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स्व-सहायता समूह में जुड़ने से बदली सवनी बाई की तकदीर अब दूसरों को दे रही हैं स्वावलंबन का प्रशिक्षण

मंडला, 9 सितम्बर 2026

जिले के विकासखंड नारायणगंज अंतर्गत ग्राम गढ़ार की निवासी श्रीमती सवनी बाई का जीवन कभी सीमित साधनों और आर्थिक तंगी के बीच बीत रहा था। 8वीं तक शिक्षित सवनी बाई के परिवार में कुल 6 सदस्य हैं। उनके पति श्री सुकल सिंह कुलस्ते पारंपरिक रूप से केवल खेती-किसानी करते थे, जिससे परिवार की कुल वार्षिक आय 50 हजार रुपए से भी कम हो पाती थी। इतने कम साधनों में 6 सदस्यों का भरण-पोषण करना और बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाना बेहद कठिन चुनौती थी।

 

मिशन से जुड़ाव और आत्मविश्वास की नई उड़ान

 

श्रीमती सवनी बाई के जीवन में सकारात्मक बदलाव तब आया जब वे मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (जनपद पंचायत नारायणगंज) के संपर्क में आईं। वे ‘ज्योति महिला आजीविका समूह’ से जुड़ीं और आगे चलकर ‘एकता ग्राम संगठन’ की सक्रिय सदस्य बनीं। मिशन और सहयोगी संस्था ’प्रदान’ के माध्यम से उन्हें विभिन्न आय अर्जन गतिविधियों तथा कौशल विकास का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। इस प्रशिक्षण ने उनके भीतर आत्मविश्वास जगाया, जिसके बाद उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ-साथ आजीविका के नए मॉडलों को अपनाने का निर्णय लिया।

 

तीन प्रमुख गतिविधियों से मिली सफलता

 

वैज्ञानिक तकनीकों और बेहतर प्रबंधन को अपनाकर सवनी बाई ने तीन आजीविका मॉडल शुरू किए। जिसमे मशरूम उत्पादन में मात्र 3 हजार रुपये की शुरुआती लागत से मशरूम उत्पादन की शुरुआत की, जिसमें से महज डेढ़ हजार रूपए की लागत से उन्होंने मशरूम उत्पादन के लिए बैग्स तैयार किए, इसके बाद 15-15 दिनों के अंतर से मशरूम की हार्वेस्टिंग कर लोकल मार्केट में उनका विक्रय किया। इस गतिविधि से उन्हें 10 से 15 हजार तक की अतिरिक्त आमदनी होने लगी। साथ ही कुक्कुट (मुर्गी) पालन में 10-15 हजार रुपए के साथ व्यवस्थित रूप से मुर्गी पालन शुरू किया, जिससे वर्तमान में वे प्रतिवर्ष लगभग 30 हजार की आय अर्जित कर रही हैं। इसी प्रकार जैविक न्यूट्री-गार्डन सब्जी उत्पादन में अपने खेत में दैनिक उपयोग की मौसमी सब्जियों का जैविक उत्पादन शुरू किया। इससे परिवार को पौष्टिक व विष-मुक्त भोजन मिलने के साथ-साथ सब्जियों की बिक्री से वर्षभर निरंतर आय सुनिश्चित हुई।

 

सालाना आय बढ़कर हुई 1.50 लाख, बच्चों को कराई स्नातक तक की पढ़ाई

 

जो परिवार कभी 50 हजार रुपए की वार्षिक आय में गुज़र-बसर करने को मजबूर था, आज सवनी बाई की मेहनत और सही मार्गदर्शन से उस परिवार की कुल वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1.50 लाख हो चुकी है। इस बढ़ी हुई आमदनी के दम पर सवनी बाई ने अपने सभी बच्चों की स्नातक तक की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी करवाई है और अपनी बेटी को भी उच्च व बेहतर शिक्षा प्रदान की है।

 

अब स्वयं बन चुकी हैं मास्टर ट्रेनर

 

आज सवनी बाई का ज्ञान और अनुभव इतना समृद्ध हो चुका है कि वे स्वयं क्षेत्र के अन्य किसानों और ग्रामीण महिलाओं को मशरूम उत्पादन तथा मुर्गी पालन का प्रशिक्षण दे रही हैं। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और प्रदान संस्था के सहयोग से आत्मनिर्भर बनीं सवनी बाई ने यह साबित कर दिया है कि सही अवसर, प्रशिक्षण और दृढ़ संकल्प से ग्रामीण महिलाएं न केवल अपने परिवार का भविष्य संवार सकती हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत बन सकती हैं।

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