टा पाने आवेदन कागज थैले में लिए घूमते पीढ़ियां गुजारने मजबूर हो रहा है।कोई सुनने वाला नहीं है।पार्टी के राज्य सचिव कामरेड विजय कुमार ने बताया है,कि तथाकथित विकास परियोजनाओं के नाम पर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों की जमीनों का अधिग्रहण कर कई पीढ़ियों से बसते चले आ रहे ग्रामीणों को विस्थापन की खाई में धकेलने का क्रम बंद न होकर बढ़ते ही जा रहा है।मंडला जिला और खासकर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र भी पच्चीसों साल से इसका दुख दंश भुगत रहा है। पहले बरगी बांध परियोजना फिर चुटका परमाणु परियोजना और अब बसनिया जैसे और भी दो-तीन बांध एवं वन परियोजनाओं को स्थापित किये जाने का काम युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है। स्थानीय जनता के लाभ के लिए स्थापित किये जाने के झूठे वादे से तैयार इन वृहद् परियोजनाओं से दुष्प्रभावित होकर सैकड़ों गांवों के लाखों परिवार तो दरबदर हो ही चुके हैं,अब जल्द ही सैकड़ों आदिवासी बाहुल्य ग्रामों के लाखों परिवारों की भी बारी है।जिनकी ओर से वकालत करने वाले जवाबदार जनप्रतिनिधियों का मुंह बंद और दिमाग कुंद चल रहा है।गरीब और मध्यम परिवारों के इस संकटकाल में बस चंद और स्वयंसेवी संगठन व समाजसेवक ही सहारा बने हुए हैं।ऐसे परियोजनाओं को तत्काल बंद करने की मांग भी ज्ञापन में प्रमुखता से रखी गई है।

ज्ञापन आन्दोलन का समर्थन करने पहुंचे लोकतांत्रिक अधिकार मंच संयोजक पी.डी.खैरवार ने बताया है, कि जनकल्याणकारी योजनाओं, महत्वपूर्ण कानूनों के क्रियान्वयन और संचालन के लिए वर्तमान शासन-प्रशासन की इच्छा शक्ति मर सी गई है। चारों ओर मंहगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार,नशा,चोरी,लूट और घूंसखोरी,कालाबाजारी, जमाखोरी,बलात्,हिंसा का साम्राज्य पैर पसारते जा रहा है।जिनको रोक पाना तो दूर रोक लगाना भी सरकार के लिए टेढ़ी खीर बनी हुई है।जबकि जनता को शांति सद्भावना और अमन के साथ रोजगार की जरूरत है।इधर सरकारी और सार्वजनिक सम्पत्तियों का निजीकरण करने का सिलसिला सरकार ने धड़ल्ले से जारी रखी हुई है। नौकरियां धीरे-धीरे खत्म सी होती जा रही हैं।सारे विभागों में छोटे से बड़े कर्मचारियों और अधिकारियों के पद भारी मात्रा में वर्षों से खाली पड़े हुए हैं। सरकार इनको भरने के मूड में बिल्कुल दिखाई नहीं दे रही है।बेरोजगारों खासकर शिक्षित बेरोजगारों की भरमार होती जा रही है। जिंदा मात्र बचे रहने के लिए

बेरोजगारी से त्रस्त जनता गलत रास्ते चुनने को मजबूर होते नजर आ रही है।सरकार नौकरियां दे भी रही है तो बेगार जैसी हालत बनाकर रखी हुई है। परिवार के भरण-पोषण काबिल भी वेतन और सुविधाएं नहीं दे पा रही है।लोग मजबूर होकर उज्जवल भविष्य की आशा ही आशा में भूखे पेट नाममात्र की नौकरी कर रहे हैं।आपने ऐसी नौकरियों में वर्षों से लगे वर्ग जैसे अतिथि शिक्षक,प्रेरक, मेंट, रोजगार सहायक,आशा,ऊषा सहयोगिनी, मध्यान्ह भोजन पोषण रसोइया, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका,आउटसोर्स संविदाकर्मियों सहित शासकीय सेवा में लगे सभी दबे कुचले कर्मियों को उचित वेतन के साथ रैगुलर करने की मांग दमदारी से रखी है।

ज्ञापन आन्दोलन में नेतृत्रत्वकारियों के साथ जिले के दूरस्थ क्षेत्रों मवई, बिछिया,घुघरी, बीजाडांडी,निवास, नारायणगंज, मोहगांव,मंडला से चरन सिंह मरकाम,कमलेश धुर्वे,समारू तुमराची,विजय ताम्रकार, राजेश बैरागी,बुद्दूलाल मरावी,धरम सिंह धुर्वे,अशोक कनौजे, शोभित,हम्मी लाल,सोहन भारतीया,मंगरू तेकाम,सोनवती,जन्ती बाई,पुसिया बाई,संजू बाई सहित आदिवासी बाहुल्य सैकड़ों की संख्या बल मुख्य रूप से सामिल हुए।

 

भवदीय

मनुअर अली

पी.डी.खैरवार

Related posts

जिले में अब तक 1186.2 मिमी वर्षा  

Reva India News

अब पॉलीटेक्निक कॉलेज में सभी श्रेणियों को मिलेगा प्रवेश एकलव्य योजनांतर्गत 19 अक्टूबर तक रहेगी पंजीयन की सुविधा

Reva India News

हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वूमेन अंतर्गत विशेष जागरूकता अभियान का शुभारंभ

Reva India News

Leave a Comment